पश्चिम बंगाल में कलकत्ता हाईकोर्ट में बुधवार को इंडियन सेक्युलर फ्रंट यानी आईएसएफ की एक बड़ी याचिका पर सुनवाई होने जा रही है. यह याचिका पार्टी के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने दाखिल की है. उन्होंने चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें पार्टी का चुनाव चिन्ह बदल दिया गया. पहले आईएसएफ को "लिफाफा" चिन्ह मिला हुआ था, लेकिन अब आयोग ने इसे "अलमारी" चिन्ह दे दिया है. यह मामला जस्टिस कृष्णा राव की अदालत में सुना जाएगा.
पूरा मामला क्या है, यह समझना जरूरी है. आईएसएफ ने इसी साल अप्रैल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में "लिफाफा" चिन्ह पर ही चुनाव लड़ा था. लेकिन अब चुनाव आयोग ने यह चिन्ह पार्टी से वापस ले लिया और उसकी जगह "अलमारी" चिन्ह दे दिया. नौशाद सिद्दीकी भांगड़ सीट से विधायक हैं और पार्टी के मुखिया भी हैं. उन्होंने आयोग के इस फैसले को "अन्याय" बताते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है.
इस मामले में एक और दिलचस्प मोड़ है. "लिफाफा" चिन्ह अब तृणमूल कांग्रेस के एक धड़े को दे दिया गया है, जिसका नेतृत्व ऋताब्रत बनर्जी कर रहे हैं. यह गुट खुद को "डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस" कहता है. दरअसल तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह चल रही है और पार्टी दो धड़ों में बंट गई है.
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एक तरफ ऋताब्रत बनर्जी का गुट है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी की अगुवाई वाला मूल गुट है, जिसे अब "फुटबॉल खिलाड़ी" वाला नया चिन्ह मिला है. इस विवाद के चलते चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस का नाम और उसका पुराना चुनाव चिन्ह "फूल और घास" फिलहाल के लिए रोक दिया था.
इस पूरे मामले का असर आने वाले उपचुनाव पर भी पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं, और चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को खत्म हो जाएगा. आईएसएफ ने नंदीग्राम सीट से अपना उम्मीदवार भी उतारा है, इसलिए चिन्ह से जुड़ा यह विवाद पार्टी के लिए काफी अहम हो गया है. पार्टी के वकील शमीम अहमद ने मंगलवार को जस्टिस राव की अदालत में इस मामले का जिक्र करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की थी, जिसके बाद अब बुधवार को इस पर सुनवाई तय हुई है.