संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के बीच इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ एक नया कैंपेन शुरू किया है. इजरायल के प्रवासी मामलों और यहूदी विरोधी भावना से निपटने वाले मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के राष्ट्रीय जन कूटनीति निदेशालय ने इस कैंपेन को लॉन्च किया है. इसका नाम "यूएन की झूठ इंडस्ट्री" रखा गया है. इजरायल का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र में उसके खिलाफ व्यवस्थित और गलत पक्षपात किया जाता है.
इस कैंपेन के तहत एक व्यंग्यात्मक वीडियो भी जारी किया गया है. वीडियो में संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल में अलग-अलग देशों को तोतों के रूप में दिखाया गया है. ये तोते एक के बाद एक "ब्लेम इजरायल" यानी "इजरायल को दोष दो" कहते नजर आते हैं. जैसे-जैसे वीडियो आगे बढ़ता है, यही आवाज पूरे हॉल में गूंजने लगती है. आखिर में स्क्रीन पर लिखा आता है- "झूठ को दोहराने से वह सच नहीं बन जाता."
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UN की रिपोर्ट और दावों पर इजरायल का हमला
इजरायल सरकार ने इस कैंपेन के साथ एक वेबसाइट भी शुरू की है. इसमें संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों और उसके मुताबिक इजरायल के खिलाफ पक्षपातपूर्ण जानकारी के उदाहरण पेश किए गए हैं. वेबसाइट को इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सहयोग से तैयार किया गया है. इसमें 7 अक्टूबर के हमले के बाद इजरायल को लेकर संयुक्त राष्ट्र के दस्तावेजों और सूचनाओं पर सवाल उठाए गए हैं.
कैंपेन में सूचना में हेरफेर, गाजा में भुखमरी को लेकर दावे, UNRWA में हमास की कथित घुसपैठ और इजरायल के खिलाफ "नरसंहार" के नैरेटिव जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है. वेबसाइट पर संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों की ओर से कथित अंदरूनी दबाव और उत्पीड़न से जुड़ी गवाही होने का भी दावा किया गया है.
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इजरायल के खिलाफ आरोपों की "इको चैंबर" बन गई UNGA!
इजरायल के प्रवासी मामलों के मंत्री अमीखाई चिकली ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा बार-बार इजरायल के खिलाफ आरोपों की "इको चैंबर" बन गई है. वहीं राष्ट्रीय जन कूटनीति निदेशालय की प्रमुख त्जिपी होटोवेली ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों पर गंभीर आरोप लगाए. यह कैंपेन मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप की राजधानियों में डिजिटल प्रचार पर केंद्रित है.