एक विशाल शालुक के पत्ते पर बैठकर कोई व्यक्ति पानी में तैर रहा हो, यह दृश्य पहली नजर में किसी फिल्म का हिस्सा लग सकता है. लेकिन हावड़ा के शिबपुर स्थित आचार्य जगदीशचंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान में इन दिनों ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है. यहां जायंट वॉटर लिली यानी विक्टोरिया अमेजोनिका के विशाल पत्ते पर लोगों को बैठाकर पानी में तैराने का अनोखा प्रयोग किया जा रहा है. खास बात यह है कि इस प्रयोग में सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बल्कि 80 से 100 किलो या उससे अधिक वजन वाले वयस्क लोगों को भी शामिल किया जा रहा है. उद्यान प्रबंधन का दावा है कि भारत में पहली बार इस तरह का प्रयोग किया जा रहा है.
विशाल पत्ते पर बैठकर पानी में तैर रहे वयस्क
बोटानिकल सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक डॉ. कनाद दास की मौजूदगी में इस विशेष एडवेंचर की शुरुआत हुई. पिछले कुछ दिनों में उद्यान के विशेषज्ञ कर्मचारियों के साथ-साथ वहां आने वाले कई आम लोगों ने भी जायंट वॉटर लिली के विशाल पत्ते पर बैठकर पानी में तैरने का अनुभव लिया है. इससे पहले इस तरह के पत्तों पर बच्चों के तैरने के दृश्य सामने आते रहे हैं. लेकिन अब 80 से 100 किलो या उससे अधिक वजन वाले वयस्कों को भी इस विशाल पत्ते पर बैठाकर पानी में तैराने का प्रयोग किया जा रहा है. यही वजह है कि उद्यान में आने वाले लोगों के बीच इस प्रयोग को लेकर खासा आकर्षण और जिज्ञासा देखने को मिल रही है.
आचार्य जगदीशचंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान वनस्पति संरक्षण और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्थान है. यहां देश और विदेश की कई तरह की जलीय वनस्पतियों को संरक्षित किया जाता है. इन्हीं में जायंट वॉटर लिली यानी विक्टोरिया अमेजोनिका भी शामिल है. अमेजन के जंगलों में पाई जाने वाली यह विशाल जलीय वनस्पति लंबे समय से बोटानिकल गार्डन के प्रमुख आकर्षणों में रही है. इस पौधे की सबसे खास पहचान इसके विशाल पत्ते हैं. इसके लंबे तने कांटेदार होते हैं. इसके मुकाबले इसका फूल काफी छोटा होता है और उसका रंग गुलाबी होता है. हालांकि, दुनिया भर में विक्टोरिया अमेजोनिका की पहचान मुख्य रूप से उसके विशाल पत्तों की वजह से होती है.
शुरुआत में इस जायंट वॉटर लिली को बोटानिकल गार्डन के एक ही जलाशय में संरक्षित किया जाता था. लेकिन वर्ष 2020 में आए चक्रवाती तूफान अम्फान के दौरान यह पौधा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था. इसके बाद इसके संरक्षण के साथ-साथ इस दुर्लभ जलीय वनस्पति को आम दर्शकों के लिए ज्यादा आसानी से उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया. इसी योजना के तहत उद्यान के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद 16 जलाशयों में विक्टोरिया अमेजोनिका का संरक्षण शुरू किया गया.
शोधकर्ता डॉ. आर. सरवनन के मुताबिक, बोटानिकल गार्डन में देश और विदेश की कई तरह की जलीय वनस्पतियां संरक्षित हैं. हालांकि, आम लोगों में जायंट वॉटर लिली को लेकर सबसे ज्यादा आकर्षण और उत्सुकता रहती है. इसकी सबसे बड़ी वजह इसके विशाल आकार के पत्ते और कांटेदार लंबे तने हैं. लोग यह देखकर भी हैरान होते हैं कि इतना बड़ा पत्ता पानी की सतह पर किस तरह फैला रहता है और क्या यह किसी व्यक्ति का वजन सहन कर सकता है. इसी जिज्ञासा को देखते हुए फिलहाल उद्यान प्रबंधन की पहल पर इस विशेष प्रयोग को आगे बढ़ाया जा रहा है.
80 से 100 किलो या उससे अधिक वजन वाले वयस्क व्यक्ति को पत्ते पर बैठाकर पानी में तैराने के दौरान विशेष सावधानी बरती जा रही है. उद्यान प्रबंधन का ध्यान इस बात पर है कि पत्ते को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे. इसके लिए पत्ते के ऊपर और नीचे दो तैरने वाले सहायक उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन उपकरणों की मदद से व्यक्ति का वजन सीधे पत्ते पर नहीं पड़ता, बल्कि संतुलित तरीके से वितरित होता है. इससे पत्ते के टूटने या फटने की आशंका कम होती है. यानी इस पूरे प्रयोग में सिर्फ व्यक्ति को पानी में तैराना ही मकसद नहीं है, बल्कि विशाल पत्ते को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
उद्यान के शोधकर्ताओं और अधिकारियों के मुताबिक, विक्टोरिया अमेजोनिका में फूल आने से पहले बड़े-बड़े पत्ते विकसित होते हैं. इसी दौरान इस प्रयोग के लिए उपयुक्त और मजबूत पत्तों का चयन किया जाता है. इसके बाद चुने गए पत्ते पर विशेष व्यवस्था के साथ व्यक्ति को बैठाकर पानी में तैराने का प्रयोग किया जाता है. इस तरह पौधे के प्राकृतिक विकास और संरक्षण का भी ध्यान रखा जा रहा है और लोगों को इसकी खासियत करीब से देखने का मौका भी मिल रहा है.
इस अनोखे एडवेंचर के लिए बोटानिकल गार्डन के गेट नंबर-1 से करीब 100 मीटर की दूरी पर स्थित एक जलाशय के हिस्से को चिह्नित किया गया है. इसी स्थान पर जायंट वॉटर लिली के विशाल पत्ते पर बैठकर पानी में तैरने का यह प्रयोग चल रहा है. यहां आने वाले लोगों के लिए यह अनुभव इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर शालुक के पत्ते को सिर्फ पानी में तैरते हुए देखा जाता है, लेकिन इस प्रयोग में उसके विशाल आकार को बिल्कुल अलग तरीके से महसूस किया जा रहा है.
अगले साल आम लोगों के लिए शुरू हो सकता है एडवेंचर
फिलहाल इस पहल को प्रयोग के तौर पर चलाया जा रहा है. उद्यान प्रबंधन के अनुसार, अगले वर्ष से इस अनुभव को आम दर्शकों के लिए भी शुरू करने की योजना है. जायंट वॉटर लिली का मौसम आमतौर पर फरवरी से जुलाई तक रहता है. ऐसे में इस अवधि के दौरान बोटानिकल गार्डन आने वाले लोगों को इस दुर्लभ जलीय वनस्पति को देखने के साथ-साथ उसके विशाल पत्ते पर बैठकर पानी में तैरने का अनोखा अनुभव भी मिल सकता है.
डॉ. आर. सरवनन ने इस पहल की सफलता के लिए डॉ. कनक दास और गार्डन इंचार्ज मानस भौमिक की भूमिका की भी सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया. इस तरह हावड़ा का बोटानिकल गार्डन अब सिर्फ दुर्लभ पौधों और वनस्पतियों को देखने की जगह नहीं रह गया है, बल्कि जायंट वॉटर लिली के विशाल पत्ते के साथ यह अनोखा प्रयोग भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है. 80 से 100 किलो या उससे अधिक वजन वाले वयस्कों का इस पत्ते पर बैठकर पानी में तैरना इस पहल को और खास बना रहा है.