बीजेपी नेता दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हुई टीएमसी की रैली में मची अफरा-तफरी पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि टीएमसी नेताओं का व्यवहार बेकाबू हो गया है और सत्ता में रहते हुए मनमानी करना आसान होता है. दिलीप घोष ने रैली के दौरान ममता बनर्जी के द्वारा थप्पड़ मारने की घटना का भी जिक्र किया. उन्होंने विपक्ष में रहकर धैर्य से आंदोलन करने की सीख भी टीएमसी को दी.
दिलीप घोष ने कहा कि वे किसी के घर में जाकर नहीं बल्कि घर के बाहर अपनी बात रख रहे हैं और अगर हालात ने मजबूर किया तो आगे भी सख्त रुख अपनाएंगे.
दिलीप घोष ने कहा कि रैली में ममता बनर्जी द्वारा किसी को थप्पड़ मारने का मामला सामने आया है. उन्होंने इस पर तंज कसते हुए कहा कि लगता है टीएमसी नेतृत्व अब पूरी तरह अपना संयम खो चुका है.
उनके मुताबिक सत्ता में रहकर आंखें दिखाना और मनमानी करना आसान होता है, लेकिन विपक्ष में रहकर आंदोलन चलाने के लिए धैर्य की जरूरत होती है. सिर्फ नाटक करने से जनता की आवाज नहीं उठाई जा सकती.
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घोष ने आगे कहा कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को लंबे समय तक टीएमसी के विरोध का सामना करना पड़ा है. उनका आरोप है कि पहले उनके काफिले को रास्ते में रोका जाता था और गाड़ियां तक तोड़ी जाती थीं.
उन्होंने यह भी दावा किया कि जहां भी बीजेपी अपने कार्यक्रम करती थी, वहां माइक लगाकर टीएमसी का चर्चित नारा 'खेला होबे' बजाया जाता था. उनके अनुसार पार्टी को यह सब पांच से सात साल तक झेलना पड़ा है.
दिलीप घोष ने कहा कि अगर उनके कार्यकर्ता जीत के जश्न में गाना बजाकर थोड़ा नाच भी लेते हैं तो इसमें इतनी आपत्ति क्यों जताई जा रही है. उन्होंने साफ किया कि पार्टी ने अभी तक सिर्फ विरोधियों के घर के बाहर प्रदर्शन किया है, लेकिन जरूरत पड़ने पर आगे और तेज तरीके अपनाए जा सकते हैं.