अफगानिस्तान क्रिकेट को नई पहचान दिलाने वाले पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान अब इस दुनिया में नहीं हैं. पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान का पार्थिव शरीर जब अफगानिस्तान पहुंचा तो उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए क्रिकेटरों और प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी. राशिद खान, मोहम्मद नबी, इब्राहिम जादरान, हशमतुल्लाह शाहिदी, रहमानुल्लाह गुरबाज, अजमतुल्लाह उमरजई, रहमत शाह, हामिद हसन और नवरोज मंगल जैसे क्रिकेटर्स काबुल एयरपोर्ट पर मौजूद थे.
खिलाड़ियों की नम आंखें और चेहरों पर पसरा दुख इस बात की गवाही दे रहा था कि अफगानिस्तान क्रिकेट ने सिर्फ एक पूर्व तेज गेंदबाज ही नहीं, बल्कि एक बेहद करीबी साथी और दोस्त भी खो दिया है. सामने आए भावुक दृश्यों में कई खिलाड़ी एक-दूसरे को गले लगाकर अपना दुख बांटते नजर आए. शापूर जादरान का ताबूत जब काबुल पहुंचा, तो हर तरफ मातम पसरा हुआ था. उनके लिए प्रार्थनाएं की गईं और हजारों नम आंखों ने अफगानिस्तान क्रिकेट के इस हीरो को अंतिम विदाई दी.
टीम के स्टार क्रिकेटर राशिद खान के लिए भी यह पल बेहद मुश्किल था. अपने साथी और दोस्त को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था. शापूर जादरान का निधन हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) नाम की एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से जूझने के बाद हुआ. उनके निधन की खबर ने अफगानिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत को झकझोर दिया था.
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शापूर जादरान उन खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्होंने उस दौर में अफगानिस्तान क्रिकेट का प्रतिनिधित्व किया, जब टीम इंटरनेशनल स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही थी. बाएं हाथ के तेज गेंदबाज शापूर अपनी रफ्तार, आक्रामक अंदाज और मुश्किल परिस्थितियों में हार नहीं मानने के जज्बे के लिए जाने जाते थे.
उन्होंने वनडे और टी20 इंटरनेशनल में अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व किया और टीम की कुछ यादगार जीतों में अहम भूमिका निभाई. अफगानिस्तान को आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट्स तक पहुंचाने और दुनिया के क्रिकेट नक्शे पर नई पहचान दिलाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा.
आज अफगानिस्तान की टीम दुनिया की बड़ी टीमों को चुनौती देने का दम रखती है, लेकिन इस सफलता की नींव रखने वाले खिलाड़ियों में शापूर जादरान का नाम हमेशा सम्मान से लिया जाएगा. अंतिम विदाई में उमड़ी भीड़ और राशिद खान समेत साथी खिलाड़ियों के आंसुओं ने बता दिया कि शापूर का अफगानिस्तान क्रिकेट से रिश्ता सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं था.
मैदान पर अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को परेशान करने वाला यह गेंदबाज जिंदगी की जंग हार गया, लेकिन उनकी उपलब्धियां, संघर्ष और अफगानिस्तान क्रिकेट के लिए दिया गया योगदान हमेशा जिंदा रहेगा. शापूर जादरान अब मैदान पर नजर नहीं आएंगे, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के क्रिकेटरों को प्रेरित करती रहेगी.