तृणमूल कांग्रेस विधायकों के समर्थन वाले पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर मामले की जांच कर रही पश्चिम बंगाल सीआईडी की टीम सोमवार को एक बार फिर अभिषेक बनर्जी के आवास पहुंची. अधिकारियों ने उन्हें नया नोटिस सौंपने की कोशिश की. अभिषेक बनर्जी सोमवार को पहले जारी समन के बावजूद पूछताछ के लिए भवानी भवन स्थित सीआईडी दफ्तर नहीं पहुंचे थे.
सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने 10 जून को हाई कोर्ट में निर्धारित एक सुनवाई का हवाला देते हुए सीआईडी से पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय मांगा है. उन्होंने जांच एजेंसी से समन की तारीख आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है.
इससे पहले सीआईडी ने उन्हें सोमवार दोपहर तक साउथ कोलकाता स्थित अपने भवानी भवन मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा था, लेकिन वह विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच गए थे. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी भी इस बैठक में शामिल होने के लिए रविवार को ही दिल्ली पहुंच गई थीं.
क्या है फर्जी हस्ताक्षर का मामला?
यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) की नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेजों में तृणमूल विधायकों के हस्ताक्षर कथित रूप से फर्जी किए जाने के आरोपों से जुड़ा है. आरोप है कि विपक्ष के नेता के रूप में सोवनदेब चट्टोपाध्याय, उपनेता के रूप में असीमा पात्रा और नैना बनर्जी, मुख्य सचेतक के रूप में फिरहाद हकीम की नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों पर विधायकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी पाई गई थी.
सीआईडी अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 13 विधायकों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें से तीन विधायकों ने दावा किया है कि 6 मई की बैठक के प्रस्ताव रजिस्टर में उनके नाम के सामने जो हस्ताक्षर दर्ज हैं, वे उनके नहीं हैं. वहीं कैनिंग पूर्व के टीएमसी विधायक मोहम्मद बहरुल इस्लाम ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह उस बैठक में शामिल ही नहीं हुए थे, जिसमें यह प्रस्ताव पारित किए जाने का दावा किया गया है.
विवाद तब शुरू हुआ जब अभिषेक बनर्जी ने 9 मई को विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया कि टीएमसी विधायक दल की बैठक में प्रमुख विधायी नियुक्तियों को लेकर निर्णय लिया गया था. इसके बाद 20 मई को उन्होंने बैठक के प्रस्ताव रजिस्टर और अटेंडेंस शीट की प्रति जमा कराई, जिसमें दावा किया गया कि 6 मई की बैठक में तृणमूल कांग्रेस के 80 में से 70 विधायक मौजूद थे.
TMC विधायकों ने ही उठाए सवाल
हालांकि 27 मई को टीएमसी के दो विधायकों ने आरोप लगाया कि 6 मई को विपक्ष के नेता को लेकर कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था. उनका कहना था कि उन्होंने प्रस्ताव रजिस्टर पर हस्ताक्षर 19 मई को किए थे. दोनों विधायकों ने यह भी आरोप लगाया कि 6 मई का प्रस्ताव 'मनगढ़ंत और फर्जी' है तथा कई हस्ताक्षर ब्लॉक लेटर्स में लिखे गए हैं. इस मामले में विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत के बाद हेयर स्ट्रीट थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया.
अगले ही दिन जांच सीआईडी को सौंप दी गई. जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी से विधायकों की बैठक का असली प्रस्ताव रजिस्टर पेश करने को कहा है. हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स की मदद से यह जांच की जा रही है कि दस्तावेजों में दर्ज विधायकों के हस्ताक्षर में किसी प्रकार की जालसाजी हुई है या नहीं. सीआईडी की एक टीम शनिवार को भी अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची थी और उन्हें नया नोटिस सौंपा था. नोटिस स्वीकार करते हुए अभिषेक ने कहा था कि वह अपने कानूनी सलाहकारों से परामर्श करने के बाद उचित जवाब देंगे.
मैं सिर नहीं झुकाऊंगा: अभिषेक बनर्जी
अभिषेक बनर्जी ने इस जांच को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि वह किसी भी तरह के दबाव में नहीं आएंगे. उन्होंने कहा, 'पहले भी मुझे डराया नहीं जा सका और आगे भी मैं झुकने वाला नहीं हूं. मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है. ईडी और सीबीआई ने जब-जब मुझे बुलाया, मैं जांच में सहयोग के लिए उपस्थित हुआ. अगर कोई यह सोचता है कि समन भेजकर, झूठे मामलों में फंसाकर या जेल भेजकर हमें झुकाया जा सकता है, तो वह गलतफहमी में है. मेरा गला भी काट दिया जाए, तब भी मैं सिर नहीं झुकाऊंगा.'
पूर्व टीएमसी नेताओं पर निशाना साधते हुए अभिषेक बनर्जी कहा, 'हर कोई अपने राजनीतिक हितों के लिए अमित शाह की खुशामद करके बीजेपी में शामिल नहीं होता. जो लोग आज भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े-बड़े भाषण देते हैं, उन्हीं पर ईडी और सीबीआई के कई मामले चल रहे हैं.' उन्होंने जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा, 'हम गद्दार नहीं हैं. अगर हिम्मत है तो मुझे गिरफ्तार कर लीजिए. मैं कानूनी लड़ाई लड़ूंगा. सीआईडी, ईडी, सीबीआई, कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस सब आपकी हैं. मैं कहीं भाग नहीं रहा हूं.'
अभिषेक बनर्जी ने अपने आवास पर कथित भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन को लेकर कोलकाता नगर निगम (KMC) की ओर से जारी नोटिस का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नोटिस में उल्लंघन का विवरण संलग्न होने की बात कही गई थी, लेकिन उन्हें कोई विवरण नहीं दिया गया. उन्होंने नोटिस का जवाब देने के साथ ही कलकत्ता हाई कोर्ट में इसे चुनौती भी दी है. हाई कोर्ट ने पिछले दिनों अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुआ कोलकाता नगर निगम के नोटिस को अधूरा बताया था और उल्लंघन के विवरण के साथ नया नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था.