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BJP का बंगाल में तीनों राज्यसभा सीटें जीतना तय! बगावत से जूझ रही TMC मुकाबले में भी नहीं

पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने टीएमसी की अंदरूनी कलह और बीजेपी की बढ़ती राजनीतिक ताकत को खुलकर सामने ला दिया है. विधानसभा में भारी बहुमत के चलते बीजेपी तीनों सीटों पर मजबूत स्थिति में दिख रही है, जबकि ममता बनर्जी और बागी गुट के बीच जारी संघर्ष ने टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और वह मुकाबले में ही नहीं दिख रही.

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टीएमसी की अंदरूनी लड़ाई से बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में बीजेपी की क्लीन स्वीप करीब-करीब तय है. (File Photo: PTI)
टीएमसी की अंदरूनी लड़ाई से बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में बीजेपी की क्लीन स्वीप करीब-करीब तय है. (File Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राज्य में सियासी हलचल बढ़ गई है. बंगाल विधानसभा के मौजूदा गणित को देखते हुए बीजेपी तीनों सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, जबकि अंदरूनी कलह से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए मुकाबला करना भी मुश्किल माना जा रहा है. निर्वाचन आयोग ने इन तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव कराने की घोषणा की है. ये सीटें पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं. 

तीनों नेताओं ने पिछले महीने राज्यसभा की सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस दोनों से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने विधानसभा चुनाव में तृणमूल की हार के बाद पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे. सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बराइक का कार्यकाल सितंबर 2029 तक था, जबकि सुष्मिता देव का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक चलना था. फिलहाल राज्यसभा में टीएमसी के सदस्यों की संख्या 9 है. 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में बीजेपी के पास 208 विधायक हैं. ऐसे में यदि पार्टी तीन उम्मीदवार उतारती है और उसके सभी विधायक पार्टी लाइन पर मतदान करते हैं, तो प्रत्येक उम्मीदवार को लगभग 69-70 वोट मिल सकते हैं, जो जीत के लिए पर्याप्त माने जा रहे हैं.

एकजुट रहने पर ही खुल सकता है टीएमसी का खाता

राज्यसभा उपचुनाव के नियमों के मुताबिक, तीन सीटों वाले चुनाव में किसी उम्मीदवार को जीत के लिए करीब 70 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होती है. मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी बिना किसी अन्य दल के समर्थन के यह आंकड़ा हासिल कर सकती है. दूसरी ओर, टीएमसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी में चल रही टूट है. तकनीकी रूप से टीएमसी के टिकट पर चुने गए विधायकों की संख्या अब भी करीब 80 है, लेकिन पार्टी अब ममता बनर्जी गुट और विपक्ष के नेता रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में बंटी हुई है.

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अगर टीएमसी एकजुट रहती तो कम से कम एक राज्यसभा सीट के लिए चुनौती पेश कर सकती थी, लेकिन मौजूदा हालात में दोनों गुटों के बीच समझौते की संभावना बेहद कम है. यह चुनाव सिर्फ संख्या का खेल नहीं माना जा रहा, बल्कि टीएमसी के अंदर नेतृत्व की लड़ाई का बड़ा संकेत भी है. दोनों गुट पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर नियंत्रण को लेकर निर्वाचन आयोग के सामने दावा पेश कर चुके हैं. ममता बनर्जी गुट ने राज्यसभा में हो रहे नुकसान को ज्यादा महत्व नहीं देते हुए कहा कि ये सीटें उन नेताओं के इस्तीफे से खाली हुईं जिन्होंने संकट के समय पार्टी छोड़ दी.

ममता और बागी गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी

ममता गुट के एक वरिष्ठ नेता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई कहा, 'ये सीटें टीएमसी की थीं और पिछली विधानसभा में पार्टी की संख्याबल के आधार पर जीती गई थीं. कुछ नेताओं ने विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी छोड़ दी. बंगाल की जनता देख रही है कि कठिन समय में कौन साथ खड़ा रहा और कौन छोड़कर चला गया.' वहीं बागी गुट का कहना है कि सांसदों, विधायकों और नेताओं के इस्तीफे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में भरोसे के संकट का संकेत हैं. बागी खेमे के एक नेता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'ये इस्तीफे अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं. यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश है. संगठन के भीतर लगातार चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया और विधानसभा चुनाव में उसका असर दिखा. असली मुद्दा राज्यसभा सीटें नहीं, बल्कि यह है कि इतने जनप्रतिनिधियों का मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा क्यों नहीं रहा.'

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टीएमसी के 80 में से 65 विधायक बागी गुट के साथ

टीएमसी के बागी गुट ने पहली बार अपनी ताकत तब दिखाई थी जब टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाने के पक्ष में समर्थन दिया था. यह गुट अब करीब 65 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहा है और खुद को असली टीएमसी बता रहा है. वहीं बीजेपी का कहना है कि यह उपचुनाव राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर को दिखाता है. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने न्यूज एजेंसी पीटीआई कहा, 'विधानसभा का मौजूदा गणित राज्यसभा उपचुनाव का परिणाम लगभग तय कर चुका है. टीएमसी खुद से लड़ रही है, जबकि बीजेपी संगठन और शासन पर ध्यान दे रही है. राज्यसभा में हमारी संख्या बढ़ना बंगाल के जनादेश को दर्शाएगा.'

राज्यसभा उपचुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब निर्वाचन आयोग टीएमसी के दोनों गुटों से पार्टी पर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज और संगठनात्मक रिकॉर्ड मांग रहा है. यदि बीजेपी तीनों सीटें जीतती है तो राज्यसभा में उसकी ताकत और बढ़ेगी, जबकि टीएमसी की संख्या और घट जाएगी. इससे भी अहम बात यह होगी कि यह परिणाम विपक्षी दल में जारी टूट के राजनीतिक असर को और स्पष्ट करेगा. ऐसे में 24 जुलाई का यह राज्यसभा उपचुनाव सिर्फ एक औपचारिक चुनाव नहीं माना जा रहा, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति और सत्ता संतुलन की दिशा तय करने वाला अहम संकेत माना जा रहा है.

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