उत्तर प्रदेश में महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार का फोकस बैंकिंग, डिजिटल कारोबार, सरकारी खरीद और ग्रामीण उत्पादों के लिए बड़े बाजार पर है. इस सिलसिले में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में योजना भवन में ग्राम्य विकास विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई.
बैठक में ग्राम्य विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, विभागीय अधिकारियों, भारतीय स्टेट बैंक सहित विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और 10 तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. बैठक के दौरान 'उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना' को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष जोर दिया गया.
योजना के पहले चरण के तहत 1 करोड़ स्वयं सहायता समूह की दीदियों को नया छोटा कारोबार शुरू करने या एग्ज़िस्टिंग उद्यम का विस्तार करने के लिए ₹20 हजार की पहली किश्त ब्याजमुक्त क्रेडिट के रूप में देने की तैयारी की जा रही है. पारदर्शिता बनाए रखने और बिचौलियों की संभावना को खत्म करने के लिए यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी.
इसके अलावा, ग्रामीण महिलाओं के लिए बैंकिंग सेवाओं को सुलभ बनाने, डिजिटल भुगतान, डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन बिक्री, वित्तीय सेवाओं और आधुनिक उद्यम प्रबंधन से महिलाओं को जोड़ने पर जोर दिया गया.
टीएचआर प्लांटों को समूह की दीदियों के जरिए संचालित करने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं. महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं बल्कि उत्पादन, प्रबंधन, मार्केटिंग और सेवा वितरण की जिम्मेदारी संभालने वाली ग्रामीण उद्यमी शक्ति बनाने पर जोर दिया गया है.
ई-रिक्शा योजना में समूह की दीदियों की आय बढ़ाने के लिए ₹2 लाख तक के उच्च गुणवत्ता वाले वाहनों की खरीद पर विचार करने के निर्देश दिए गए. वाहन की गुणवत्ता, महिला की आय क्षमता, बैंक ऋण और सुरक्षित संचालन को ध्यान में रखकर मॉडल तैयार करने को कहा गया.
समूह की दीदियों को पहचान और सुविधाओं से जोड़ने के लिए डिजिटल सुविधाओं से युक्त आई-कार्ड उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं. आई-कार्ड में क्यूआर कोड और डिजिटल सेवाओं को जोड़ने की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया.
समूह की महिलाओं के उत्पादों को सरकारी खरीद में शामिल करने पर विचार करने के निर्देश दिए गए हैं. उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया.
गांव में तैयार उत्पादों को प्रदेश और देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की प्रभावी कार्ययोजना बनाने को कहा गया है. मुख्यालय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को डीएमएम और बीएमएम के काम की नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए.
समूहों की प्रगति, बैंक लिंकेज, महिला उद्यमिता, ऋण वितरण और प्रशिक्षण की साप्ताहिक रिपोर्ट लेने को कहा गया. योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहने और उसका वास्तविक असर ग्रामीण महिलाओं की आय में दिखने पर जोर दिया गया. लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई.
इसके अतिरिक्त, दुग्ध उत्पादन, पशुपालन और मधुमक्खी पालन जैसी आजीविका गतिविधियों से दीदियों को जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय व तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा. प्रदेश में 100 'महिला शक्ति केंद्र' स्थापित करने में तेजी लाने और लखनऊ और प्रयागराज में महिला समूहों के उत्पादों के लिए जल्द क्लस्टर शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
इन क्लस्टरों के जरिए उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और बड़े बाजारों से कनेक्टिविटी मजबूत की जाएगी. बैठक में एसबीआई समेत सभी सार्वजनिक और निजी बैंकों और 10 तकनीकी कंपनियों के साथ महिला समूहों को वित्तीय और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर चर्चा हुई.
एचसीएल फाउंडेशन और यूपी सरकार के बीच ग्रामीण परिवर्तन से जुड़ी 'समुदाय साझेदारी' को वर्ष 2031 तक पांच साल बढ़ाने की दिशा में भी पहल की गई.
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण, आजीविका, डिजिटल समावेशन और सामुदायिक विकास से जुड़े प्रयासों को विस्तार मिलने की उम्मीद है.
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' के संकल्प को यूपी में जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार, बैंक, तकनीकी संस्थान, निजी क्षेत्र और स्वयं सहायता समूहों के बीच मजबूत साझेदारी विकसित कर रही है.
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में गांव की दीदियां उद्यमी, उत्पादक और सेवा प्रदाता के रूप में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला बनेंगी.