प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की पुलिस कस्टडी में हत्या के बाद योगी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं. चाहे समाजवादी पार्टी (सपा) हो या फिर बहुजन समाज पार्टी (बसपा)... सभी ने कानून व्यवस्था को चौपट बताया है. सरकार पर तीखी बयानबाजी के बीच अब बसपा नेताओं को मीडिया वालों से ही डर लगने लगा है.
बसपा नेता इमरान मसूद ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'पता नहीं आपमें से कौन आकर गोली मार दे.' मीडिया से बात करते हुए इमरान मसूद ने कहा कि हम किसी भी सूरत में अपराधियों का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन जिनती हत्या हुई वह पूर्व सांसद और पूर्व विधायक थे और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में गुहार भी लगाई थी.
बसपा नेता इमरान मसूद ने आगे कहा, 'दोनों ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी जान को लेकर खतरा बताया था, लेकिन फिर भी घटना हुई, यह हाल है यूपी की कानून व्यवस्था का, आपसे बात करते हुए मुझे डर है कि कोई कहां से आए और सीधा गोली मार दे, अब तो मैं पहचान करके और देखकर ही बात करूंगा.' यानी इमरान मसूद को पत्रकारों से ही डर लगने लगा है.
फर्जी पत्रकार बनकर आए थे तीनों हत्यारे
इस डर के पीछे की वजह भी है. दरअसल, अतीक और अशरफ के तीनों हत्यारे पत्रकार बनकर आए थे. पुलिस को मौके से कैमरा-आईडी मिला है. तीनों हत्यारे कैमरा-आईकार्ड लेकर आए थे. सभी हत्यारे अतीक के सामने नकली पत्रकार बनकर आए और फायरिंग कर उसे और उसके भाई अशरफ को मार गिराया.
साबरमती जेल से पेशी पर आने के दौरान अतीक अहमद बार-बार मीडिया का शुक्रिया अदा कर रहा था. वह कह रहा था कि मैं आपकी वजह से जिंदा हूं, इसके लिए आप सभी का शुक्रिया..., लेकिन शनिवार को फर्जी पत्रकारों ने ही उसकी हत्या कर दी गई. तीनों हत्यारों ने कई दिन की रेकी के बाद वारदात को अंजाम दिया था.
यूपी के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले तीन शूटर्स ने इस वारदात को अंजाम दिया. पुलिस ने तीनों को मौके से दबोच लिया. इस पूरे हमले को बकायदा मीडिया और पुलिस के सामने अंजाम दिया गया. तीनों आरोपी मीडियाकर्मी बनकर घटनास्थल पर पहुंचे थे. वे सभी पल्सर बाइक पर सवार होकर आए थे.