उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में लगातार बारिश के बीच सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बाढ़ का संकट गहरा गया है. सरयू नदी खतरे के निशान से 47 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. नदी का पानी बढ़ने के साथ ही जिले की तीन तहसीलों के करीब 60 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. कई गांवों में पानी घरों के आसपास तक पहुंच चुका है, जबकि बड़ी संख्या में खेत जलमग्न हो गए हैं.
सरयू नदी के उफान का असर ग्रामीण इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है. मदरहा, बल्लीपुर, पर्वतपुर, सुबेदारपुरवा, कोटारी गौरिया, चौसीपुरवा और गायघाट समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है. कुछ इलाकों में हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों के लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है.
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है. खेतों में खड़ी फसल पानी में डूब गई है. लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच किसानों को फसल खराब होने के साथ-साथ नदी के कटान का भी डर सता रहा है. जिले में करीब आठ स्थानों पर सरयू नदी कटान कर रही है. इससे नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है.
राहत सामग्री के लिए उमड़े ग्रामीण
रामसनेहीघाट के गुनौली गांव में प्रशासन की टीम जब बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन लेकर पहुंची तो बड़ी संख्या में ग्रामीण राहत लेने के लिए पहुंच गए. बच्चों से लेकर बुजुर्गों और महिलाओं तक, हर कोई भोजन और राहत सामग्री का इंतजार करता नजर आया.
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की ओर से मदद पहुंचाई जा रही है, लेकिन पानी लगातार बढ़ने से मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. ग्रामीणों के मुताबिक घरों के आसपास पानी भर गया है और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना चुनौती बन गया है.
एक ग्रामीण ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी कई बार गांव का दौरा कर चुके हैं और राहत पहुंचाई जा रही है, लेकिन बाढ़ की वजह से घर-बार और खेती को भारी नुकसान हो रहा है.
जलस्तर बढ़ा तो और बिगड़ सकते हैं हालात
सरयू नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए भी चुनौती बना हुआ है. ग्रामीणों को आशंका है कि अगर नदी का पानी और बढ़ा तो बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है. फिलहाल प्रशासन की टीमें प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.
बाराबंकी में सरयू का पानी सिर्फ खेतों और रास्तों तक नहीं पहुंचा है, बल्कि इसने ग्रामीणों की जिंदगी की रफ्तार भी रोक दी है. अब लोगों की उम्मीदें राहत और सरयू के घटते जलस्तर पर टिकी हैं.