सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को ढाए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. दिल्ली से जमीयत उलेमा-ए-हिंद का एक प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचा. प्रतिनिधिमंडल ने मस्जिद मामले की पैरोकारी कर रहे पूर्व सांसद और सपा नेता हाजी फजलुर रहमान के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की.
इस दौरान मामले के तमाम पहलुओं और आगे की कानूनी रणनीति पर लंबी चर्चा हुई. मुलाकात के बाद पूर्व सांसद हाजी फजलुर रहमान ने बताया कि जमीयत के प्रतिनिधिमंडल ने उनके अलावा केस की पैरोकारी कर रहे एडवोकेट नौशाद अली से भी बात की है.
जमीयत ने इस पूरी लड़ाई में नैतिक समर्थन देने का भरोसा दिया है. हाजी फजलुर रहमान बताया कि वो ट्रिब्यूनल कोई इसीलिए नहीं गए क्योंकि वहां कोई जज ही मौजूद नहीं था.
हाजी फजलुर रहमान ने कहा, 'वकील साहब ने बताया कि ट्रिब्यूनल कोर्ट में काफी समय से कोई जज नहीं बैठा है. वहां जाने पर हमें तुरंत राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम थी. इसलिए जिला अदालत का रुख करना बेहतर समझा गया. लेकिन ये अंदाजा नहीं था कि जिला अदालत से ऐसा फैसला आएगा जिससे मस्जिद पक्ष को नुकसान उठाना पड़ेगा.'
'रात के अंधेरे में हुई कार्रवाई न्याय के खिलाफ': मौलाना हकीमुद्दीन कासमी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने सरकार की इस कार्रवाई पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा, हिमाचल और पंजाब के जिम्मेदार लोग भी हालात का जायजा लेने सहारनपुर पहुंचे हैं.
मौलाना कासमी ने कहा, 'ये सरासर ज्यादती और जुल्म है. रात के अंधेरे में फैसले लेकर मस्जिद को शहीद कर दिया गया और इंसाफ के दरवाजे बंद कर दिए गए. अगर कायदे से बातचीत होती और अदालत तक जाने का मौका दिया जाता, तो इंसाफ जरूर होता.'
रिपोर्ट के आधार पर तय होगी आगे की रणनीति
जमीयत के प्रतिनिधियों ने बताया कि वो शहर के जिम्मेदारों और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाकर अपनी रिपोर्ट दिल्ली मुख्यालय ले जाएंगे. वहां वरिष्ठ पदाधिकारियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ मशविरा किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर इस मामले को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा.