वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी यानी दीपक पटेल लोधी की संदिग्ध हालत में मौत का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है. मानवाधिकार आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक यानी ADG को निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
बता दें, आयोग ने दिल्ली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कृष्णा राजपूत की शिकायत के बाद यह कदम उठाया है. शिकायतकर्ता ने रसिक दुलारी के जीवन और गरिमा के साथ जीने के अधिकार का हवाला देते हुए घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य, मृतक के कमरे की परिस्थितियों और अन्य जरूरी सबूतों की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच करने की मांग की है.
रसिक दुलारी ने 25 सितंबर को वृंदावन के गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी थी. हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोट के निशान समेत शरीर पर 7 जगह चोटें पाई गईं, जिसने मामले को बेहद संदिग्ध बना दिया है.
रसिक दुलारी के परिवार ने आरोप लगाया है कि आश्रम में दीक्षा लेने के बाद से पिछले दो सालों से उन्हें अपने बेटे से मिलने या फोन पर बात नहीं करने दी गई. परिजनों का कहना है कि आश्रम के लोगों ने ही आनन-फानन में अंतिम संस्कार भी कर दिया. उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की गुहार लगाई है.
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आश्रम में शिष्यों के मोबाइल इस्तेमाल और बाहरी दुनिया से संपर्क पर किस तरह के प्रतिबंध थे. हाल ही में सामने आए सीसीटीवी फुटेज में रसिक दुलारी खून से लथपथ और बदहवास हालत में कमरे से बाहर आकर सीढ़ियों से छत की तरफ जाते दिखे थे.
पुलिस कमरे से मिले एक खून से सने ग्राइंडर और ड्रग्स/नशीले पदार्थ के किसी भी एंगल का पता लगाने के लिए खून के नमूनों की फॉरेंसिक और टॉक्सिकोलॉजी जांच करवा रही है. वहीं, प्रेमानंद महाराज के श्री राधा केलीकुंज ट्रस्ट ने बयान जारी कर पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने की बात कही है.