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चारों तरफ बाढ़, मचान भी डूबा... 80 फीट ऊपर अखंड ज्योति अब भी जल रही... मचान वाले बाबा की कहानी

प्रयागराज में गंगा और यमुना का पानी लगातार बढ़ रहा है. संगम से लेकर घाट, मेला क्षेत्र, मंदिर और आश्रम तक बाढ़ की चपेट में हैं. कई जगह रास्ते पानी में डूब चुके हैं. लेकिन इसी बाढ़ के बीच आस्था की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया है. झूसी पुल के नीचे बना मचान पानी में डूबा है, लेकिन खंभे पर अखंड ज्योति अब भी प्रज्वलित है.

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बाढ़ के बीच नाव से मचान तक पहुंचते हैं बाबा. (Photo: ITG)
बाढ़ के बीच नाव से मचान तक पहुंचते हैं बाबा. (Photo: ITG)

प्रयागराज इस समय बाढ़ की मार झेल रहा है. गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने संगम क्षेत्र के बड़े हिस्से को पानी में डुबो दिया है. घाटों से लेकर मेला क्षेत्र और आसपास बने कई आश्रमों तक पानी पहुंच चुका है. इसी बाढ़ के बीच झूंसी पुल के नीचे एक मचाननुमा आश्रम है. मचान का काफी हिस्सा डूब चुका है. आसपास का इलाका जलमग्न है और पंडाल को भी नुकसान पहुंचा है. लेकिन मचान के ऊपर करीब 80 फीट ऊंचे लोहे के खंभे पर शीशे से बने एक सुरक्षित मंच में रखी अखंड ज्योति अब भी जल रही है.

तेज बारिश, हवा और चारों तरफ पानी के बावजूद ज्योति का लगातार जलते रहना श्रद्धालुओं के बीच आस्था की तस्वीर बन गया है. संगम क्षेत्र में हर साल माघ मेला, अर्धकुंभ और महाकुंभ के दौरान हजारों साधु-संतों के शिविर और पंडाल लगते हैं. मेला खत्म होने के बाद ज्यादातर पंडाल हटा दिए जाते हैं. लेकिन झूंसी पुल के नीचे बना यह मचाननुमा आश्रम सालभर मौजूद रहता है.

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करीब 10 फीट ऊंचे चबूतरे पर बनी झोपड़ीनुमा संरचना के ऊपर लोहे का ऊंचा खंभा है. इसी खंभे के ऊपरी हिस्से में शीशे से सुरक्षित मंच बनाया गया है, जहां अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है. इस बार बाढ़ का पानी मचान के आसपास तक पहुंच गया है. पानी की तेज धार ने आसपास के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया और पंडाल को भी नुकसान पहुंचा, लेकिन अखंड ज्योति अब भी जल रही है.

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नाव से पहुंचते हैं 'मचान वाले बाबा'

इस अखंड ज्योति की सेवा पिछले करीब दो दशकों से रामदास महाराज कर रहे हैं. श्रद्धालु कहते हैं कि वे देवरहा बाबा के शिष्य हैं. श्रद्धालुओं के बीच उनकी पहचान 'मचान वाले बाबा' के नाम से है. बाढ़ के दिनों में जब मठ तक पहुंचने का रास्ता पानी में डूब जाता है, तब रामदास महाराज नाव के जरिए मचान तक पहुंचते हैं. वहां जाकर अखंड ज्योति की सेवा करते हैं और उसमें घी डालते हैं. यानी जिस जगह तक सामान्य दिनों में लोग आसानी से पहुंच जाते हैं, वहां बाढ़ के दौरान नाव के सहारे पहुंचना पड़ता है.

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अखंड ज्योति देसी घी से जलाई जाती है और इसे इस तरह स्थापित किया गया है कि कुछ दिनों तक वहां किसी के न पहुंच पाने की स्थिति में भी ज्योति लगातार जलती रह सके. रामदास महाराज के मुताबिक, यह ज्योति देश के कल्याण, धर्म की रक्षा और मानव कल्याण के लिए जलाई जाती है. उनका विश्वास है कि चाहे कैसी भी आपदा आए, अखंड ज्योति बुझनी नहीं चाहिए. बाढ़ के दौरान भी इसी विश्वास के साथ इसकी सेवा जारी रहती है.

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श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र

माघ मेले और दूसरे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यह मचान श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहता है. दूर-दूर से आने वाले लोग यहां पहुंचकर रामदास महाराज के दर्शन करते हैं और अखंड ज्योति के बारे में जानते हैं. रामदास महाराज कई-कई दिनों तक इसी मचान पर रहते हैं. ऊपर ही पूजा-पाठ, ध्यान और अखंड ज्योति की सेवा करते हैं. इस मचान की खासियत इसकी ऊंचाई और बनावट भी है. संगम क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए ऊंचाई पर स्थापित अखंड ज्योति आसपास के पानी के बावजूद सुरक्षित बनी हुई है.

prayagraj flood akhand jyoti continues to burn amid floodwaters near jhunsi

साल 2026 की बाढ़ में प्रयागराज का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा हुआ है. रास्ते बंद हैं, आसपास की जमीन पानी में समा गई है और मचान के निचले हिस्से को भी बाढ़ ने घेर लिया है, लेकिन पानी के बीच ऊंचे खंभे पर शीशे के भीतर जलती अखंड ज्योति दूर से ही दिखाई दे रही है. बाढ़ ने मचान को नुकसान पहुंचाया, रास्ते बंद कर दिए और आसपास का पूरा इलाका जलमग्न कर दिया. लेकिन करीब 80 फीट की ऊंचाई पर जल रही यह लौ अब भी कायम है. बाढ़ की भयावह तस्वीरों के बीच प्रयागराज की यह अखंड ज्योति लोगों के लिए आस्था और विश्वास की एक अलग तस्वीर बन गई है.

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