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'पिता मस्कट में, बेटा ओमान में... और आ गई मौत की खबर', 12वीं पास कर विदेश गए सूरज की हवाई हमले में जान गई, मां और दादी का रो-रोकर बुरा हाल

देवरिया जिले के करमाजीतपुर गांव के 23 साल के सूरज यादव की ओमान के पूर्वी तट पर एक जहाज पर हुए हवाई हमले में मौत हो गई. वे डेढ़ महीने पहले ही परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ओमान गए थे. सूरज अपने माता पिता की चार संतानों में सबसे बड़े थे और अविवाहित थे.

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    ओमान से आई सूरज की मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया है (Photo: ITG)
ओमान से आई सूरज की मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया है (Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के देवरिया के करमाजीतपुर गांव के रहने वाले 23 साल के सूरज यादव की ओमान में एक हवाई हमले में मौत हो गई है. यह हमला ओमान के पूर्वी तट पर एक जहाज पर हुआ. सूरज करीब डेढ़ महीने पहले ही परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के मकसद से फ्लाइट से ओमान गए थे. इस खबर के आते ही उनके घर और पूरे गांव में मातम छा गया है.

सूरज ओम प्रकाश यादव के चार बेटों में सबसे बड़े थे और अभी उनकी शादी नहीं हुई थी. गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमाजीतपुर गांव में उनका परिवार संयुक्त रूप से रहता है. बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद सूरज ने विदेश जाकर कमाने का फैसला लिया था, ताकि घर के हालात बेहतर हो सकें. करीब एक महीना दस दिन पहले ही वे ओमान पहुंचे थे. लेकिन हवाई हमले में उनकी जान चली गई, जिसकी खबर मिलते ही घर में चीख पुकार मच गई.

सूरज की मां पुष्पा देवी, दादी पाना देवी और दादा रमा यादव का बुरा हाल है और वे लगातार रो रहे हैं. उनके पिता ओम प्रकाश यादव खुद मस्कट में नौकरी करते हैं और घटना के समय वहीं मौजूद थे. बेटे की मौत की खबर सुनते ही वे भी घर के लिए रवाना हो गए हैं. घर में दादा, मां और सूरज के तीन छोटे भाइयों के साथ पूरा परिवार रहता है. भाई सनी यादव कक्षा दस में, समीर यादव कक्षा नौ में और सबसे छोटे भाई साहिल भी अभी स्कूल में ही पढ़ाई कर रहे हैं.

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गांव और आसपास के इलाकों से लोग परिवार को सांत्वना देने के लिए लगातार उनके घर पहुंच रहे हैं. घटना की सूचना मिलते ही गौरीबाजार पुलिस भी परिवार से बातचीत करने के लिए मौके पर पहुंची.



सूरज के चाचा अवधेश यादव ने बताया कि सूरज बेहतर जिंदगी और परिवार की माली हालत सुधारने के लिए ही विदेश गए थे. उन्होंने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि सूरज के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके घर भेजा जाए, ताकि परिवार अंतिम संस्कार कर सके. साथ ही परिवार ने सरकार से हर संभव मदद की मांग भी की है, ताकि इस मुश्किल घड़ी में उन्हें सहारा मिल सके.

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