scorecardresearch
 

अब मजदूरों के बच्चे बनेंगे IAS, IPS और डॉक्टर, जानें कैसे पूरा होगा उनका सपना

मुरादाबाद के अटल आवासीय विद्यालय में श्रमिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के 718 बच्चे मुफ्त शिक्षा, हॉस्टल, भोजन और दूसरी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं. गांव के स्कूलों से यहां पहुंचे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा है. कोई IAS, कोई IPS, कोई जज तो कोई आर्मी डॉक्टर बनना चाहता है. विद्यालय का लक्ष्य क्षमता बढ़ाकर 1,000 बच्चों तक पहुंचना है.

Advertisement
X
मुफ्त शिक्षा ने बदली मजदूरों के बच्चों की जिंदगी. (Photo: Jagat Gautam/ITG)
मुफ्त शिक्षा ने बदली मजदूरों के बच्चों की जिंदगी. (Photo: Jagat Gautam/ITG)

मुरादाबाद में मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिल रही है. जिन परिवारों के माता-पिता दिनभर मेहनत-मजदूरी करके घर चलाते हैं, उनके बच्चों के लिए कभी अच्छी शिक्षा और बेहतर सुविधाएं हासिल करना आसान नहीं था. लेकिन अब यही बच्चे IAS, IPS अधिकारी, जज और डॉक्टर बनने का सपना देख रहे हैं. मुरादाबाद का अटल आवासीय विद्यालय इन बच्चों को पढ़ाई के साथ ऐसा माहौल दे रहा है, जहां वे अपने भविष्य को लेकर बड़े लक्ष्य तय कर रहे हैं.

विद्यालय में इस समय 718 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. यहां विद्यार्थियों को शिक्षा, रहने और खाने समेत कई सुविधाएं मुफ्त मिलती हैं. आवासीय व्यवस्था होने के कारण बच्चे विद्यालय परिसर में ही रहते हैं. उन्हें पढ़ाई के साथ व्यक्तित्व विकास का भी अवसर मिलता है. विद्यालय में बच्चे अंग्रेजी अखबार भी अच्छी तरह पढ़ते नजर आते हैं. यह उनके शैक्षणिक माहौल और सीखने की दिशा में हो रहे प्रयासों को दिखाता है. स्मार्ट क्लास से हॉस्टल तक, बच्चों को मिल रहीं मुफ्त सुविधाएं

अटल आवासीय विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई के लिए स्मार्ट क्लासरूम बनाए गए हैं. रहने के लिए हॉस्टल, स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ और खेलकूद के लिए प्लेग्राउंड की सुविधा उपलब्ध है. बच्चों को मुफ्त किताबें और हॉस्टल में रहने के लिए जरूरी सामान भी दिया जाता है. रोजमर्रा के इस्तेमाल की आवश्यक वस्तुएं मिलने से बच्चों को अपनी जरूरतों के लिए परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की चिंता नहीं रहती. पढ़ाई, भोजन और रहने की सुविधाएं मुफ्त होने से श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण में आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है.

Advertisement

विद्यालय में सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए एयर कंडीशनिंग की व्यवस्था भी की जानी है. इसके साथ ही भविष्य में विद्यालय की क्षमता को बढ़ाकर कक्षा 12वीं तक करीब 1,000 विद्यार्थियों को पढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. इससे अधिक श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर मिल सकेंगे.

गांव के स्कूल से यहां पहुंचे राजेंद्र, अब IAS बनने का सपना

कक्षा आठवीं के छात्र राजेंद्र कुमार पहले गांव के माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते थे. उनके मुताबिक, वहां उन्हें उतनी अच्छी सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं. अटल आवासीय विद्यालय में आने के बाद उन्हें पढ़ाई और रहने-खाने का बेहतर माहौल मिला. अब वह अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं. राजेंद्र का लक्ष्य IAS अधिकारी बनना है. बेहतर सुविधाओं के बीच पढ़ाई करते हुए वह अपने इस सपने को पूरा करने की तैयारी कर रहे हैं.

कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा लक्षिता बेहद गरीब परिवार से आती हैं. उनके पिता श्रमिक हैं. लक्षिता बताती हैं कि विद्यालय में आने से पहले उन्होंने भविष्य को लेकर इतने बड़े सपने नहीं देखे थे. उन्हें यह चिंता रहती थी कि आगे क्या करेंगी और अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंचेंगी. लेकिन यहां पढ़ाई और सुविधाएं मिलने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है. अब उन्हें भरोसा है कि वह अपने सपने पूरे कर सकती हैं. लक्षिता आगे चलकर आर्मी डॉक्टर बनना चाहती हैं.

Advertisement

कक्षा दसवीं की छात्रा ऋतिका चौहान के पिता मजदूरी करते हैं. ऋतिका बताती हैं कि पहले उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वह इतने अच्छे विद्यालय में पढ़ सकेंगी और उन्हें इतनी सुविधाएं मिल पाएंगी. वह इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल को देती हैं. अब ऋतिका आगे चलकर शिक्षक बनना चाहती हैं. विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं ने उन्हें अपने भविष्य के लिए लक्ष्य तय करने का अवसर दिया है. प्राइवेट स्कूल की फीस बनी मुश्किल, उदय प्रताप ने चुनी ह्यूमैनिटीज

कक्षा ग्यारहवीं के छात्र उदय प्रताप के पिता श्रमिक हैं. उदय का कहना है कि निजी स्कूलों की फीस अधिक होने के कारण आम परिवारों के लिए वहां बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो जाता है. इसके मुकाबले अटल आवासीय विद्यालय में उन्हें बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिल रही हैं. उदय ने काफी जानकारी जुटाने के बाद ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम चुनी है. उनका लक्ष्य सिविल सर्विसेज में जाना और IAS अधिकारी बनना है. वह अपनी पढ़ाई के जरिए इस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं.

कक्षा दसवीं की छात्रा भुवनेश के पिता राजमिस्त्री हैं. भुवनेश बताती हैं कि पहले उन्हें अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंता रहती थी. वह सोचती थीं कि आगे पढ़ाई कैसे जारी रखेंगी और अपने सपने कैसे पूरे करेंगी. अटल आवासीय विद्यालय में बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा है. अब भुवनेश आगे चलकर जज बनना चाहती हैं. गांव के सरकारी स्कूल से अटल आवासीय विद्यालय तक पहुंचीं दिव्यांशी

Advertisement

कक्षा नौवीं की छात्रा दिव्यांशी पहले गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ती थीं. उनके पिता खेती-किसानी करते हैं. दिव्यांशी बताती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतने अच्छे विद्यालय में पढ़ने का मौका मिलेगा. यहां आने के बाद उन्हें पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल और सुविधाएं मिली हैं. अब उनका सपना IPS अधिकारी बनने का है.


प्रिंसिपल बोले, बच्चों को बेहतर अवसर देना है उद्देश्य

विद्यालय के प्रिंसिपल टी.पी. सिंह ने बताया कि यहां बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने पर ध्यान दिया जा रहा है. स्मार्ट क्लासरूम, हॉस्टल, भोजन, स्वच्छ पेयजल, खेलकूद, मुफ्त किताबें और रोजमर्रा के जरूरी सामान जैसी सुविधाओं के माध्यम से बच्चों की जरूरतों का ध्यान रखा जाता है. विद्यालय का उद्देश्य श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर देना और उन्हें अपने भविष्य के लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार करना है.


राजेंद्र, लक्षिता, ऋतिका, उदय प्रताप, भुवनेश और दिव्यांशी की कहानियां बताती हैं कि बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलने से बच्चों की सोच और उनके सपनों का दायरा बढ़ सकता है. कोई IAS बनना चाहता है, कोई IPS, कोई जज तो कोई आर्मी डॉक्टर या शिक्षक बनने की तैयारी कर रहा है. मुरादाबाद का अटल आवासीय विद्यालय इन बच्चों के लिए केवल पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद भी बन रहा है.
 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement