
जालौन जिले में आईएएस अधिकारी और उरई के एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उनका विवाद जिला बार एसोसिएशन के वकीलों के साथ खुलकर सामने आया है. बार एसोसिएशन ने एसडीएम (न्यायिक) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मंगलवार (5 अगस्त) से राजस्व अदालतों के बहिष्कार का ऐलान किया है. इसके चलते जिले की राजस्व अदालतों में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है. यदि बहिष्कार जारी रहता है तो जमीन, दाखिल-खारिज, सीमांकन, नामांतरण और अन्य राजस्व मामलों की सुनवाई प्रभावित होगी, जिससे सैकड़ों वादकारियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है.
तीन बार डीएम से की गई शिकायत
डिस्ट्रिक्ट जालौन बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ओमनारायण सिंह की ओर से जारी पत्र के मुताबिक, अधिवक्ता अब तक तीन बार जिलाधिकारी राकेश कुमार पांडेय से एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही की शिकायत कर चुके हैं. बार एसोसिएशन का आरोप है कि एसडीएम अदालत में अधिवक्ताओं और वादकारियों की अनुपस्थिति में एकपक्षीय आदेश पारित करने की बात कहते हैं. साथ ही वकीलों का आरोप है कि उनके साथ अदालत में अभद्र व्यवहार किया जाता है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जब तक कार्यशैली में बदलाव नहीं होता, तब तक राजस्व अदालतों का बहिष्कार जारी रहेगा.

रिंकू सिंह राही ने शेयर किया कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो
वकीलों के आरोपों के बीच एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही ने अपनी ओर से सफाई देते हुए अदालत की कार्यवाही का लगभग 2 घंटे 48 मिनट का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया. वीडियो में अदालत की सामान्य कार्यवाही होती दिखाई दे रही है. इसमें सुनवाई के दौरान किसी प्रकार का विवाद या तीखी बहस नजर नहीं आती. वीडियो साझा करने के पीछे उनका उद्देश्य अपनी कार्यशैली को पारदर्शी बताना माना जा रहा है.
रिंकू सिंह राही ने क्या कहा
पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने कहा कि वे पूरी तरह नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनका किसी भी अधिवक्ता या व्यक्ति से कोई निजी विवाद नहीं है. उन्होंने संकेत दिया कि उनकी प्राथमिकता कानून के अनुसार मामलों का निस्तारण करना है और वे उसी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं.
पहले भी विवादों में रहे हैं IAS रिंकू सिंह राही
जालौन में यह पहला मौका नहीं है जब रिंकू सिंह राही किसी विवाद को लेकर चर्चा में आए हों. उनकी तैनाती के बाद से कई घटनाएं सुर्खियों में रही हैं. रिंकू सिंह राही ने 5 मई को जालौन तहसील में एसडीएम (न्यायिक) के रूप में कार्यभार संभाला था. शुरुआती दिनों में ही उनकी कार्यशैली को लेकर शिक्षकों, लेखपालों, व्यापारियों और तहसील कर्मियों की ओर से सवाल उठाए गए थे. 23 जून को एक भाजपा ब्लॉक प्रमुख के कोल्ड स्टोरेज की जांच के दौरान उनके साथ कथित हाथापाई और थप्पड़ मारने के प्रयास का मामला भी चर्चा में रहा. इस प्रकरण की जांच एडीएम (वित्त एवं राजस्व) राजीव राज और एएसपी ईशांत सोनी को सौंपी गई थी. मामले की जांच प्रक्रिया अभी भी प्रशासनिक स्तर पर चल रही है.
'आधा काम, आधा वेतन' पत्र भी बना था चर्चा का विषय
इसके बाद जुलाई में उनका जारी किया गया 'आधा काम, आधा वेतन' संबंधी पत्र भी काफी चर्चा में रहा. इस पत्र को लेकर सरकारी कर्मचारियों और प्रशासनिक हलकों में व्यापक बहस हुई थी. 28 जुलाई को उरई नगरपालिका से जुड़ी जांच टीम से हटाए जाने के बाद एडीएम प्रेमचंद्र मौर्य और रिंकू सिंह राही के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी चर्चा का विषय बने थे. इन घटनाओं के कारण रिंकू सिंह राही लगातार सार्वजनिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं.
राजस्व अदालतों पर क्या पड़ेगा असर?
बार एसोसिएशन के बहिष्कार का सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ सकता है जिनके मामले राजस्व अदालतों में लंबित हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं नामांतरण (दाखिल-खारिज), सीमांकन विवाद, भूमि स्वामित्व संबंधी मामले, उत्तराधिकार संबंधी प्रकरण, राजस्व अपीलें और अन्य तहसीली विवाद. यदि अधिवक्ता अदालतों में उपस्थित नहीं होंगे तो बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई टल सकती है.
प्रशासन की नजर हालात पर
जिला प्रशासन फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. बार एसोसिएशन और प्रशासन के बीच गतिरोध खत्म कराने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत होगी या नहीं, लेकिन मंगलवार को राजस्व अदालतों की स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.