ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग ने 9 जिंदगियां छीन लीं.हादसे के बाद बस के संचालन से जुड़ी कई जानकारियां सामने आई हैं. एक तरफ यात्री सुनील कुमार की शिकायत पर दर्ज FIR में आग से पहले बदबू आने और बस समय पर नहीं रोकने के आरोप हैं, दूसरी तरफ बस पर पहले से कई चालानों का रिकॉर्ड सामने आया है.
अब जांच को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, कि बार-बार बस की सुरक्षा और नियमों को लेकर चेतावनी मिलने के बाद भी इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई. हादसे का शिकार हुई निजी बस राज कल्पना ट्रैवल्स की थी.इसका रजिस्ट्रेशन नंबर BR32 PA8647 बताया जा रहा है. यह बस बुधवार की रात दिल्ली से महोबा जा रही थी.यमुना एक्सप्रेसवे पर जीरो पॉइंट से करीब 32 किलोमीटर आगे जेवर थाना क्षेत्र में देर रात करीब 11:30 बजे आग लगी. इस हादसे में 9 यात्रियों की मौत हुई.
जानकारी के मुताबिक, बस का मालिक मध्य प्रदेश के छतरपुर का निवासी है. बस का रजिस्ट्रेशन बिहार के मधुबनी का है. गौर करने वाली बात यह है कि बस का फिटनेस प्रमाण पत्र राजस्थान राज्य से और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट हरियाणा से जारी किया गया था.

कौन थे ड्राइवर और कंडक्टर?
मामले में पुलिस ने दो ड्राइवर और एक कंडक्टर को हिरासत में लिया है. इनमें पवन कुमार (पुत्र विनोद कुमार, निवासी कनपटियापुर, बर्रा, थाना रसूलाबाद, कानपुर देहात) और योगेश दीक्षित (पुत्र श्रीकांत दीक्षित, निवासी सिकंदरा, कानपुर देहात) ड्राइवर हैं, जबकि रोहित (पुत्र राजकुमार, निवासी अकबरपुर, थाना अकबरपुर, कानपुर देहात) कंडक्टर है. फिलहाल इन तीनों की भूमिका और हादसे के वक्त बस कौन चला रहा था, इसकी जांच की जा रही है.
यात्रियों ने पहले ही दी थी चेतावनी
बस में सवार सुनील कुमार की शिकायत पर FIR दर्ज हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील ने बताया कि हादसे के वक्त कुछ यात्री सो रहे थे और कुछ जाग रहे थे. करीब 11:30 बजे बस के ड्राइवर कैबिन की ओर से जलने जैसी बदबू आने लगी. यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर से बस रोकने को कहा, लेकिन बस तुरंत नहीं रोकी गई. बाद में धुआं बढ़ने और आग फैलने के बाद बस रोकी गई. FIR में ड्राइवर और कंडक्टर के कैबिन में बीड़ी-सिगरेट पीने का भी आरोप है.
‘समय पर साइड में लगती तो लोग निकल जाते’
सुनील के मुताबिक, आग फैलने के बाद यात्रियों के पास बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं बचा. उन्होंने दावा किया कि अगर बस समय रहते सड़क किनारे लगा दी जाती तो कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका मिल सकता था. बस के अंदर से लोगों की चीखने और चिल्लाने की आवाजें आती रहीं. यात्रियों ने आग बुझाने वाले सिलेंडर से आग रोकने की कोशिश की, लेकिन आग नहीं बुझी. इसके बाद खिड़की के शीशे तोड़कर अंदर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश की गई. तमाम कोशिशों के बावजूद 9 लोग बाहर नहीं निकल सके.
बस पर पहले से थे कई चालान
हादसे के बाद सामने आए बस से जुड़े रिकॉर्ड ने मामले को और गंभीर बना दिया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान थे. इनमें ड्राइवर, परमिट, रफ्तार और रेट्रोफिटिंग जैसे नियमों से जुड़े उल्लंघन शामिल हैं.
सामने आए चालान:
7 अप्रैल: ₹6,900 का एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार के साथ ड्राइविंग लाइसेंस और यूनिफॉर्म पर चालान
19 अगस्त: ₹15,000 का बिना परमिट के चलने का चालान
21 जुलाई: ₹10,000
15 जून: ₹4,000 का चालान.
14 मई: ₹10,500
6 मई: ₹500
1 मार्च: ₹5,000
21 फरवरी: ₹500
19 जनवरी: ₹12,000
इसके अलावा जनवरी 2026 में चिल्ला के पास कम उम्र के ड्राइवर से बस चलवाने को लेकर भी चालान की खबर सामने आई है.
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रेट्रोफिटिंग और परमिट पर भी सवाल
जून 2025 में फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग नियमों से जुड़ा चालान भी सामने आया है. बस के परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन की जानकारी भी जांच में सामने आई है. यानी रिकॉर्ड में सिर्फ रफ्तार या सामान्य ट्रैफिक नियमों का मामला नहीं है. चालक से लेकर परमिट और बस में किए गए बदलावों तक अलग-अलग बिंदुओं पर सवाल उठे हैं.
RC में काला रंग, मौके पर पीला-सफेद
हादसे के बाद बस का रंग भी सवालों के घेरे में है. जानकारी के मुताबिक बस की RC में रंग काला दर्ज था, जबकि घटना के वक्त बस पीले-सफेद रंग में नजर आई. यह बदलाव किस वजह से था और इसके लिए नियमों का पालन किया गया था या नहीं, यह भी जांच का विषय है.
अब हादसे के बाद इन खुलासों से तमाम सवाल उठ रहे हैं. बार-बार नियमों के उल्लंघन सामने आने के बाद बस के संचालन को लेकर क्या कार्रवाई हुई? क्या बस की तकनीकी हालत ठीक थी? और पुराने चालानों के बावजूद बस सड़क पर कैसे चलती रही?