दस साल पुराने पुलिस पर फायरिंग और रंगदारी मांगने के एक मामले में अदालत ने गैंगस्टर रुस्तम को बरी कर दिया है. सत्र न्यायालय प्रशांत बेलगैया की अदालत ने पुलिस की सुस्त जांच, त्रुटिपूर्ण चार्जशीट और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के आधार पर ये फैसला सुनाया है.
दरअसल 8 अगस्त 2016 को सरोजिनी नगर के निवासी और व्यापारी शशि प्रकाश ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि गैंगस्टर रुस्तम उनसे 10 लाख रुपये की रंगदारी मांग रहा है.
आरोप के मुताबिक, 8 अगस्त को रुस्तम रंगदारी के रुपये लेने आशियाना के मजार रोड पहुंचा था. वहां जब पुलिस ने उसे घेरने की कोशिश की, तो रुस्तम ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी.
अदालत में खुली पुलिस की ढचर-पचर जांच की पोल
सुनवाई के दौरान अदालत में पुलिस की जांच-पड़चाल की परतें खुल गईं. कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष के पास घटना से जुड़े बुनियादी सवालों के जवाब भी नहीं थे. ऐसे में कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर तल्ख टिप्पणी करते हुए सबूतों को अविश्वसनीय करार दिया.
अदालत ने अपने आदेश में पुलिस की लापरवाही पर कई सवाल उठाए. कोर्ट ने कहा कि घटना के वक्त मौके पर कितनी पुलिस फोर्स मौजूद थी, पुलिस को इसका पता नहीं था. आरोपी के साथ फायरिंग में कुल कितने लोग शामिल थे, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई. इसके साथ ही, मौके पर कितनी गोलियां चलाई गईं और वहां से कितने खोखे बरामद हुए, इसका कोई सही ब्योरा पेश नहीं किया गया.
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए सबूत बिल्कुल भी भरोसे के काबिल नहीं हैं. कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले की विवेचना में बहुत गलतियां हैं, अधूरी और सतही स्तर पर की गई है. ऐसे कमजोर और विरोधाभासी सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इसके बाद अदालत ने रुस्तम को सभी आरोपों से बरी कर दिया.
यह भी पढ़ें: 25 साल पुराने घोटाले में बड़ा फैसला, दतिया के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को भेजा गया तिहाड़ जेल
तिहाड़ जेल में बंद है रुस्तम
हालांकि, इस मामले में बरी होने के बावजूद गैंगस्टर रुस्तम जेल से बाहर नहीं आ सकेगा. फिलहाल रुस्तम अपने दो भाइयों, सलीम और सोहराब के साथ दूसरे गंभीर आपराधिक मामलों में दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है.