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बेल्जियम To लखीमपुर: चलता-फिरता मोहल्ला है 260 पहियों वाला ये ट्रक! साथ चल रहे 60 से ज्यादा कर्मचारी; सफर के दिलचस्प किस्से

बेल्जियम से आया 164 टन का वेसल 260 पहियों वाले 'महाबली' ट्रक से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से लखीमपुर खीरी ले जाया जा रहा है. रास्ते में आ रही रुकावटों को हटाने के लिए प्रशासन, पुलिस और NHAI की टीमें जुटी हैं. 62 से अधिक कर्मचारियों के काफिले के साथ चल रहा यह ट्रक रोजाना 10-12 किमी की दूरी तय कर पा रहा है.

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विशालकाय ट्रक के साथ दर्जनों कर्मचारी भी चल रहे (Photo: ITG)
विशालकाय ट्रक के साथ दर्जनों कर्मचारी भी चल रहे (Photo: ITG)

यूपी में इन दिनों एक 'महाबली' ट्रक सोशल मीडिया पर काफी वायरल है. ये ट्रक ओडिशा से चलकर लखीमपुर जा रहा है. इस पर बेल्जियम का 164 टन वजनी वेसल (वैक्यूम बॉयलर) लदा है. वेसल पहले समुद्री मार्ग से ओडिशा के पारादीप तट पर आया, वहां से 308 पहियों वाले ट्रक में लादकर इसे लखीमपुर के कुंभी चीनी मिल ले जाया जा रहा है. झारखंड, बिहार, के रास्ते ये प्रदेश में दाखिल हुआ. अभी ट्रक वाराणसी पहुंचा है. करीब दो हफ्ते बाद अपने गंतव्य पहुंचेगा. लेकिन इस दौरान ट्रक जिस रास्ते गुजर रहा है वहां का नक्शा ही बदल जा रहा है. कहीं फुट ओवर ब्रिज को खोलना पड़ा तो कहीं बड़े-बड़े होर्डिंग्स और पेड़ों को हटाना पड़ रहा है. इसे देखने वालों की भीड़ भी उमड़ रही है. आइए जानते हैं इस ट्रक के सफर और इससे जुड़े लोगों के किस्से... 

आपको बता दें कि इस भारी-भरकम मशीन को यूरोप से भारत लाने की जिम्मेदारी निभा रही कंपनी का नाम जे.एम बक्शी हैवी कंपनी है. बताया जा रहा है कि यह भारत की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक कंपनियों में एक है और इसी कंपनी के कर्मचारी ही इस मशीन को लेकर चल रहे हैं. ओडिशा से मशीन को लेकर निकले 'महाबली' ट्रक को अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए तकरीबन 62 से ज्यादा कर्मचारियों की टीम साथ चल रही है. पूरा काफिला किसी चलते-फिरते मोहल्ले की तरह है जहां दर्जनों लोग एकसाथ खा-पी रहे और सो रहे हैं. 

खास बात ये है कि इस मल्टी एक्सल ट्रक को खींचने के लिए तीन एक्स्ट्रा इंजन भी साथ-साथ चल रहे हैं. समतल इलाकों में तो एक ही इंजन इसे खींच रहा है लेकिन अगर ऊंचाई पर चढ़ता है तो एक से अधिक इंजन का भी सहारा लिया जा रहा है. मशीन को बेल्जियम से उत्तर प्रदेश तक लाने में अब तक कुल 6 महीने का वक्त लग चुका है जिसमें तकरीबन 4 महीने का वक्त तो ओडिशा के बंदरगाह से यहां तक पहुंचने में ही लग गया. 

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करीब 100 फीट लंबे और 7 मीटर चौड़े इस विशालकाय ट्रक के रास्ते में आ रही रुकावटों को हटाने के लिए जिला प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस, बिजली विभाग और NHAI की टीमें लगातार जुटी हुई हैं. काफिले में 60 से अधिक इंजीनियर व कर्मचारी शामिल हैं, जिनके साथ दो अतिरिक्त ट्रेलर और दो क्रेन भी चल रहे हैं. 

यह भी पढ़ें: 308 पहियों वाले ट्रक को लखीमपुर पहुंचने में और कितने दिन लगेंगे? ऊपर लदी है बेल्जियम की भारी-भरकम बायो पॉलीमर मशीन

संकरी सड़कों को चौड़ा करने, निर्माण कार्य तोड़ने, बिजली के तार, खंभे और साइनेज हटाने का काम जारी है. वाराणसी में डाफी टोल प्लाजा के पास सड़क चौड़ी की गई और तीन फुट ओवरब्रिज को अस्थायी रूप से हटाने की प्रक्रिया चल रही है. इससे पहले बिहार के कैमूर में भी रास्ता बनाने के लिए पुल का कुछ हिस्सा तोड़ना पड़ा था. 

रुकावटों के कारण ट्रेलर रोजाना केवल 10 से 12 किलोमीटर ही तय कर पा रहा है, जबकि साफ रास्ता मिलने पर यह 20 किलोमीटर चलता है. ट्रक पर ही 30 लोगों के खाने-पीने और रहने का पूरा इंतजाम साथ चल रहा है. रात में जहां ये लंबा-चौड़ा काफिला रुकता है, वहीं तिरपाल से बनाए गए अस्थायी ठिकानों में कर्मचारी सोते हैं.  

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जब यह ट्रक ओडिशा से उत्तर प्रदेश के लिए चला तो इसकी लंबाई ज्यादा थी और इसमें कुल 308 पहिये थे. बाद में जरूरत और सुविधा के हिसाब से ट्रेलर के कुछ हिस्से को हटा दिया गया. वर्तमान समय में कुल 260 पहिये के ट्रक पर इस मशीन को लखीमपुर के लिए ले जाया जा रहा है. सीनियर लेवल के अधिकारियों को अगर छोड़ दिया जाए तो इस टीम के साथ चल रहे कंपनी के अधिकांश कर्मचारियों का पिछले कई महीनो से अस्थाई घर यह विशालकाय ट्रक ही बना हुआ है.

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