दिल्ली और देहरादून के बीच सफर को तेज और आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अप्रैल 2026 को उद्घाटन किए गए इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के करीब ढाई महीने बाद ही कई जगहों पर सड़क धंसने, गड्ढे बनने और दरारें आने की तस्वीरें सामने आई हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बाद जब इसका जायजा लिया तो कई स्थानों पर सड़क की सतह क्षतिग्रस्त मिली.
210 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे, 73 किलोमीटर हिस्सा सहारनपुर में
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 210 किलोमीटर है. इसका लगभग 73 किलोमीटर हिस्सा सहारनपुर जिले से होकर गुजरता है. इसी हिस्से में बिंदल नदी और जंगल के बीच करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन बनाया गया है, जिस पर सबसे अधिक लागत खर्च हुई है. एक्सप्रेसवे बनने के बाद दिल्ली से देहरादून का सफर पांच से छह घंटे के बजाय करीब ढाई घंटे में पूरा होने लगा है. इस मार्ग पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ रहे हैं.
ग्राउंड रिपोर्ट में कई जगह दिखी खराब सड़क
सहारनपुर में गागलहेड़ी से गणेशपुर तक किए गए निरीक्षण में एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों पर सड़क क्षतिग्रस्त दिखाई दी. कहीं सड़क पर बड़े गड्ढे बने हुए थे तो कहीं गड्ढों के भीतर सरिया तक दिखाई दे रही थी. कई स्थानों पर सड़क में आई दरारों को रोकने के लिए पिन लगाए गए थे. इन हिस्सों पर नई तारकोल की परत बिछाकर मरम्मत का काम भी चलता मिला.
ओवरब्रिज पर भी दिखी खराबी
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कुछ ओवरब्रिज पर ड्रेनेज सिस्टम के हिस्से भी क्षतिग्रस्त नजर आए. कुछ जगहों पर एक्सप्रेसवे के भीतर से पानी निकलता दिखाई दिया, जबकि उसी हिस्से के ऊपर से लगातार वाहन गुजर रहे थे। कई स्थानों पर मेंटेनेंस का काम जारी मिला. इससे सड़क की गुणवत्ता और निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
ढाई महीने में मरम्मत की जरूरत क्यों
सबसे बड़ा सवाल यह है कि उद्घाटन के महज ढाई महीने बाद ही एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मरम्मत की जरूरत क्यों पड़ गई. विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार वाले एक्सप्रेसवे पर सड़क की गुणवत्ता सबसे महत्वपूर्ण होती है. यदि समय रहते ऐसी खामियों को दूर नहीं किया गया तो भविष्य में यह हादसों की वजह बन सकती हैं.
पहले भी सामने आ चुके हैं नुकसान के मामले
इस एक्सप्रेसवे पर पहले से ही ओवरस्पीड के कारण कई सड़क हादसे हो चुके हैं. वहीं हाल ही में शामली क्षेत्र में बारिश के बाद सड़क पर बने बड़े गड्ढों से कई वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं भी सामने आई थीं. हालांकि इन घटनाओं में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन सड़क की स्थिति को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है.
12 हजार करोड़ से अधिक की परियोजना पर उठे सवाल
करीब 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का उद्देश्य दिल्ली और देहरादून के बीच बेहतर कनेक्टिविटी देना था. यात्रा का समय भी काफी कम हुआ है और लोगों को इसका लाभ मिल रहा है. लेकिन उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सामने आई सड़क की खराब स्थिति और लगातार चल रहे मरम्मत कार्य ने परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
एनएचएआई ने कहा, मरम्मत के लिए भेजी गई टीम
एनएचएआई के अधिकारी विशाल ने फोन पर बताया कि जहां सड़क टूटने और लोहे का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिली है, वहां मरम्मत के लिए टीम भेज दी गई है. उनका कहना है कि क्षतिग्रस्त हिस्सों की जल्द मरम्मत कर दी जाएगी. फिलहाल सहारनपुर क्षेत्र में एक्सप्रेसवे की मौजूदा स्थिति यही संकेत देती है कि बेहतर सुविधा के साथ-साथ गुणवत्ता और सुरक्षा की लगातार निगरानी भी उतनी ही जरूरी है. उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद सामने आई ये तस्वीरें अब कई अहम सवाल खड़े कर रही हैं.