उत्तर प्रदेश की धरती का भागवत कथा से सदियों पुराना नाता रहा है. रायबरेली में एक धार्मिक आयोजन के दौरान CM योगी ने इसी गौरवशाली इतिहास का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि करीब 5 हजार साल पहले इस राज्य को भागवत भूमि कहा जाता था. इसी धरती के शुकतीर्थ में शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को पहली भागवत कथा सुनाई थी.
इस दौरान CM योगी ने कहा कि भारत की एकता सिर्फ नक्शे पर खिंची राजनीतिक सीमाओं तक सीमित नहीं है. देश की सांस्कृतिक एकता आस्था की मजबूत कड़ियों से जुड़ी है. हिमालय से लेकर दक्षिण के रामेश्वरम तक मौजूद ज्योतिर्लिंग इस एकता को दिखाते हैं. तमिलनाडु के श्रद्धालुओं में महादेव के प्रति जो श्रद्धा है, वही भाव उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वोत्तर से लेकर महाराष्ट्र तक के लोगों में भी दिखाई देता है.
अवध में हनुमान जी की भक्ति की महिमा
अवध क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रामायण में प्रभु की अनन्य भक्ति पाकर हनुमान जी संसार में पूज्य बन गए. आज हर सनातनी उनकी पूजा करके खुद को धन्य मानता है. इसी तरह शिव सनातन की सबसे बड़ी पूंजी हैं. वे लोकमंगल के देवता हैं, जिन्होंने लोककल्याण के लिए विष तक धारण कर लिया. वे समाज के विकारों और नकारात्मक शक्तियों को खत्म करने का रास्ता दिखाते हैं.
इतिहास का हवाला देते हुए CM योगी ने कहा कि मध्यकाल में राजनीतिक कमजोरियों के चलते देश को विदेशी आक्रांताओं का सामना करना पड़ा. हमलावरों ने धर्मस्थलों और आस्था को चोट पहुंचाई, लेकिन उस कठिन दौर में भी व्यासपीठ से गूंजती पावन कथाओं ने सांस्कृतिक एकता को टूटने नहीं दिया.
नैमिषारण्य के 88 हजार ऋषियों की देन
CM योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ज्ञान की भी तपोभूमि रहा है. नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों ने तप कर ज्ञान की धारा को पुराणों में सुरक्षित किया, जो आज भी हमारे काम आ रही है. उन्होंने साफ कहा कि जब तक इस धरती पर ऐसी पावन कथाएं चलती रहेंगी, सनातन की पताका कभी झुकने नहीं पाएगी. और जब तक यह ध्वज ऊंचा रहेगा, तब तक भारत का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता.