वेस्ट एशिया में BRICS देशों की ओर से शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद, जियो-पॉलिटिकल टेंशन तेजी से बढ़ रही है. हाल ही में होर्मुज में एक जहाज पर हमला किया गया है. वहीं दूसरी ओर, बॉब अल-मंदेब पर हूति विद्रोहियों का कब्जा हो गया है. जबकि सऊदी अरब ने तेल पाइपलाइन को भी बंद कर दिया है. ऐसे में तेल को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा होता हुआ दिखाई दे रहा है. खासकर शेयर बाजार के लिए सोमवार को दिन काफी दिक्कत भरा हो सकता है. तेल की कीमतें ऊपर जाने से शेयर बाजार में गिरावट हावी हो सकती है.
इस बीच, शिन्हुआ न्यूज के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि ईरान और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए नए प्रवेश और निकास मार्गों के विवरण पर सहमत हो गए हैं और सोमवार को मस्कट में होने वाली एक क्षेत्रीय बैठक में खाड़ी देशों को अपने परामर्श के बारे में बताएंगे.
सीबीएस ने यमनी सरकार के एक सैन्य अधिकारी के हवाले से बताया कि लाल सागर के महत्वपूर्ण बंदरगाह मोखा और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रणनीतिक जहाजरानी मार्ग में स्थित अंतिम दो द्वीपों पर कब्जा करने के बाद , यमन के हूतियों ने पड़ोसी सऊदी अरब पर हमले जारी रखे.
होमुर्ज का विकल्प वाला रास्ता भी बंद
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों की ओर से बाब अल-मंदेब पर अपनी पकड़ मजबूत करना उस समय हुआ है, जब वे सऊदी अरब को तेल निर्यात करने वाले जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जो होर्मुज के विकल्प के तौर पर बाब अल-मंदेब से होकर गुजर रहे थे. ऐसे में सऊदी अरब या गल्फ से आने वाले तेल से भरे जहाजों का रास्ता बंद होते हुए दिख रहा है.
बाब अल-मंदेब से दुनिया का 5 से 12 फीसदी तक का तेल गैस आता था, जो होर्मुज के बंद होने के बाद काफी बढ़ गया था. वहीं पहले से ही होर्मुज पर तनाव बढ़ने से ग्लोबल 20 फीसदी तेल सप्लाई प्रभावित हुई है. इसके अलावा, सऊदी पाइपलाइन से भी 4 से 5 फीसदी तेल आयात होता था, जो अब बंद है. कुल मिलाकर गल्फ देशों से तेल-गैस आयात का रास्ता पूरी तरह से बंद होता हुआ दिख रहा है.
120 डॉलर प्रति बैरल हो जाएंगी तेल की कीमतें?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ये लंबे समय तक बाधित रहता है तो तेल-गैस की कीमतें काफी ऊपर जा सकती हैं. इसका मतलब है कि ग्लोबल स्तर पर महंगाई तेजी से बढ़ेगी, जिसका असर भारत में भी होगा. क्योंकि भारत अपने जरूरत का 80 फीसदी एनर्जी विदेश से मंगाता है. गोल्डमैन सैक्स ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर ऐसी स्थिति बनी रहती है तो तेल की कीमतें 120 डॉलर के पार पहुंच सकती हैं.
BRICS देश क्या कह रहे हैं?
शनिवार को नई दिल्ली में जारी घोषणा पत्र में ब्रिक्स देशों ने वेस्ट एशिया में तनाव के लगातार बढ़ने पर गहरी चिंता जताई है. अधिकतम संयम बरतने के साथ-साथ ऐसी कार्रवाइयों से बचने को कहा है, जो स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं.
BRICS ने लॉन्गटर्म समझ के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्तों को अपनाने के लिए कहा है, जो क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देगा और लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार वैश्विक व्यापार, आपूर्ति और ऊर्जा के प्रवाह को बनाए रखेगा.