सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार में फर्जी वीडियो और डीपफेक के इस्तेमाल को लेकर निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने राजनीतिक दलों को साफ निर्देश दिया है कि ऐसी किसी सामग्री की जानकारी मिलते ही उसे 3 घंटे के भीतर हटा दिया जाए. साथ ही दलों को सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की हिदायत दी गई है.
तकनीक की मदद से किसी नेता की तस्वीर या आवाज में बदलाव करके ऐसा वीडियो बनाया जा सकता है, जो देखने में असली लगे. आयोग ने ऐसे डीपफेक के साथ गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने से भी बचने को कहा है. उसका कहना है कि इस तरह की सामग्री चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है.
यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक कथित डीपफेक वीडियो से जुड़ी शिकायत के बाद सामने आया है. वकील रीना एन सिंह ने आयोग से इस वीडियो के सार्वजनिक प्रदर्शन और प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी. शिकायत में कहा गया कि राजनीतिक आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी नेता का ऐसा AI वीडियो बनाना गलत है, जिसमें वह ऐसा काम करता दिखे जो असल में हुआ ही नहीं.
शिकायत में वीडियो कहां से आया, इसे किसने बनाया और इसे कैसे फैलाया गया, इसकी जांच की मांग भी की गई है. साथ ही डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने, संबंधित पक्ष से जवाब लेने तथा पहली नजर में नियमों का उल्लंघन मिलने पर नोटिस जारी करने की मांग की गई है.
नियम तोड़े तो हो सकती है कार्रवाई
निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों को मौजूदा कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी है. इसमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, आईटी नियम 2021, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान और आदर्श आचार संहिता शामिल हैं.
आयोग ने कहा है कि डीपफेक ऑडियो या वीडियो बनाने, प्रकाशित करने या फैलाने से बचना होगा. गलत, झूठी या भ्रामक जानकारी पोस्ट करने पर भी रोक है. फर्जी यूजर अकाउंट या गैरकानूनी जानकारी मिलने पर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इसकी शिकायत करने को कहा गया है.
आयोग के निर्देश के मुताबिक, किसी फर्जी या डीपफेक सामग्री की जानकारी मिलने के बाद उसे 3 घंटे के भीतर हटाना होगा. लगातार बनी रहने वाली समस्या को आईटी नियम, 2021 के तहत शिकायत अपील समिति के सामने भी रखा जा सकता है.
प्रचार में इन चीजों से भी बचना होगा
आयोग ने चुनाव प्रचार के दौरान अपमानजनक सामग्री पोस्ट नहीं करने को कहा है. बच्चों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में करने से भी बचने का निर्देश दिया गया है. जानवरों के साथ हिंसा या उन्हें नुकसान पहुंचाने वाला कंटेंट दिखाने से भी राजनीतिक दलों को मना किया गया है.
आयोग ने कहना है कि सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार करते समय सभी राजनीतिक दलों को मौजूदा नियमों का पालन करना होगा. इसका मकसद चुनाव प्रचार में सभी पक्षों के लिए बराबर मौका बनाए रखना है.