मेरठ का सौरभ राजपूत हत्याकांड देशभर में चर्चा का विषय बना था. एक पति की हत्या, शव के टुकड़े करना और उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा देना. इस खौफनाक वारदात ने लोगों को झकझोर दिया था. जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, तो घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, आरोपियों से पूछताछ और उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारियों के आधार पर एक-एक कड़ी जोड़ी गई. इस चर्चित मामले की जांच के दौरान मेरठ पुलिस के दो युवा आईपीएस अधिकारियों की भूमिका भी अहम रही. तत्कालीन एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह और तत्कालीन एएसपी अंतरिक्ष जैन ने जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखा. दोनों अधिकारियों ने अलग-अलग स्तर पर मामले की जानकारी साझा की. आइए जानते हैं इन दोनों अधिकारियों की पढ़ाई, करियर और सौरभ राजपूत हत्याकांड में उनकी भूमिका के बारे में.
आयुष विक्रम सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उनका जन्म 29 अक्टूबर 1992 को हुआ था. वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम एबी सिंह है. आयुष विक्रम सिंह ने केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. इसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और एलएलबी की डिग्री हासिल की. तकनीकी शिक्षा और कानून की पढ़ाई के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई.
दिसंबर 2023 में उन्हें मेरठ में एसपी सिटी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. सौरभ राजपूत हत्याकांड सामने आने के समय वह इसी पद पर तैनात थे. मामले की जांच के दौरान उन्होंने मीडिया के सामने जांच से जुड़े अहम तथ्य रखे. आरोपियों से पूछताछ में सामने आई जानकारियों को भी सार्वजनिक किया गया. इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती हत्या की परिस्थितियों, शव को छिपाने के तरीके और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़ी कड़ियों को जोड़ना था. जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को मीडिया के साथ साझा करने में आयुष विक्रम सिंह की अहम भूमिका रही. अप्रैल 2026 में उनका तबादला बहराइच कर दिया गया. वहां उन्हें अपर पुलिस अधीक्षक यानी एएसपी सिटी की जिम्मेदारी सौंपी गई. वर्तमान में वह बहराइच में तैनात हैं.
अंतरिक्ष जैन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े अहम तथ्य बताए
सौरभ राजपूत हत्याकांड की जांच में दूसरे युवा आईपीएस अधिकारी अंतरिक्ष जैन भी चर्चा में आए. वह उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उनका जन्म 3 सितंबर 1998 को हुआ था. वह पंजाब के एसएएस नगर यानी मोहाली के रहने वाले हैं. उनके पिता का नाम शांत कुमार जैन है. अंतरिक्ष जैन ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया है. इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा दी. उन्होंने पहले ही प्रयास में परीक्षा पास की और 130वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की.
मेरठ में तैनाती के दौरान अंतरिक्ष जैन ने एएसपी के रूप में काम किया. उन्होंने कोतवाली क्षेत्र से जुड़े पुलिस कार्यों की जिम्मेदारी भी संभाली. सौरभ राजपूत हत्याकांड में उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक की थी. उन्होंने बताया था कि शव पर चाकू से वार के निशान मिले थे. इसके अलावा गर्दन और कलाई अलग किए जाने के निशान भी सामने आए थे. पोस्टमार्टम से जुड़े इन तथ्यों ने मामले की गंभीरता को समझने में मदद की. अप्रैल 2026 में अंतरिक्ष जैन का तबादला बुलंदशहर कर दिया गया. उन्हें अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण की जिम्मेदारी सौंपी गई. वर्तमान में वह बुलंदशहर में तैनात हैं.
सौरभ राजपूत मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में रहते थे. वह विदेश में काम करते थे और 24 फरवरी 2025 को मेरठ लौटे थे. पुलिस के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को उनकी हत्या कर दी गई थी. इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला पर हत्या का आरोप लगा. पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया. 18 मार्च 2025 को यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी. नीले ड्रम में शव मिलने की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा. पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और आरोपियों से पूछताछ की. जांच के दौरान हत्या में इस्तेमाल हथियार और अन्य सबूतों को भी शामिल किया गया. पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों और यात्रा से जुड़ी जानकारियों की भी पड़ताल की. जांच में सामने आया कि हत्या के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए थे. उनकी यात्रा और वहां की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी जांच का हिस्सा बनी.
पुलिस की शुरुआती जांच में मुस्कान और साहिल के बीच संबंधों को हत्या की प्रमुख वजह माना गया. पुलिस ने कहा था कि वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि इसे योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया. जांच के दौरान चाकू, ड्रम, सीमेंट और दवाइयों की खरीद से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की गई. पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारियों को घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखा. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में दोनों की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई. मामले को लेकर तंत्र-मंत्र से जुड़े कयास भी सामने आए थे. हालांकि, पुलिस ने कहा था कि जांच में ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं मिला, जिससे हत्या को तंत्र क्रिया से जोड़कर देखा जा सके.
करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट, अदालत ने सुनाया मृत्युदंड
जांच आगे बढ़ने के बाद मेरठ पुलिस ने मई 2025 में मामले में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य शामिल किए गए. आरोपियों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने से संबंधित आरोप लगाए गए. 30 सितंबर 2026 को मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया. इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई. इस तरह नीले ड्रम में शव मिलने से शुरू हुआ यह मामला जांच, साक्ष्य जुटाने, चार्जशीट और सुनवाई के बाद दोषसिद्धि तक पहुंचा. इस मामले में पुलिस की जांच और अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों की अहम भूमिका रही.
सौरभ राजपूत हत्याकांड में आयुष विक्रम सिंह और अंतरिक्ष जैन की भूमिका जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को सार्वजनिक करने के संदर्भ में रही. आयुष विक्रम सिंह ने एसपी सिटी रहते हुए मामले की जांच से संबंधित प्रमुख तथ्य मीडिया के सामने रखे. वहीं, अंतरिक्ष जैन ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और शव की स्थिति से जुड़े अहम तथ्य साझा किए. दोनों अधिकारियों की जिम्मेदारियां अलग-अलग थीं, लेकिन मामले की जानकारी सामने लाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही. नीले ड्रम में शव मिलने की घटना से लेकर आरोपियों को दोषी ठहराए जाने और मृत्युदंड सुनाए जाने तक यह मामला लगातार चर्चा में बना रहा.