उत्तर प्रदेश के बांदा में 68 वर्षीय एक बुजुर्ग किसान को सरकारी कागजों में मृत दिखाकर उसकी वृद्धावस्था पेंशन और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि रोक दी गई. खुद को जिंदा साबित करने के लिए वह ग्राम प्रधान, सचिव, ब्लॉक और तहसील से लेकर विकास भवन तक के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ. आखिरकार थक-हारकर बुजुर्ग डीएम कार्यालय पहुंचा और अधिकारियों से गुहार लगाई, 'साहब! मुझे कागजों में जिंदा कर दीजिए.'
पीड़ित किसान की पहचान रामखेलावन के रूप में हुई है. वह अतर्रा तहसील क्षेत्र का रहने वाला है. रामखेलावन का कहना है कि पिछले दो साल से उसकी वृद्धावस्था पेंशन और किसान सम्मान निधि का पैसा मिलना बंद हो गया है. उसने ग्राम प्रधान और सचिव से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद उसने ब्लॉक, तहसील और विकास भवन में भी अपनी समस्या बताई, मगर सरकारी रिकॉर्ड में उसे अब तक मृत ही माना जा रहा है.
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बुजुर्ग ने डीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह दोनों कानों से सुन नहीं पाता और पैरों से ठीक से चलने में भी परेशानी होती है. बिना डंडे के चलना उसके लिए मुश्किल है. सरकारी योजनाओं से मिलने वाली रकम ही उसके जीवनयापन का सहारा थी. पेंशन और किसान सम्मान निधि बंद होने के बाद उसे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.
दो साल से बंद है सरकारी मदद, दफ्तरों के चक्कर काटता रहा बुजुर्ग
रामखेलावन का आरोप है कि उसने अपनी समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से लगातार गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया. वह एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक अपनी मौजूदगी साबित करने की कोशिश करता रहा. इसके बावजूद सरकारी दस्तावेजों में उसकी स्थिति नहीं बदली और उसे योजनाओं का लाभ मिलना शुरू नहीं हुआ.
अब बुजुर्ग ने थक-हारकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत कर न्याय दिलाने की मांग करने की बात कही है. पीड़ित परिवार का कहना है कि अगर मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वे मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे. परिवार चाहता है कि सरकारी रिकॉर्ड में रामखेलावन को जीवित दर्ज किया जाए और उसकी रुकी हुई पेंशन तथा किसान सम्मान निधि का लाभ दोबारा शुरू कराया जाए.
DM कार्यालय में शिकायत के बाद जांच के आदेश
डीएम कार्यालय में मौजूद अधिकारियों ने बुजुर्ग की शिकायत पर जांच कराने और आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि रामखेलावन को सरकारी रिकॉर्ड में मृत किस आधार पर दर्ज किया गया. जांच में जिस भी व्यक्ति की लापरवाही सामने आएगी, उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी.
वहीं, बीडीओ धनराज ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है. इसकी जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी. उन्होंने बुजुर्ग को मदद का भरोसा भी दिया है.
फिलहाल, बुजुर्ग को जांच के बाद कार्रवाई का इंतजार है. सरकारी योजनाओं के सहारे जीवन गुजार रहे रामखेलावन के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को सरकारी दस्तावेजों में जीवित साबित करने की है. अब देखना होगा कि जांच के बाद रिकॉर्ड में सुधार होता है या नहीं और उसे दोबारा वृद्धावस्था पेंशन व किसान सम्मान निधि का लाभ कब तक मिल पाता है.