अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले फंड में कथित हेराफेरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर के अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है. मंदिर से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है.
बताया जा रहा है कि रोजाना की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट को डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रखा गया है. इसमें ट्रस्ट के अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य लोगों से की गई पूछताछ की डिटेल्स भी शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने पेश करने से पहले इस रिपोर्ट को फाइनल रूप दिया जाएगा. इसके साथ ही, एसआईटी अपनी जांच से जुड़ीं जानकारियां रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेज रही है.
यह भी पढ़ें: NEET परीक्षा की वजह से PM मोदी ने 45 मिनट एयरपोर्ट पर किया इंतजार, जानिए क्यों?
सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की जांच सिर्फ फंड की कथित हेराफेरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग फेज में मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीन और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आरोप लगाए जा रहे हैं कि मंदिर ट्रस्ट ने मार्केट रेट से ज्यादा कीमत पर जमीनें खरीदी थीं. इस मुद्दे को समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई अलग-अलग राजनीतिक दलों ने उठाया था.
अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद, मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी का गठन किया था. एसआईटी में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं.
राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़ में कोई कमी नहीं
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है. करोड़ों राम भक्तों की नजर इस पूरे मामले में चल रही एसआईटी जांच की रिपोर्ट पर टिकी हुई है. जांच का आज सातवां दिन है, वहीं मंदिर परिसर में टीम लगातार मामले से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है.
एसआईटी जांच के बीच भी राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़ में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है. बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. हालांकि, दान काउंटर पर पहले की तुलना में सन्नाटा जरूर दिखाई दे रहा है.
वहीं दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि विवाद या जांच से उनकी आस्था प्रभावित नहीं हुई है. श्रद्धालुओं ने कहा कि वे पहले भी दान कर रहे थे और आगे भी करते रहेंगे, क्योंकि उनकी श्रद्धा भगवान राम के प्रति है.
अयोध्या के संतों का भी कहना है कि कुछ लोग इस मामले को लेकर भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं. संतों का मानना है कि राम जन्मभूमि पर श्रद्धालुओं की आस्था मजबूत है और भक्तों के आने-जाने या दान करने में कोई बड़ी कमी नहीं आई है.