क्या ज्यादा सैलरी ही सफलता की असली पहचान है? सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने इस सवाल पर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. पोस्ट लिखने वाले ने बताया कि कैसे कम सैलरी, दूसरों से तुलना और पिता को खोने के बाद उनकी सोच पूरी तरह बदल गई.
परेश पिसिपति ने X पर अपनी जिंदगी का अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें लंबे समय तक नौकरी नहीं मिली, जबकि उनके कई दोस्त अच्छी नौकरी में आगे बढ़ चुके थे.उन्होंने लिखा कि जब मैं 26 साल का था, तब मेरी सैलरी सिर्फ 26 हजार रुपये थी. उस समय मेरे कई दोस्त और पुराने सहकर्मी मुझसे दोगुना या उससे भी ज्यादा कमा रहे थे.
परेश ने बताया कि 32 साल की उम्र में भी उन्हें लगता था कि वे पीछे रह गए हैं, क्योंकि उनसे कई साल जूनियर लोग उनसे ज्यादा कमाने लगे थे. दूसरों से तुलना करने की आदत उन्हें हमेशा परेशान करती रही.
'असली खुशी अपनी जिंदगी को स्वीकार करने में है'
पोस्ट में उन्होंने अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दौर का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उनके पिता कैंसर के इलाज के दौरान कीमोथेरेपी से गुजर रहे थे. इसी बीच उनकी पत्नी और मां भी अलग-अलग सड़क हादसों का शिकार हुईं. कुछ समय बाद उनके पिता का निधन हो गया.परेश ने लिखा कि पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि दूसरों से तुलना करते रहना सिर्फ उन्हें अतीत में बांधे हुए था.
उन्होंने लिखा कि उस दौर ने मुझे सिखाया कि दूसरों से तुलना करके दुखी होना सिर्फ एक बहाना था. असली खुशी अपनी जिंदगी को स्वीकार करने में है.
अब परिवार और सेहत सबसे बड़ी दौलत
परेश ने बताया कि अब उनकी प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं. वह नियमित रूप से जरूरतमंदों की मदद करते हैं, भोजन दान करते हैं और अब उनके लिए अच्छी सेहत, परिवार और रिश्ते, बड़ी सैलरी से कहीं ज्यादा मायने रखते हैं.
यही है जिंदगी का सबसे बड़ा सबक
यह पोस्ट वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी. एक यूजर ने लिखा कि जिंदगी हमें मजबूत और विनम्र बनाने के लिए कठिन दौर दिखाती है. दूसरे यूजर ने कहा कि आप जैसे लोग मेहनत करने और जमीन से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं. एक अन्य यूजर ने लिखा कि दूसरों से तुलना कभी खुशी नहीं देती. जो हमारे पास है, वही सबसे बड़ी नेमत है.
यह पोस्ट उन लोगों के लिए भी एक सीख बनकर सामने आई है, जो अपनी सफलता का पैमाना सिर्फ सैलरी या दूसरों से तुलना को मानते हैं.