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US आर्मी का रेस्ट-रिलेक्स... पहले पटाया जाते हैं, फिर HIV टेस्ट भी होता है!

286 दिनों तक समुद्र में तैनाती, बीच में युद्ध का तनाव और मानसिक दबाव... अब 5 हजार अमेरिकी सैनिक पहुंचे पटाया, वही शहर जिसने कभी अमेरिकी जवानों के R&R से अपनी नई पहचान बनाई थी. चलिए जानते हैं पटाया और अमेरिकी सैनिकों के बीच के रिश्ते की कहानी.

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पटाया में अमेरिकी सैनिकों का आर एंड आर छुट्टी बिताने की परंपरा नई नहीं है (Photo - Reuters)
पटाया में अमेरिकी सैनिकों का आर एंड आर छुट्टी बिताने की परंपरा नई नहीं है (Photo - Reuters)

यूएसएस अब्राहम लिंकन पर नौ महीने समुद्र में बिताने के बाद 5,000 से अधिक अमेरिकी नौसैनिक और मरीन बुधवार को थाईलैंड पहुंचे. ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान मध्य पूर्व में इस जहाज की लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मानसिक स्वास्थ्य संकट बढ़ने की खबरें आईं, जिनमें आत्महत्या के प्रयास भी शामिल थे.

ऐसे में समुद्र में लगातार 286 दिन बिताने के बाद यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड के लाम चाबांग बंदरगाह पहुंच गया है. इन जवानों के लिए यह कोई सामान्य पोर्ट विजिट नहीं है. यह महीनों की थकान, तनाव और युद्धक तैनाती के बाद मिलने वाला R&R यानी रेस्ट एंड रिक्रिएशन ब्रेक है.

जहाज पर मौजूद सैनिकों ने अमेरिका के ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान मध्य पूर्व में लंबी तैनाती की. इस दौरान जहाज पर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं सामने आईं. लंबे समय तक समुद्र में रहने, सप्लाई की दिक्कतों और लगातार सैन्य तनाव ने हालात को और मुश्किल बनाया. अब इन सैनिकों को पांच दिन के लिए थाईलैंड में आराम और कुछ समय जमीन पर बिताने का मौका मिला है. लेकिन इन 5 हजार अमेरिकी जवानों का पटाया पहुंचना सिर्फ आज की खबर नहीं है.

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पटाया और अमेरिकी सैनिकों का रिश्ता
पटाया और अमेरिकी सैनिकों की कहानी करीब छह दशक पुरानी है. और इस कहानी में युद्ध, छुट्टी, समुद्र, शराब, बार, पर्यटन और बदलते वक्त, सब कुछ शामिल है. आज पटाया को देखकर शायद ही कोई कल्पना कर सके कि कुछ दशक पहले तक यह थाईलैंड का एक छोटा-सा शांत समुद्री गांव था.

फिर आया वियतनाम युद्ध. 1960 और 1970 के दशक में अमेरिका ने वियतनाम में बड़ी संख्या में सैनिक उतारे. उसी दौरान थाईलैंड भी अमेरिकी सैन्य अभियानों का एक अहम केंद्र बन गया. युद्ध के चरम दौर में करीब 40,000 से 50,000 अमेरिकी सैन्यकर्मी थाईलैंड में तैनात थे. यहां मौजूद एयरबेस से वियतनाम और लाओस में अमेरिकी सैन्य अभियान चलाए जाते थे. इन सैनिकों के लिए युद्ध के बीच कुछ दिनों की छुट्टी बेहद जरूरी थी. इसी को  R&R यानी रेस्ट एंड रिलेक्स कहा गया. 

सैनिकों ने खोजा पटाया, फिर खबर फैलती चली गई
पटाया की खासियत थी उसका समुद्र, समुद्र तट और अमेरिकी ठिकानों से उसकी नजदीकी. खास तौर पर यू- टपाओ  एयरबेस और  साट्टाहिप नेवल बेस के पास होने की वजह से यह अमेरिकी सैनिकों के लिए आसानी से पहुंचने वाली जगह बन गया. यू टपाओ का इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए किया गया और वहां B-52 जैसे बड़े बमवर्षक भी तैनात रहे.

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इतिहास के कुछ विवरण बताते हैं कि 1959 में ही अमेरिकी सैनिकों का एक बड़ा समूह बैंकॉक से लगभग 100 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व स्थित इस समुद्री इलाके में पहुंचा था. इसके बाद सैनिकों के बीच पटाया की चर्चा बढ़ती गई. 1960 के दशक में अमेरिकी जवानों की आवाजाही बढ़ी और धीरे-धीरे स्थानीय कारोबारियों ने भी समझ लिया कि यहां आने वाले सैनिकों को होटल, बार, रेस्तरां, मनोरंजन और दूसरी सेवाओं की जरूरत है.

यहीं से एक छोटा मछली पकड़ने वाला गांव धीरे-धीरे पर्यटन केंद्र बनने लगा. एक ऐतिहासिक विवरण के मुताबिक, वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों के लिए पटाया एक आधिकारिक R&R केंद्र के तौर पर इस्तेमाल होने लगा था. सैनिकों को यू- टपाओ लाया जाता और वहां से पटाया भेजा जाता था.

एक समय तो ऐसी व्यवस्था तक विकसित हो गई थी कि बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक कुछ दिनों के आराम के लिए यहां आते थे.  शुरुआती 1970 के दशक तक हर महीने हजारों सैनिक कुछ दिनों की छुट्टी के लिए पटाया पहुंचते  थे.

सैनिक आए तो होटल, बार और नाइटलाइफ भी आ गई
अमेरिकी सैनिकों के लिए पटाया सिर्फ समुद्र देखने की जगह नहीं रहा. उनके साथ एक पूरा मनोरंजन उद्योग खड़ा होने लगा. बार, क्लब, रेस्तरां, मसाज पार्लर, होटल और दूसरी सेवाएं तेजी से बढ़ीं. यही वह दौर था जब पटाया की नाइटलाइफ वाली पहचान बनी.

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इसका एक स्याह पहलू भी था. सेक्स वर्क और सेक्स टूरिज्म का कारोबार तेजी से बढ़ा. शोधकर्ताओं के मुताबिक, वियतनाम युद्ध के दौरान विदेशी सैन्यकर्मियों की R&R जरूरतों ने थाईलैंड के मनोरंजन और सेक्स इंडस्ट्री के विस्तार को तेज किया. यही वजह है कि आज भी पटाया का नाम आते ही समुद्र तट के साथ-साथ उसकी नाइटलाइफ और सेक्स-टूरिज्म की छवि सामने आती है.

हालांकि शहर अब इस पहचान से आगे निकलने की कोशिश कर रहा है. पटाया प्रशासन आज स्पोर्ट्स, वेलनेस, परिवारों के लिए मनोरंजन, बीच एक्टिविटीज, शॉपिंग और दूसरे पर्यटन विकल्पों को बढ़ावा देना चाहता है. मौजूदा अमेरिकी सैनिकों के स्वागत के दौरान भी स्थानीय प्रशासन ने इसी बदलती छवि पर जोर दिया है.

वियतनाम युद्ध खत्म हुआ, लेकिन अमेरिकी सैनिकों का पटाया से रिश्ता नहीं टूटा. यहां सबसे दिलचस्प सवाल आता है. वियतनाम युद्ध के बाद क्या अमेरिकी सैनिक पटाया आना बंद हो गए थे? जवाब है—पूरी तरह नहीं. वियतनाम युद्ध के दौरान पटाया जिस पैमाने पर अमेरिकी सैनिकों के R&R का केंद्र बना था, वैसी स्थिति दोबारा नहीं बनी. लेकिन अमेरिकी सैन्यकर्मियों के लिए थाईलैंड और खासकर पटाया का आकर्षण बना रहा.

वियतनाम युद्ध के बाद भी अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के थाईलैंड आने का सिलसिला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. अमेरिकी नौसेना के पोर्ट विजिट और सैन्य अभ्यासों के दौरान जवानों को थाईलैंड में shore leave यानी कुछ समय जमीन पर छुट्टी मिलती रही.

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अब उस दावे पर आते हैं जो इस पूरी कहानी को और संवेदनशील बना देता है. क्या R&R से लौटते ही अमेरिकी सैनिकों का HIV टेस्ट किया जाता है? इसमें थोड़ा सच है, लेकिन इसे सही तरीके से समझना जरूरी है. अमेरिकी रक्षा विभाग ने 1986 से अपने सैन्यकर्मियों में HIV की नियमित निगरानी शुरू की. मौजूदा नीति के मुताबिक अमेरिकी सैन्यकर्मियों की HIV स्क्रीनिंग कुछ निर्धारित मौकों पर होती है. जैसे सैन्य सेवा में प्रवेश से पहले, तैनाती से पहले या कुछ स्टेटस चेंजेज के दौरान, और सामान्य तौर पर हर दो साल में एक बार.

अमेरिकी सेना खुद भी साफ करती है कि सैन्य सेवा के दौरान सभी सर्विस मेंबर  के लिए अनिवार्य STI स्क्रीनिंग में HIV टेस्ट शामिल है और यह सामान्य तौर पर हर दो साल में किया जाता है. ऐसे में फिर सवाल उठता है कि क्या पटाया से जाने के बाद सैनिकों का टेस्ट होगा? यह एक नॉर्मल प्रक्रिया है और यहां से जाने के बाद दूसरी तैनाती से पहले एचआईवी टेस्ट किया ही जाएगा.

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