सोचिए, अगर दिमाग की किसी खास नस को सिर्फ रोशनी डालकर ऑन या ऑफ किया जा सके तो? वैज्ञानिक यह पता लगा सकें कि दिमाग की कौन सी सेल डर पैदा कर रही है, कौन सी याददाश्त में मदद कर रही है और कौन सा न्यूरल सर्किट किसी व्यवहार के लिए जिम्मेदार है. सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसे हकीकत में बदल दिया है. इसी खोज के लिए अमेरिका के कार्ल डीसेरॉथ और जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को 2026 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार दिया गया है. इन वैज्ञानिकों के काम ने ऑप्टो जेनेटिक्स (Optogenetics) नाम की तकनीक को जन्म दिया, जिसने दिमाग और नर्वस सिस्टम पर रिसर्च का तरीका ही बदल दिया. इसके लिए उन तीनों को नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया गया. नॉमिनेशन के बाद अमेरिका के कार्ल डीसेरॉथ के परिवार का एक वीडियो वायरल हो रहा है.
परिवार का रिएक्शन हो रहा वायरल
जिस पल का इंतजार एक वैज्ञानिक पूरी जिंदगी करता है, वही खबर अगर अचानक फोन पर मिले तो शायद उस पल को शब्दों में बताना मुश्किल हो. कुछ ऐसा ही हुआ वैज्ञानिक कार्ल डाइसरॉथ के साथ. दुनिया के लिए वह उस दिन एक बड़े नोबेल पुरस्कार विजेता बन गए, लेकिन घर में वह अपने बच्चों के लिए सिर्फ उनके ‘डैड’ थे.
स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 5 अक्टूबर की रात कार्ल डाइसरॉथ को नोबेल समिति की ओर से फोन आया. लेकिन वह पहली कॉल उठा नहीं पाए. इसके बाद नोबेल समिति ने उनकी पत्नी मिशेल को फोन किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या कार्ल से बात हो सकती है, तो उन्हें अंदाजा हो गया कि जरूर कोई बड़ी खबर है.
इसके बाद जब कार्ल को बताया गया कि उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है, तो वह कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हो गए. इतनी बड़ी खबर सुनकर उनके पास तुरंत कहने के लिए शब्द ही नहीं थे. कार्ल ने बताया कि करीब 30 सेकंड तक वह कुछ बोल ही नहीं पाए. यह उनके लिए जिंदगी के सबसे खास पलों में से एक था.
सुबह बच्चों को बताई खुशखबरी
इसके बाद सुबह-सुबह जब कार्ल ने अपने बच्चों को यह खबर बताई. जब उन्हें पता चला कि उनके पिता ने नोबेल पुरस्कार जीत लिया है, तो उनकी खुशी देखने लायक थी. उनकी बेटियां सोफी और एमा पिता के पास पहुंचीं और उन्हें गले लगा लिया. वीडियो में बच्चे खुशी से चिल्लाते और अपने पिता को गले लगाते दिखाई दे रहे हैं.
बेटी ने कहा- डैड, आपने तो सारे पुरस्कार जीत लिए!
कार्ल की 10 साल की बेटी सोफी ने अपने पिता को देखकर खुशी से कहा, “डैड, आपने तो सारे पुरस्कार जीत लिए. कार्ल के 16 साल के बेटे हडसन ने भी पिता को बधाई दी. उसने अपने पिता को बेहद मेहनती बताया. उसका कहना था कि उसके पिता हर समय अपने काम को लेकर मेहनत करते रहते हैं. वहीं, उनका 18 साल का बेटा अलेक्जेंडर जब यह खबर सुनकर उठा, तो वह तुरंत पिता से मिलने घर पहुंच गया. उसने कहा कि परिवार को अपने पिता पर बहुत गर्व है.
नोबेल जीतने के बाद भी बच्चों का लंच बनाना नहीं भूले
इस पूरी कहानी की सबसे खास बात यही है. एक तरफ पूरी दुनिया कार्ल डाइसरॉथ को नोबेल पुरस्कार मिलने पर बधाई दे रही थी. दूसरी तरफ वह सुबह उठकर अपने बच्चों के स्कूल का लंच तैयार कर रहे थे. यानी दुनिया के लिए वह उस दिन नोबेल पुरस्कार विजेता बन गए थे, लेकिन अपने बच्चों के लिए वह अभी भी वही पापा थे, जो रोज की तरह उनका लंच बनाते हैं. स्टैनफोर्ड के मुताबिक उन्होंने उस सुबह घर पर बच्चों के लिए सैंडविच भी तैयार किए.