दिल्ली- एनसीआर समेत देश के कई राज्यों में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं. डेंगू होने पर सबसे बड़ा खतरा प्लेटलेट्स को लेकर होता है. अगर प्लेटलेट्स कम होती हैं तो क्या ये खतरे का संकेत होता है. ये कम क्यों हो जाती हैं और क्या इनको बढ़ाने का वाकई कोई तरीका है?
दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एंड एसोसिएट हॉस्पिटल्स में मेडसिन विभाग में प्रोफेसर ऑफ एक्सीलेंस डॉ. एल.एच घोटेकर ने इस बारे में Aajtak.in को बताया है .डॉ घोटेकर कहते हैं कि डेंगू के हर मरीज में प्लेटलेट्स का लेवल कम नहीं होता है. ऐसा केवल कुछ मरीजों में होता है. अधिकतर मामलों में डेंगू कुछ दिनों में बिना किसी गंभीर लक्षण के ठीक हो जाता है.
डेंगू में प्लेटलेट्स क्यों गिरते हैं?
डेंगू वायरस शरीर में पहुंचने के बाद खून में मौजूद प्लेटलेट्स पर असर डालता है. इसके अलावा शरीर में सूजन और इम्यून सिस्टम के एक्शन के कारण प्लेटलेट्स जल्दी कम हो सकते हैं, बोन मैरो यानी जहां खून की सेल्स बनती हैं. वहां भी कुछ समय के लिए प्लेटलेट्स बनने की प्रक्रिया पर असर होता है. इस वजह से प्लेटलेट्स का लेवल कम हो सकता है. हालांकि ऐसा नहीं है कि प्लेटलेट्स का लेवल कम है तो ये खतरनाक ही है. ये देखना होता है कि मरीज में बाकी लक्षण कैसे हैं.
यह भी पढ़ें: Dengue Vaccine : भारत में अगले साल आएगी डेंगू की पहली वैक्सीन, जानें किस उम्र के लोग लगवा सकेंगे टीका
प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए क्या करें?
डॉ घोटेकर कहते हैं कि कोई ऐसी खास दवा नहीं है जो तुरंत प्लेटलेट्स बढ़ा दे, शरीर संक्रमण से जैसे-जैसे बाहर आता है. प्लेटलेट्स भी धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं. इसलिए डॉक्टर की निगरानी में पर्याप्त तरल पदार्थ लेना, आराम करना ज्यादा जरूरी है. ये भी जरूर ध्यान रखें कि पपीते के पत्ते का रस, बकरी का दूध, कीवी या किसी दूसरे घरेलू नुस्खे को प्लेटलेट्स बढ़ाने का पक्का इलाज नहीं माना जा सकता. मेडिकल साइंस में इनके असर को लेकर कोई प्रूफ नहीं है.
यह भी पढ़ें: Delhi Dengue : दिल्ली में सितंबर में बढ़ा डेंगू और मलेरिया का खतरा, 12 दिनों में ही आए सबसे ज्यादा केस
कब प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी है?
डॉ घोटेकर कहते हैं कि इसका फैसला डॉक्टर मरीज के लक्षणों के आधार पर लेते हैं.आमतौर पर अगर मरीज को एक्टिव ब्लीडिंग हो रही है है, प्लेटलेट्स का लेवल लगातार गिरत जा रहा है तो डॉक्टर प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह देते हैं. हालांकि ये सब मरीज की पूरी हालत, प्लेटलेट काउंट, ब्लीडिंग और दूसरे ब्लड टेस्ट देखकर फैसला लिया जाता है.