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'हरे कृष्ण महामंत्र का जाप किया...,' 9 दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले शख्स ने क्या-क्या बताया?

नेपाल में जल सैलाब थमने के बाद अब उन लोगों की कहानियां सामने आ रही हैं, जो जिंदगी और मौत की जद्दोजहद के बीच मौत को मात देकर बच निकले. ऐसी ही एक कहानी सामने आई है, जहां हालात में हर उम्मीद खत्म होती दिख रही थी, लेकिन जिंदगी ने आखिरी वक्त तक हार नहीं मानी और जीत आखिरकार जिंदगी की हुई.

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त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 10 दिन बाद जिंदा बाहर निकाले गए संजय साह. (Photo:Reuters)
त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से 10 दिन बाद जिंदा बाहर निकाले गए संजय साह. (Photo:Reuters)

'इन मुश्किल पलों में मैं महामंत्र का जाप कर रहा था.' ये कहना है संजय साह का, जो 9 दिन तक अंधेरी सुरंग में फंसे रहे. नेपाल में जल प्रलय थमने के बाद जिंदगी बचाने के संघर्ष की ऐसी-ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं, जो बताती हैं कि इंसान मुश्किल से मुश्किल हालात में कैसे सर्वाइव कर सकता है और जिंदगी बचाने के लिए किस तरह आखिरी दम तक लड़ता है.

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के 10 दिन बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया. इनमें सप्तरी के मैकेनिकल फोरमैन संजय साह भी शामिल हैं. शुक्रवार को रेस्क्यू किए गए संजय करीब 10 दिन तक अंधेरी सुरंग में फंसे रहे. बाहर आने के बाद उन्होंने अपने जिंदगी के संघर्ष को बताया. हादसे के वक्त उन्होंने अपनी जान बचाने से पहले वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की.

संजय साह हादसे के वक्त प्रोजेक्ट के कंट्रोल रूम में काम कर रहे थे. उन्होंने नेपाली सेना की मेडिकल टीम को बताया कि वहां लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके पास थी. उन्होंने कहा कि मैं कंट्रोल रूम में काम कर रहा था. मेरी जिम्मेदारी सभी की जान बचाना थी.

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पहले दूसरों को बचाने की कोशिश की

संजय के मुताबिक, हादसा होते ही उन्होंने सभी लोगों से बाहर निकलने के लिए कहा. वह खुद भी निकलना चाहते थे, लेकिन दूसरों को बाहर भेजने की कोशिश में उनका वक्त निकल गया. जब तक उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.उन्होंने कहा कि मैंने सभी से भागने के लिए कहा. ऐसा करने में मेरा समय निकल गया. आखिर में मैं बाहर नहीं निकल सका.

हादसे के वक्त सुरंग में करीब 40 से 45 लोग मौजूद थे. संजय ने बताया कि सामान्य तौर पर कंट्रोल रूम में एक ऑपरेटर और चार-पांच लोग रहते हैं, लेकिन हादसे के समय वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

Photo: AFP

उन्होंने कहा कि हादसे के समय वहां करीब 40-45 लोग एकत्रित थे. कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी मेरे पास थी. इसलिए सभी को बचाने की जिम्मेदारी भी मेरे पास थी.

बाढ़ का पानी और मलबा सुरंग के भीतर पहुंचने के बाद संजय वहीं फंस गए. इसके बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को सुरक्षित रखने के साथ रेस्क्यू का इंतजार करना थी.

सुरंग में महामंत्र का जाप करते रहे

करीब 10 दिन तक सुरंग के भीतर रहने के दौरान संजय साह महामंत्र का जाप करते रहे. उन्होंने बताया कि इंतजार के उन मुश्किल पलों में वह मंत्र का जाप करते रहे. इसी दौरान उन्हें उम्मीद थी कि एक दिन रेस्क्यू टीम उन्हें बाहर निकाल लेगी.

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संजय को सुरंग के भीतर अपने आसपास मौजूद कुछ लोगों के बारे में जानकारी थी. उनके मुताबिक, तीन या चार लोगों से बातचीत या आवाज के जरिए संपर्क हो पाया था.उन्होंने कहा कि केवल तीन या चार लोग ऐसे थे, जिनसे हम पास में बात करके या आवाज के जरिए संपर्क कर पा रहे थे.

हालांकि, संजय ने यह भी बताया कि सुरंग के भीतर और लोग फंसे हो सकते हैं. उनके मुताबिक, सुरंग काफी लंबी है और संभव है कि सभी लोग बाहर न निकल पाए हों. तेज बहाव के कारण कुछ लोगों के सुरंग के भीतर और आगे चले जाने की भी आशंका उन्होंने जताई.उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है. हो सकता है कि हर कोई बाहर न निकल पाया हो. सुरंग बहुत लंबी है.

कबीर महारजन की कहानी

संजय साह के साथ काठमांडू के रहने वाले कबीर महारजन को भी शुक्रवार को सुरंग से जिंदा बाहर निकाला गया. वह भी त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करते थे और बाढ़ के बाद सुरंग में फंस गए थे.

कबीर के जिंदा बचने की खबर सुनकर उनके परिवार को बड़ी राहत मिली. उनकी पत्नी हीरा शोभा ने कहा कि उनके पति को दूसरा जीवन मिला है. उन्होंने कहा कि वह दूसरा जीवन लेकर लौटे हैं. हम बेहद खुश हैं.

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कबीर महारजन को सुरंग से निकाला गया (Photo:Reuters)

हीरा शोभा ने बताया कि परिवार पिछले कई दिनों से उनके लौटने का इंतजार कर रहा था. यह समय उनके लिए बेहद मुश्किल था. उन्होंने कहा कि इस दौरान परिवार न ठीक से खा पा रहा था और न सो पा रहा था.

उन्होंने कहा कि उन दिनों से गुजरना बहुत मुश्किल था. यह एक-दो दिन की बात नहीं थी. हम न खा सकते थे और न सो सकते थे.हीरा शोभा ने बताया कि उन्हें लगातार विश्वास था कि उनके पति सुरंग के अंदर जिंदा हैं और वापस लौटेंगे. रेस्क्यू में समय लगने से परिवार की बेचैनी और बढ़ती गई, लेकिन उम्मीद बनी रही.

सात साल से प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे कबीर

हीरा शोभा के मुताबिक, कबीर महारजन पिछले सात साल से त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे. बाढ़ आने से कुछ समय पहले बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे उनकी पति से आखिरी बार बात हुई थी.इसके बाद बाढ़ ने हालात बदल दिए और वह सुरंग के अंदर फंस गए.

शुक्रवार सुबह नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद से संजय साह और कबीर महारजन को सुरंग से बाहर निकाला. करीब 10 दिन तक अंदर फंसे रहने के बाद दोनों का जिंदा बाहर आना उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया.

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संजय साह के लिए यह सिर्फ रेस्क्यू की कहानी नहीं है. हादसे के वक्त उन्होंने पहले दूसरों को बाहर निकालने की कोशिश की, जिसके चलते खुद सुरंग में फंस गए. इसके बाद अंधेरे में करीब 10 दिन तक महामंत्र का जाप करते हुए रेस्क्यू का इंतजार किया. शुक्रवार को आखिरकार उन्हें बाहर निकाल लिया गया.

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