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'नारी शक्ति नहीं, मजबूरी है'... मुंबई लोकल के गेट पर लटकती महिलाओं का वीडियो वायरल

मुंबई लोकल में जान जोखिम में डालकर सफर करती महिलाओं का वीडियो वायरल हुआ तो इसे 'नारी शक्ति' कहने वालों और सिस्टम की मजबूरी बताने वालों के बीच बहस छिड़ गई.

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मुंबई लोकल में भीड़ की वजह से जान गंवाने के आंकड़े काफी डरावने हैं(Photo: X/@pallvika_)
मुंबई लोकल में भीड़ की वजह से जान गंवाने के आंकड़े काफी डरावने हैं(Photo: X/@pallvika_)

मुंबई की लोकल ट्रेन को शहर की लाइफलाइन कहा जाता है . लेकिन इस लाइफलाइन की हकीकत ये भी है ये ओवर क्राउडेड होती है. कई बार में लोग जान की जोखिम रखकर सफर करते हैं. सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ओवरक्राउडेड लोकल ट्रेन के महिला डिब्बे के दरवाजे पर कई महिलाएं लटककर सफर करती दिख रही हैं. ट्रेन तेज रफ्तार से चल रही है, हवा में महिलाओं के बाल उड़ रहे हैं और वे दरवाजे के बाहर फुटबोर्ड पर खड़ी नजर आ रही हैं.

23 अगस्त को X यूजर @pallvika_ ने यह वीडियो शेयर करते हुए इसे 'नारी शक्ति' बताया. वीडियो वायरल हुआ तो  लोगों ने उन्हें बताया यह बहादुरी नहीं, बल्कि मजबूरी है. वहीं किसी  सिस्टम की नाकामी को छिपाने के लिए इसे नारी-शक्ति का नाम ना दें.

आंकड़े जो असली तस्वीर दिखाते हैं

यह वीडियो अकेली घटना नहीं है .मुंबई लोकल में भीड़ की वजह से जान गंवाने के आंकड़े काफी डरावने हैं. सेंट्रल रेलवे की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे के मुताबिक, पिछले 8 साल में सेंट्रल रेलवे ट्रैक्स पर 8,273 यात्रियों की मौत हो चुकी है, जिसकी बड़ी वजह पटरी पार करना, लापरवाही और चलती ट्रेन में दरवाजे पर लटककर सफर करना है. अकेले 2025 के पहले 5 महीनों में ही ट्रैक पर अतिक्रमण या लोकल ट्रेन से गिरने के कारण 443 लोगों की मौत हो चुकी थी.

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पूरे मुंबई सबअर्बन नेटवर्क के आंकड़े देखें तो तस्वीर और भी गंभीर हो जाती है.2025 में उपनगरीय रेल में कुल 4,841 हादसे दर्ज हुए, जिनमें 1,588 यात्रियों की जान गई. इसी पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए कहा कि इसे सिस्टम की कमी नहीं कहा जाएगा. या नारी शक्ति कहकर सब छिपा दिया जाएगा.

देखें वीडियो

क्यों बढ़ती है भीड़ और खतरा

मुंबई-एमएमआर क्षेत्र में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए करीब 80 फीसदी लोग आज भी लोकल ट्रेन पर निर्भर हैं, जबकि यात्रियों के हिसाब से ट्रेनों में पर्याप्त जगह नहीं बचती। यही वजह है कि रोज हजारों यात्री मजबूरी में दरवाजे पर लटककर सफर करते हैं. 
 

सोशल मीडिया पर बहस

वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. गौरव जे. सोनटके ने लिखा कि मुश्किल हालात में खुद को संभाल लेना सराहनीय जरूर है, लेकिन असली सम्मान तभी होगा जब सिस्टम को ठीक किया जाए ताकि किसी को ट्रेन के बाहर लटकना ही न पड़े. कई यूजर्स ने इसे रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या बताते हुए ज्यादा कोच और ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी बढ़ाने की मांग की.वहीं एक यूजर ने कहा कि मैम, कम से कम इसे नारी शक्ति तो मत कहिए. कई बार हम सिस्टम पर सवाल नहीं कर पाते, उससे डरते हैं, इसलिए उसी मजबूरी को गर्व की भावना से जोड़ देते हैं.

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