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1.5 करोड़ का घर खरीदने के बाद पछता रहा शख्स, बताया यहां हुई सबसे बड़ी गलती

रेडिट पर एक शख्स ने बताया कि 25 लाख रुपये की सालाना आय के दौरान उसने 1.5 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीदा. बाद में इनकम घटने, भारी EMI और मरम्मत के बढ़ते खर्चों ने उसकी आर्थिक स्थिति खराब कर दी है. अब वह अपने फैसले पर पछता रहा है और लोगों से सलाह मांग रहा है.

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कई यूजर्स ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति की सैलरी का बहुत बड़ा हिस्सा EMI में नहीं जाना चाहिए. ( Photo: ITG)
कई यूजर्स ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति की सैलरी का बहुत बड़ा हिस्सा EMI में नहीं जाना चाहिए. ( Photo: ITG)

हर इंसान का सपना होता है कि उसका अपना एक घर हो. सालों की मेहनत, सेविंग और भविष्य के सुनहरे सपनों को ध्यान में रखकर लोग बड़ा होम लोन लेते हैं. लेकिन कभी-कभी जिंदगी अचानक ऐसा मोड़ ले लेती है कि वही सपना सबसे बड़ी चिंता बन जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ एक व्यक्ति के साथ, जिसने अच्छी कमाई के भरोसे 1.5 करोड़ रुपये का फ्लैट खरीद लिया, लेकिन कुछ ही समय बाद हालात इतने बदल गए कि अब उसे अपने फैसले पर पछतावा हो रहा है. इस व्यक्ति ने अपनी कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर शेयर की. उसने बताया कि करीब एक साल पहले, जब उसकी सालाना कमाई लगभग 25 लाख रुपये थी, तब उसने 1.5 करोड़ रुपये का अपार्टमेंट खरीद लिया. उस समय उसे लगा कि उसकी इनकम लगातार बढ़ेगी और वह आराम से होम लोन की ईएमआई चुका पाएगा

शुरुआत में सब कुछ ठीक चल रहा था. 2025 में उसकी इनकम बढ़कर करीब 32 लाख रुपये सालाना भी हो गई. लेकिन किस्मत ने अचानक करवट बदल ली. जिस बिजनेस से उसकी कमाई होती थी, उसमें भारी गिरावट आ गई. क्योंकि उसकी सैलरी का बड़ा हिस्सा कमीशन पर आधारित था, इसलिए हर महीने मिलने वाली  इनकम पहले से काफी कम हो गई. आज स्थिति यह है कि उसकी मौजूदा कमाई से मुश्किल से घर की EMI और रोजमर्रा के जरूरी खर्च पूरे हो पा रहे हैं. बचत करना तो दूर, महीने का बजट संभालना भी मुश्किल हो गया है. आर्थिक दबाव इतना बढ़ गया है कि अब वह अतिरिक्त कमाई के लिए कोई दूसरा काम शुरू करने की योजना बना रहा है.

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बढ़ी आय, फिर अचानक बदल गए हालात
मुसीबत सिर्फ EMI तक सीमित नहीं रही. फ्लैट में रहने के बाद उसे कई ऐसे खर्चों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में उसने पहले कभी सोचा भी नहीं था. सोसायटी मेंटेनेंस, घर की मरम्मत और दूसरी जरूरी चीजों पर अब तक करीब 2.5 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं. इसके अलावा प्लंबिंग की समस्या ठीक कराने में भी लगभग 50 हजार रुपये और खर्च होने का अनुमान है. उसने बताया कि उसका इमरजेंसी फंड भी अब घटकर सिर्फ 5 लाख रुपये रह गया है. हालांकि उसने म्यूचुअल फंड और पीपीएफ में करीब 10 लाख रुपये निवेश किए हैं, लेकिन वह उन पैसों को आखिरी विकल्प के तौर पर ही इस्तेमाल करना चाहता है, ताकि भविष्य की सुरक्षा बनी रहे.

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इमरजेंसी फंड भी होने लगा खत्म
लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव ने उसे मानसिक रूप से भी परेशान कर दिया है. उसने रेडिट पर लोगों से सलाह मांगते हुए लिखा कि अब उसे समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या किया जाए. उसे इस बात की भी चिंता है कि फ्लैट खरीदने के तुरंत बाद उसे बेचना आसान नहीं होगा. उसकी पोस्ट पर हजारों लोगों ने अपनी राय दी. कुछ लोगों ने उसे हिम्मत बंधाते हुए कहा कि जिंदगी में बुरे दिन हमेशा नहीं रहते और समय के साथ हालात बदल सकते हैं. वहीं कई लोगों ने सलाह दी कि अगर EMI का बोझ लगातार बढ़ रहा है और आय स्थिर नहीं है, तो नुकसान सहकर भी फ्लैट बेच देना बेहतर हो सकता है. उनका कहना था कि इससे कर्ज का दबाव खत्म होगा और वह दोबारा आर्थिक रूप से मजबूत शुरुआत कर सकेगा.

कई यूजर्स ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति की सैलरी का बहुत बड़ा हिस्सा EMI में नहीं जाना चाहिए. अगर हर महीने कमाई का 15 से 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सिर्फ लोन चुकाने में खर्च हो रहा है, तो भविष्य में आर्थिक संकट का खतरा बढ़ सकता है. यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए सीख है जो भविष्य की कमाई का अनुमान लगाकर बड़ा होम लोन ले लेते हैं. अपना घर होना जरूर खुशी की बात है, लेकिन उससे पहले अपनी आय, बचत, इमरजेंसी फंड और भविष्य के खतरे का सही आकलन करना भी उतना ही जरूरी है. क्योंकि सपनों का घर तभी सुकून देता है, जब उसकी किस्तें आपकी जिंदगी का सबसे बड़ा बोझ न बन जाएं.

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