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Psychology Facts: जो लोग हमेशा लेट आते हैं, उनकी पर्सनैलिटी कैसी होती है? साइकोलॉजी में छिपे हैं कई दिलचस्प राज

क्या आप या आपका कोई दोस्त हमेशा लेट पहुंचता है? साइकोलॉजी के अनुसार इसके पीछे समय का गलत अनुमान, मल्टीटास्किंग, तनाव और टाइम मैनेजमेंट जैसी कई वजहें हो सकती हैं.

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साइकोलॉजी में इस विषय पर कई रिसर्च की गई हैं. ( Photo: ITG)
साइकोलॉजी में इस विषय पर कई रिसर्च की गई हैं. ( Photo: ITG)

बस 5 मिनट में पहुंच रहा हूं... अगर आपके किसी दोस्त या रिश्तेदार का यह फेवरेट डायलॉग है, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं. लगभग हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा व्यक्ति जरूर होता है जो हर मुलाकात, पार्टी, ऑफिस या फैमिली फंक्शन में देर से पहुंचता है. कई बार लोग ऐसे लोगों को आलसी, गैर-जिम्मेदार या लापरवाह समझ लेते हैं. लेकिन क्या वाकई हर बार लेट आने वाले लोग ऐसे ही होते हैं? साइकोलॉजी कहती है कि किसी व्यक्ति का बार-बार देर से पहुंचना हमेशा उसकी बुरी आदत या दूसरों की परवाह न करने का संकेत नहीं होता. इसके पीछे कई मानसिक, व्यवहारिक और व्यक्तित्व से जुड़े कारण हो सकते हैं. हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि केवल इस एक आदत के आधार पर किसी इंसान की पूरी पर्सनैलिटी तय नहीं की जा सकती. आइए जानते हैं कि इस बारे में मनोविज्ञान क्या कहता है.

कुछ लोग हर काम के लिए जरूरत से कम समय का अनुमान लगाते हैं. उन्हें लगता है कि नहाने, तैयार होने, नाश्ता करने और घर से निकलने में सिर्फ 20 मिनट लगेंगे, जबकि वास्तव में इसमें 40–45 मिनट लग जाते हैं. मनोविज्ञान में इसे Planning Fallacy कहा जाता है. यानी इंसान किसी काम को पूरा करने में लगने वाले समय का जरूरत से ज्यादा पक्का अनुमान लगा लेता है. यही वजह है कि ऐसे लोग अक्सर बिना चाहे भी लेट हो जाते हैं.

आखिरी समय तक काम करने की आदत
कुछ लोग तब तक किसी काम की शुरुआत ही नहीं करते, जब तक समय बिल्कुल कम न बच जाए. वे सोचते हैं कि अभी तो बहुत समय है और आराम से बैठे रहते हैं. लेकिन जब निकलने का वक्त आता है, तब उन्हें एहसास होता है कि कई काम अभी बाकी हैं. ऐसी आदत वाले लोग अक्सर समय के दबाव में काम करते हैं और लगभग हर जगह देर से पहुंचते हैं.

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एक साथ कई काम करने की कोशिश
क्या आपने ऐसे लोगों को देखा है जो घर से निकलने से पहले कपड़े भी बदलते हैं, फोन भी करते हैं, सोशल मीडिया भी देख लेते हैं, पानी की बोतल भी भरते हैं और फिर सोचते हैं कि अभी तो काफी समय बचा है? ऐसे लोग खुद को बहुत अच्छा मल्टीटास्कर समझते हैं, लेकिन कई छोटे-छोटे काम मिलकर उन्हें देर करा देते हैं. उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं होता कि समय कब निकल गया.

क्रिएटिव लोगों में भी दिख सकती है यह आदत
कुछ रिसर्च बताते हैं कि कई क्रिएटिव लोग किसी काम या आइडिया में इतने डूब जाते हैं कि उन्हें समय का ध्यान ही नहीं रहता. जब वे किसी प्रोजेक्ट, किताब, डिजाइन या संगीत में लगे होते हैं, तो उनके लिए घड़ी की सुइयां मानो रुक जाती हैं. हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि हर क्रिएटिव इंसान लेट आता है या हर लेट आने वाला व्यक्ति बहुत क्रिएटिव होता है. यह सिर्फ कुछ लोगों में देखा गया बिहेवियर है.

तनाव और चिंता भी बन सकते हैं वजह
बार-बार लेट होने का कारण कई बार मानसिक तनाव भी हो सकता है. कुछ लोग घर से निकलने से पहले बार-बार ताला, गैस, मोबाइल, पर्स या चाबी चेक करते हैं. उन्हें डर रहता है कि कहीं कुछ छूट न जाए. ऐसे लोग जानबूझकर देर नहीं करते, बल्कि उनकी चिंता उन्हें समय पर निकलने नहीं देती.

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कुछ लोगों के लिए समय की रफ्तार अलग होती है
सभी लोग समय को एक जैसा महसूस नहीं करते. कुछ लोगों को लगता है कि उनके पास अभी काफी समय है, जबकि वास्तविकता में वे पहले ही लेट हो चुके होते हैं. यही वजह है कि वे आराम से तैयार होते रहते हैं और आखिर में जल्दी-जल्दी भागना पड़ता है.

क्या लेट आने वाले लोग लापरवाह होते हैं?
अगर कोई व्यक्ति कभी-कभी ट्रैफिक, अचानक आए काम या किसी जरूरी वजह से देर से पहुंचता है, तो यह सामान्य बात है. लेकिन अगर कोई लगभग हर बार बिना किसी ठोस कारण के देर से पहुंचे और दूसरों को इंतजार करना उसकी आदत बन जाए, तो यह खराब टाइम मैनेजमेंट या दूसरों के समय की अनदेखी का संकेत हो सकता है.

समय के पाबंद लोग कैसे होते हैं?
साइकोलॉजी में Conscientiousness नाम का एक व्यक्तित्व गुण बताया गया है. जिन लोगों में यह गुण ज्यादा होता है, वे आमतौर पर पहले से योजना बनाते हैं, जिम्मेदारी निभाते हैं और समय का सम्मान करते हैं.वहीं जिन लोगों में यह गुण कम होता है, उन्हें समय का सही प्रबंधन करने में कठिनाई हो सकती है.

क्या यह आदत बदली जा सकती है?
थोड़ी-सी कोशिश से कोई भी व्यक्ति समय का बेहतर प्रबंधन सीख सकता है. निकलने का समय वास्तविक समय से 15 मिनट पहले तय करें. रात में ही कपड़े, चाबी और जरूरी सामान तैयार रखें. मोबाइल में अलार्म और रिमाइंडर लगाएं. ट्रैफिक और अन्य देरी के लिए अतिरिक्त समय रखें. बस पांच मिनट और वाली आदत छोड़ने की कोशिश करें. धीरे-धीरे यह अभ्यास आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है.

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हर व्यक्ति को एक ही नजर से न देखें
यह समझना जरूरी है कि किसी इंसान की पूरी पर्सनैलिटी का फैसला केवल इस बात से नहीं किया जा सकता कि वह समय पर पहुंचता है या नहीं. इंसान का व्यवहार उसकी परवरिश, काम का दबाव, मानसिक स्थिति, आदतों और परिस्थितियों से भी प्रभावित होता है. इसलिए अगर आपका कोई दोस्त या परिवार का सदस्य हमेशा लेट आता है, तो उसे तुरंत आलसी या गैर-जिम्मेदार कहने से पहले यह समझने की कोशिश करें कि इसके पीछे कोई और कारण भी हो सकता है.

क्या कहती है रिसर्च?
साइकोलॉजी में इस विषय पर कई रिसर्च की गई हैं. साल 1979 में मनोवैज्ञानिक डेनियल काह्नमन (Daniel Kahneman) और अमोस ट्वरस्की (Amos Tversky) ने अपनी रिसर्च में बताया कि लोग अक्सर किसी काम को पूरा करने में लगने वाले समय का गलत अंदाजा लगा लेते हैं. उन्हें लगता है कि काम जल्दी खत्म हो जाएगा, लेकिन वास्तव में उसमें ज्यादा समय लग जाता है. इसी वजह से कई लोग अक्सर देर से पहुंचते हैं. इसे Planning Fallacy कहा जाता है.

वहीं, पॉल कोस्टा (Paul Costa)और रॉबर्ट मैक्रे (Robert McCrae) के व्यक्तित्व से जुड़े रिसर्च बताते हैं कि जो लोग पहले से योजना बनाकर काम करते हैं, जिम्मेदार होते हैं और समय का ध्यान रखते हैं, वे आमतौर पर समय के पाबंद होते हैं. हालांकि इन रिसर्च का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि हर बार देर से आने वाला व्यक्ति गैर-जिम्मेदार होता है. किसी के लेट होने के पीछे उसकी आदत, परिस्थिति या अन्य व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं. तो चलिए जानते हैं लेट होने वाले अक्सर लेट क्यों हो जाते हैं.

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