विदेश घूमने आने वाले लोग अक्सर भारत के खान-पान, संस्कृति और ऐतिहासिक जगहों की बातें करते हैं. लेकिन जर्मनी के ट्रैवलर डेविड नेबेल इस बार सूरत के एक सरकारी अस्पताल का अनुभव लेकर लौटे. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि भारत में उन्हें सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज मिला.जिसके बाद उन्होंने पूरा अनुभव बताया. वीडियो में उन्होंने बताया ये अनुभव उम्मीद से कहीं बेहतर रहा.
डेविड पिछले नौ साल से दुनिया के अलग-अलग देशों की यात्रा कर रहे हैं. हाल ही में गुजरात के सूरत में उन्हें सिरदर्द और ठंड लगने जैसी परेशानी हुई. इसके बाद उन्होंने निजी अस्पताल जाने के बजाय वेसू के एक सरकारी अस्पताल का रुख किया.
मलेरिया-डेंगू की हुई जांच
अस्पताल में डॉक्टरों ने उनके लक्षण सुनने के बाद एहतियात के तौर पर मलेरिया और डेंगू की जांच कराने की सलाह दी. दोनों रिपोर्ट निगेटिव आईं और डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें सामान्य सिरदर्द है.
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लेकिन डेविड को सबसे ज्यादा हैरानी इलाज के तरीके ने दी. उन्होंने बताया कि न लंबा इंतजार करना पड़ा, न ज्यादा कागजी कार्रवाई हुई और न ही डॉक्टर की सलाह या जांच के लिए कोई फीस ली गई.
देखें वीडियो
'जर्मनी में महीनों इंतजार करना पड़ता है'
इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में डेविड ने कहा कि जर्मनी में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट मिलने में कई बार महीनों लग जाते हैं. जबकि सूरत में वह सीधे अस्पताल पहुंचे, डॉक्टर से मिले और उसी दिन जरूरी जांच भी हो गई. उन्होंने भारत सरकार का भी धन्यवाद किया कि एक विदेशी होने के बावजूद उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य सेवा मिली.
पहले भी कर चुके हैं तारीफ
यह पहली बार नहीं है जब डेविड ने भारत के सरकारी अस्पताल की सराहना की हो. इससे पहले आवारा कुत्ते के काटने के बाद भी उन्होंने सरकारी अस्पताल में एंटी-रेबीज का इलाज कराया था. तब भी उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था, साफ-सफाई और तेज सेवा की तारीफ की थी.
डेविड का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. कई लोगों ने इसे भारत की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की सकारात्मक तस्वीर बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने कहा कि अलग-अलग शहरों और अस्पतालों में लोगों का अनुभव अलग हो सकता है.