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Gen Z Loneliness: पूरे दिन फोन, ऑनलाइन हज़ारों दोस्त, फिर भी अकेला क्यों Gen Z?

सोशल मीडिया के दौर में जेन जी के पास फ्रेंड्स तो बहुत हैं फिर चाहे वो रियल लाइफ हो या डिजिटल फ्रेंड. लेकिन इसके बावजूद जेन जी अकेला महसूस करती है. ऐसा ही खुलासा फील फजी के एक आर्टिकल में हुआ है, जिसमें बताया गया कि 80% जेन जी ने पिछले एक साल में अकेलापन महसूस किया है. ऑनलाइन बातचीत, स्क्रीन पर ज्यादा वक्त बिताना एक आमने-सामने मिलने के कम होते मौके इस प्रॉब्लम की एक बड़ी वजह है.

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डिजीटल फ्रेंड्स के बावजूद अकेला क्यों महसूस करती है जेन जी?
डिजीटल फ्रेंड्स के बावजूद अकेला क्यों महसूस करती है जेन जी?

आज की जेन जी के पास दोस्तों से जुड़े रहने के कई तरीके हैं. इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वे कभी भी किसी से बात कर सकती हैं. उनकी पोस्ट पर लाइक्स और कमेंट्स भी आते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई जेन जी अकेलापन महसूस कर रहे हैं. आखिर ऑनलाइन इतने लोगों से जुड़े रहने के बाद भी जेन जी अकेली क्यों है?

कितने जेन जी महसूस कर रहे हैं अकेलापन?

फील फजी की आर्टिकल के मुताबिक, पिछले एक साल में 80% जेन जी ने अकेलापन महसूस किया. वहीं, बेबी बूमर्स में यह आंकड़ा 45% था. ह्यूमन 8 रिसर्च की 2025 की स्टडी के मुताबिक, दुनिया भर में 62% जेन जी के लिए गहरे और अच्छे रिश्ते बनाना मुश्किल हो रहा है. यानी फेंड्स की लंबी लिस्ट होने के बावजूद कई युवाओं को ऐसा कोई नहीं मिलता, जिससे वे खुलकर अपनी बात कह सकें.

सोशल मीडिया पर कनेक्शन लेकिन रियल लाइफ में दूरी

जेन जी के अकेलेपन की एक बड़ी वजह सोशल मीडिया का ज्यादा यूज भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, जेन जी हर दिन करीब 7.2 घंटे ऑनलाइन कंटेंट देखने में बिताते हैं. दोस्तों की स्टोरी देखना, रील्स स्क्रॉल करना और पोस्ट लाइक करना उनकी रोज की आधत है. लेकिन किसी की फोटो लाइक करना और उससे दिल की बात करना अलग चीजें हैं. ऑनलाइन कनेक्शन हमेशा गहरी दोस्ती में नहीं बदल पाते.

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ऑनलाइन चैट की जगह नहीं ले सकती आमने-सामने की बातचीत

आज ज्यादातर बातचीत मैसेज और चैट के जरिए होती है. इससे बात करना आसान जरूर हुआ हैं, लेकिन आमने-सामने मिलने का एक्सपीरियंस अलग होता है. किसी से मिलकर बात करने पर उसके चेहरे के एक्सप्रेशन्स और फीलिंग्स को ज्यादा बेहतर समझ सकते है. वहीं मैसेज में कई बार सामने वाले की बात का गलत मतलब निकल सकता है. 

कोरोना के बाद बदली दोस्ती की आदत

कोरोना के दौरान स्कूल-कॉलेज बंद होने से जेन जी की सोशल लाइफ सबसे ज्यादा अफेक्ट हुई. दोस्तों से मिलना कम हुआ और बातचीत फोन या वीडियो कॉल तक सीमित रह गई. रिपोर्ट में राइटर अन्ना गोल्डफार्ब की किताब 'मॉडर्न फ्रेंडशिप' का भी जिक्र है, जिसके मुताबिक कोरोना ने लोगों के मिलने-जुलने और दोस्ती बनाने के तरीकों को प्रभावित किया.

अकेलेपन से कैसे बाहर निकले जेन जी?

अकेलेपन को कम करने के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है. इसकी शुरुआत छोटे बदलावों से हो सकती है. जैसे, दोस्तों से सिर्फ चैट करने के बजाय उनसे मिलना, फोन स्क्रॉल करने का कम करना और  अपनी पसंद की एक्टिविटीज में शामिल होना.

सोशल मीडिया पर हजारों लोगों से जुड़े रहना और किसी के साथ गहरा रिश्ता होना दो अलग बातें हैं. जेन जी के लिए जरूरी है कि ऑनलाइन कनेक्शन के साथ रियल लाइफ की फ्रेंडशिप और बातचीत को भी वक्त दिया जाए. 

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