scorecardresearch
 

Healthwealth summit: पेट की सेहत बिगड़ी तो दिमाग पर भी पड़ सकता है असर, जानें कैसे काम करता है 'गट-ब्रेन एक्सिस'

गट-ब्रेन एक्सिस आंत और दिमाग के बीच एककनेक्शन है. गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अश्वनी चोपड़ा और लाइफ कोच रसिक चोपड़ा ने इस कनेक्शन की भूमिका और इसके प्रभावों पर चर्चा की.

Advertisement
X
Dr chopra
Dr chopra

क्या आप जानते हैं कि मेंटल हेल्थ और पाचन की समस्याएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. मेडिकल साइंस में इनके बीच का संबंध तेजी से चर्चा में है. मेडिकल की भाषा में इसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है. ये आंत और दिमाग के बीच का एक सीधा और दो-तरफा कम्युनिकेशन नेटवर्क है. इसके जरिए पेट और दिमाग लगातार एक-दूसरे से सिग्नल का आदान-प्रदान करते हैं. अगर किसी व्यक्ति को ज्यादा मानसिक तनाव या चिंता है तो पेट में दर्द, एसिडिटी या कब्ज की समस्या जैसे भी होने लगते हैं. ये इसी गट-ब्रेन एक्सेस के कारण होता है. आजतक हेल्थ वेल्थ समिट में दिल्ली के आश्लोक हॉस्पिटल के प्रमुख गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अश्वनी चोपड़ा और लाइफ कोच रसिक चोपड़ा ने गट-ब्रेन एक्सिस पर अपने विचार रखे.

उन्होंने कहा कि हमारे पाचन तंत्र में एंटेरिक नर्वस सिस्टम मौजूद होता है. इसमें करोड़ों नर्व सेल्स होती हैं, जो भोजन को आगे बढ़ाने, पाचन और आंतों की एक्टिविटी को कंट्रोल करने में मदद करती हैं. आंतों को आम भाषा में शरीर का दूसरा दिमाग भी कहा जाता है. यह सिस्टम पाचन से जुड़े कई काम कंट्रोल करता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि आंत दिमाग की तरह सोचती या फैसले लेती है. दिमाग का अपना एक काम है और आंतों का अपना, लेकिन दोनों के बीच एक कनेक्शन है. इस कनेक्शन में वेगस नर्व बहुत अहम होती है. 

यह भी पढ़ें: Healthwealth summit: फिट रहने के लिए जिम, महंगी डाइट जरूरी नहीं; 'इंडियाज फिटेस्ट फैमिली' ने बताया फिटनेस का मंत्र

वेगस नर्व कैसे जोड़ती है आंत और दिमाग को?

Advertisement

वेगस नर्व  शरीर के कई आंतरिक अंगों तक जाती है और आंत से मिलने वाली जानकारी दिमाग तक पहुंचाती है. इसी तरह दिमाग भी इसके जरिए पाचन तंत्र को संकेत भेजता है. उदाहरण के लिए, जैसे मानसिक तनाव होने पर दिमाग से मिलने वाले संकेत आंतों के काम करने के तरीके और खाना पचने की प्रक्रिया पर असर कर सकते हैं. दूसरी तरफ, आंत में होने वाली हलचल, सूजन और केमिकल बदलाव भी दिमाग तक संकेत पहुंचा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: HealthWealth Summit: सोशल मीडिया पर मेंटल हेल्थ की चर्चा बढ़ी, फिर भी 75% लोग मदद लेने से बचते हैं

आंत के बैक्टीरिया मूड को कैसे प्रभावित करते हैं?

हमारी आंतों में खरबों सूक्ष्मजीव रहते हैं, जिन्हें गट माइक्रोबायोम कहते हैं. इनमें अच्छे बैक्टीरिया भी शामिल होते हैं. ये भोजन के कुछ हिस्सों को पचाने, विटामिन बनाने और शॉर्ट चेन फैटी एसिड  तैयार करने में मदद करते हैं. लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रहता है. इससे कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का लेवल बदल या बढ़ सकता है. यही वजह है कि कुछ लोगों को तनाव के दौरान पेट दर्द, गैस, दस्त या कब्ज की परेशानी होने लगती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement