यूरोप की ग्लैमरस लाइफ देखकर बड़ी संख्या में इंडियंस विदेश में सेटल होने का सपना देखते हैं. लेकिन एक इंडियन शख्स ने यूरोप और इंडिया की डेली लाइफ की तुलना करते हुए ऐसा नजरिया शेयर किया है, जिस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. उनका कहना है कि यूरोप बाहर से बेहद ब्यूटीफुल दिखाई देता है, लेकिन सेफ्टी, हेल्थकेयर और पॉलिटिकल इनस्टेबिलिटी जैसी प्रॉब्लम्स भी हैं. वहीं इंडिया की कमियों के बावजूद उन्हें यहां फ्यूचर को लेकर ज्यादा एक्साइटमेंट नजर आता है.
यूरोप की खूबसूरती के पीछे छिपी दूसरी तस्वीर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मायुख पांजा ने यूरोप में लाइफ के अपने एक्सपीरियंस और नजरिए को शेयर किया. उन्होंने यूरोप के ब्लू स्काई, ग्रीन स्पेसेज, क्लियर रिवर्स, पुराने कैसल्स, कैफे और पिक्चरस्क टाउन्स का जिक्र किया.लेकिन उनके मुताबिक, किसी कंट्री की ब्यूटी और वहां की डेली लाइफ हमेशा एक जैसी पिक्चर नहीं दिखाती.
पांजा ने लंदन का उदाहरण देते हुए स्ट्रीट पर चाकू से अटैक के खतरे का जिक्र किया. वहीं बर्लिन में होमलेसनेस और ड्रग यूज की प्रॉब्लम की बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि स्पेशलिस्ट डॉक्टर से मिलने या डायग्नोस्टिक स्कैन कराने के लिए अपॉइंटमेंट लेने में कई बार लंबा वेट करना पड़ सकता है.
उन्होंने जर्मनी में एनर्जी क्राइसिस और पॉलिटिकल टर्मॉइल का भी जिक्र किया. साथ ही क्रिसमस मार्केट्स की सिक्योरिटी को लेकर पैदा हुई कंसर्न की बात कही.
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उनका कहना है कि यूरोप के कुछ हिस्सों में लोगों के बीच पास्ट को लेकर एक तरह की नॉस्टैल्जिया दिखाई देती है. उन्हें लगता है कि पहले का टाइम ज्यादा होपफुल था.
इंडिया में प्रॉब्लम्स बहुत हैं, फिर भी...
इंडिया की पिक्चर पेश करते हुए पांजा ने देश की प्रॉब्लम्स को भी गिनाया. उन्होंने पॉल्यूशन, डर्टी रिवर्स, लो-क्वालिटी वॉटर, गार्बेज के पाइल्स और ब्रोकन फुटपाथ का जिक्र किया. इसके बावजूद उनका कहना है कि तमाम दिक्कतों के बावजूद कंट्री किसी तरह वर्क करती है.
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उन्होंने बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद जैसे सिटीज का एग्जांपल दिया. उनके मुताबिक, इन शहरों में डेली लाइफ में किसी अनजान व्यक्ति के चाकू से अटैक करने, लूटने या रैंडमली असॉल्ट करने का डर आम तौर पर उतना महसूस नहीं होता, जितना उन्हें यूरोप के कुछ बड़े सिटीज में नजर आता है.
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उन्होंने इंडिया में स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए एम्प्लॉयमेंट ऑपर्च्युनिटीज, डॉक्टरों तक ईजी एक्सेस और अफॉर्डेबल सर्विसेज को भी देश की स्ट्रेंथ बताया.
इंडिया के फ्यूचर को लेकर क्यों है इतना एक्साइटमेंट?
इस पूरी कंपैरिजन में पांजा का सबसे इंटरेस्टिंग पॉइंट इंडिया के फ्यूचर को लेकर है.उनके मुताबिक इंडिया में लोगों के बीच यह फीलिंग ज्यादा दिखाई देती है कि आने वाले दिन बेहतर हो सकते हैं. उनका मानना है कि देश में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से डेवलप हो रहा है, नए ऑपर्च्युनिटीज क्रिएट हो रहे हैं और चेंज की स्पीड तेज है. यही वजह है कि वह इंडिया को लेकर 'फ्यूचर के लिए एक्साइटेड' नजर आते हैं.
उनके नजरिए में सबसे बड़ा डिफरेंस यही है. यूरोप के कुछ हिस्सों में लोग अपने बेहतर पुराने दिन को मिस कर रहे हैं, जबकि इंडिया में बड़ी संख्या में लोग आने वाले वक्त को लेकर उम्मीद से भरे हैं..
सोशल मीडिया पर लोगों ने उठाया बड़ा सवाल
हालांकि, सोशल मीडिया पर हर कोई इस ओपिनियन से सहमत नहीं था. एक यूजर ने सवाल किया कि अगर इंडिया में लाइफ यूरोप से बेहतर है, तो फिर बड़ी संख्या में इंडियंस यूरोप और अमेरिका जाने का सपना क्यों देखते हैं?
एक दूसरे यूजर ने कहा कि इंसान अक्सर उन कन्वीनियंस को ज्यादा नोटिस करता है जो उसके पास नहीं होतीं. डेली रूटीन की चीजें नॉर्मल लगने लगती हैं और यूनयूजुअल चीजें ज्यादा अट्रैक्टिव लगती हैं.
एक यूजर ने माइग्रेशन पैटर्न का एग्जांपल देते हुए कहा कि आखिरकार लोग अपने फैसलों से भी अपनी प्रेफरेंस जाहिर करते हैं और दूसरे देशों में जाने की डिमांड अभी भी इंडिया से यूरोप और अमेरिका की तरफ ज्यादा है.
कुछ यूजर्स इंडिया के फ्यूचर से सहमत
दूसरी तरफ, कई यूजर्स ने इंडिया को लेकर पांजा की होप से एग्री किया. एक यूजर ने लिखा कि इंडिया में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से डेवलप हो रहा है, क्लीनलिनेस बढ़ रही है और ऑपर्च्युनिटीज भी ग्रो कर रही हैं.
एक दूसरे यूजर ने इस डिबेट को एक लाइन में समेटते हुए कहा कि वेस्ट डाउनवर्ड ट्रैजेक्टरी पर है, जबकि इंडिया अपवर्ड ट्रैजेक्टरी पर जा रहा है. इसी वजह से वेस्ट अपने पास्ट को मिस कर रहा है, जबकि भारतीय भविष्य की तरफ होप के साथ देख रहे हैं.