scorecardresearch
 

... नहीं तो जिन्न पकड़ लेगा! दुबई में भी लोग मानते हैं ऐसे-ऐसे अंधविश्वास

बुर्ज खलीफा और हाईटेक लाइफस्टाइल वाले दुबई की एक पुरानी तस्वीर भी है. यूएई की लोककथाओं में जिन्न, बुरी नजर और रहस्यमयी जीवों से जुड़े ऐसे विश्वास मिलते हैं, जिनमें घर की नींव में नमक डालने से लेकर जिन्न से बचने तक की मान्यताएं शामिल रही हैं.

Advertisement
X
 यूएई की पारंपरिक कहानियों में जिन्न, बुरी नजर और रहस्यमयी जीवों का खूब जिक्र मिलता है (Photo: Pexel)
यूएई की पारंपरिक कहानियों में जिन्न, बुरी नजर और रहस्यमयी जीवों का खूब जिक्र मिलता है (Photo: Pexel)

दुबई को आज आसमान छूती इमारतों, लग्जरी कारों और आधुनिक लाइफस्टाइल के लिए जाना जाता है. दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां और इनोवेटिव दिमाग यहां अपना ठिकाना बना रहे हैं. लेकिन इस आधुनिक यूएई की एक दूसरी तस्वीर भी है, जो सदियों पुरानी लोककथाओं और मान्यताओं से जुड़ी है.

यूएई की पारंपरिक कहानियों में जिन्न, बुरी नजर और रहस्यमयी जीवों का खूब जिक्र मिलता है. हालांकि, इन्हें आज हर अमीराती या दुबई निवासी की मान्यता बताना सही नहीं होगा. ये मुख्य रूप से पुरानी लोकमान्यताओं और मौखिक परंपराओं का हिस्सा हैं.

'नहीं तो जिन्न पकड़ लेगा' 

यूएई की पुरानी लोककथाओं में जिन्न सिर्फ डरावने किरदार नहीं थे. द नेशनल की रिपोर्टों के मुताबिक, इन कहानियों का इस्तेमाल बच्चों को सावधान करने और उन्हें कुछ गलत कामों से रोकने के लिए भी किया जाता था.

अमीराती लोककथाओं को दर्ज करने वाले अब्दुलअजीज अल मुसल्लम ने बताया था कि पुराने समय की कई कहानियों में जिन्न और दूसरे रहस्यमयी जीव आते थे. कई कहानियां डरावनी थीं और बच्चों पर उनका खास असर पड़ता था.

यानी 'जिन्न पकड़ लेगा' जैसी चेतावनी का आधार यूएई की लोककथाओं में जरूर मिलता है, हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर जगह यही शब्द इस्तेमाल किए जाते रहे हों.

Advertisement

घर की नींव में नमक क्यों डालते थे?

यहां एक और हैरान करने वाली मान्यता सामने आती है. द नेशनल की रिपोर्ट में अमीराती इतिहासकार डॉ. हसन अल नबूदा के हवाले से बताया गया है कि कुछ स्थानीय परंपराओं में घर बनाने से पहले उसकी नींव पर नमक छिड़कने और अगरबत्ती जलाने को जिन्न को दूर रखने वाली मान्यता से जोड़ा जाता था.आज इसे वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाता. यह पुरानी लोकमान्यता थी, जो उस दौर की लोगों की सोच और विश्वासों को दिखाती है.

उम्म अल दुवैस कौन थी?

यूएई की सबसे चर्चित लोककथाओं में से एक है उम्म अल दुवैस.द नेशनल के मुताबिक, वह पारंपरिक कहानियों में एक रहस्यमयी और आकर्षक महिला-जिन्न के रूप में सामने आती है. अलग-अलग कहानियों में उसका किरदार अलग तरह से बताया गया है. कुछ कथाओं में वह बेवफा पुरुषों को निशाना बनाती है.

इन कहानियों को सिर्फ डराने के लिए नहीं सुनाया जाता था. इनके जरिए बच्चों और युवाओं को लालच, ईर्ष्या और गलत व्यवहार से बचने की सीख भी दी जाती थी.

समुद्र की भी कहानी

यूएई की पुरानी समुद्री संस्कृति में भी जिन्न की कहानियां मौजूद थीं.बाबा दरिया, यानी 'समुद्र का पिता', ऐसी ही एक मशहूर लोककथा का किरदार है. द नेशनल के मुताबिक, पुराने समय में मछुआरों और मोती खोजने वालों के बीच बाबा दरिया की कहानी सुनाई जाती थी. उसे समुद्र में नाविकों के लिए खतरनाक जिन्न बताया जाता था.

Advertisement

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, बाबा दरिया और उम्म अल दुवैस जैसे किरदार यूएई की पारंपरिक लोककथाओं में इतने मशहूर रहे हैं कि उन्हें आधुनिक दौर में भी किताबों और सांस्कृतिक परियोजनाओं के जरिए दोबारा दर्ज किया गया.

यह भी पढ़ें: दुबई में बिरयानी बनाकर 90 हजार कमाता है शख्स, पूरा पैसा घर भेज देता है... शेफ की कहानी वायरल

एक महल को भी जिन्नों का घर माना गया

जिन्नों से जुड़ी कहानियां सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहीं.रास अल खैमाह के अल कासिमी पैलेस को लेकर भी लंबे समय तक जिन्न और भूतों की कहानियां सुनाई जाती रहीं. द नेशनल की 2020 की रिपोर्ट में बताया गया कि महल के बारे में ऐसी कहानियां थीं कि वहां बच्चों की आवाजें सुनाई देती थीं और अजीब घटनाएं होती थीं.

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वहां रहने वाले सभी लोग इन कहानियों पर विश्वास नहीं करते थे. कुछ स्थानीय लोगों ने इन्हें पूरी तरह खारिज किया. यानी यहां भी विश्वास और संदेह दोनों साथ मौजूद थे.

आखिर ऐसी कहानियां बनीं क्यों?

पुराने समय में जब वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक तकनीक आज जैसी नहीं थी, तब प्राकृतिक घटनाओं और अनजानी चीजों को समझाने के लिए लोककथाओं का बड़ा महत्व था.

शारजाह इंस्टीट्यूट फॉर हेरिटेज के 2026 के प्रकाशन के मुताबिक, लोकविश्वास सांस्कृतिक विरासत का जटिल हिस्सा हैं. इनमें डर, प्रतीक और स्थानीय पर्यावरण के साथ समाज की सोच का संबंध दिखाई देता है. संस्थान ने यह भी बताया कि कुछ लोकविश्वास खत्म हो चुके हैं, जबकि कुछ बदलती जीवनशैली के बावजूद अब भी सांस्कृतिक स्मृति में मौजूद हैं.

Advertisement

इसलिए "नहीं तो जिन्न पकड़ लेगा" जैसी बातें केवल डराने वाली लाइन नहीं थीं. इनके पीछे बच्चों को सावधान करने, सामाजिक व्यवहार सिखाने और पुरानी पीढ़ियों की कहानियों को आगे पहुंचाने की परंपरा भी थी.

आज के दुबई में क्या बचा है?

आज का दुबई बुर्ज खलीफा, मेट्रो, लग्जरी कारों और अत्याधुनिक तकनीक के लिए जाना जाता है. लेकिन आधुनिक शहर के पीछे यूएई की एक ऐसी सांस्कृतिक विरासत भी है, जिसमें रेगिस्तान, समुद्र, जिन्न, बुरी नजर और रहस्यमयी किरदारों की कहानियां शामिल हैं.

इनमें से कई मान्यताएं अब सिर्फ लोककथाओं और सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा हैं, जबकि कुछ विश्वास आज भी अलग-अलग रूपों में दिखाई देते हैं.

यानी दुबई को समझने के लिए सिर्फ उसकी चमचमाती इमारतों को देखना काफी नहीं. इस शहर और पूरे यूएई के अतीत में "जिन्न पकड़ लेगा" जैसी डरावनी चेतावनियों से लेकर समुद्र में घूमते बाबा दरिया तक की एक पूरी लोककथा की दुनिया भी छिपी है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement