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फूल, सजावट और खास विदाई... चीन में पालतू जानवरों के अंतिम संस्कार का लाखों का कारोबार

चीन में पालतू कुत्ते और बिल्लियों को परिवार का सदस्य मानने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसी के साथ पेट फनरल इंडस्ट्री (Pet Funeral Industry) भी तेजी से फैल रही है. लोग अपने पालतू जानवरों को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च कर रहे हैं.

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इस तेजी से बढ़ते कारोबार पर नियम और सरकारी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ( Photo: ITG)
इस तेजी से बढ़ते कारोबार पर नियम और सरकारी निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ( Photo: ITG)

चीन में पालतू जानवरों को परिवार का सदस्य मानने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में जब किसी का प्यारा कुत्ता या बिल्ली मर जाता है, तो मालिक उन्हें आम कचरे की तरह फेंकने के बजाय पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई देना चाहते हैं. इसी बदलती सोच ने चीन में पालतू जानवरों के अंतिम संस्कार (Pet Funeral Industry) को एक तेजी से बढ़ते कारोबार में बदल दिया है. लेकिन इस तेजी से बढ़ते बाजार के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस पूरे क्षेत्र पर सरकारी निगरानी और एक जैसे नियम अभी भी काफी सीमित हैं. 

रिपोर्ट के मुताबिक, मई में चीन के डालियान शहर में एक दंपति अपनी पालतू बिल्ली को अंतिम विदाई देने पहुंचा. यह बिल्ली करीब 8 साल से उनके साथ थी और दिल की बीमारी के कारण उसकी मौत हो गई थी. बिल्ली को विदा करते समय दोनों पति-पत्नी काफी भावुक थे. उन्होंने उसके बालों को आखिरी बार प्यार से संवारा और उसे अपने परिवार का हिस्सा मानते हुए विदाई दी. इसके बाद बिल्ली के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया. ऐसे भावुक दृश्य अब चीन के कई शहरों में पालतू जानवरों के अंतिम संस्कार से जुड़ी जगहों पर देखने को मिल रहे हैं.

इंसानों की तरह हो रही है पालतू जानवरों की विदाई
आज चीन में पालतू जानवरों के अंतिम संस्कार के लिए सिर्फ शव को जलाने की सुविधा ही नहीं मिलती. कई कंपनियां बाकायदा पूरी विदाई की व्यवस्था करती हैं. इसमें फूलों से सजावट, आखिरी बार पालतू जानवर को देखने के लिए अलग कमरा, फोटो और पंजों के निशान को यादगार के तौर पर सुरक्षित रखना जैसी सेवाएं शामिल हैं. कुछ जगहों पर परिवार अपने पालतू जानवर के लिए बाकायदा छोटी-सी अंतिम विदाई सभा भी आयोजित कर सकते हैं. कुछ कंपनियां तो बेहद महंगे पैकेज भी बेच रही हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक, एक हाई-एंड पैकेज की कीमत करीब 1,500 अमेरिकी डॉलर, यानी भारतीय रुपये में लगभग 1.2 से 1.3 लाख रुपये तक हो सकती है. इसमें लिमोजिन से शव को ले जाना और चार वर्दीधारी लोगों द्वारा अंतिम यात्रा जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं. 

क्यों बढ़ रही है ऐसी सेवाओं की मांग?
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इंसान और पालतू जानवरों के बीच बढ़ता इमोशनल रिश्ता है. चीन के शहरों में बहुत से लोग कुत्ते और बिल्लियों को सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह देखते हैं. 2026 में प्रकाशित एक रिसर्च में 504 शहरी पालतू मालिकों का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि पालतू जानवर से भावनात्मक जुड़ाव और उसके साथ महसूस होने वाली नजदीकी का अंतिम संस्कार जैसी सेवाएं लेने के फैसले पर असर पड़ता है. यानी लोगों के लिए यह सिर्फ शव को ठिकाने लगाने का मामला नहीं रह गया है. वे अपने साथी जानवर को सम्मान के साथ आखिरी विदाई देना चाहते हैं.

कारोबार बढ़ा, लेकिन नियमों पर सवाल
सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस तेजी से बढ़ते कारोबार के साथ नियम और निगरानी उसी गति से विकसित नहीं हुए हैं. अलग-अलग जगहों पर लाइसेंस, पशु अवशेषों के निपटारे, पर्यावरण और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से जुड़े नियम अलग हो सकते हैं. इस वजह से ग्राहकों के सामने कई सवाल खड़े होते हैं. उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी अलग से अंतिम संस्कार करने का दावा करती है तो क्या वास्तव में उसी पालतू जानवर का अलग से अंतिम संस्कार किया गया? उसकी राख सही मालिक को दी गई या नहीं? इस्तेमाल की गई भट्ठी और पूरी प्रक्रिया पर्यावरण के नियमों के मुताबिक है या नहीं? चीन में इस क्षेत्र से जुड़ी रिपोर्ट में बिना जरूरी योग्यता के काम करने वाली संस्थाओं, कीमतों में पारदर्शिता की कमी और पर्यावरण से जुड़े सवालों को भी चिंता का विषय बताया गया है. 

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पालतू जानवरों के अंतिम संस्कार का कारोबार बढ़ना इस बात का संकेत है कि लोगों की सोच बदल रही है. वे अपने पालतू जानवरों को परिवार का सदस्य मान रहे हैं और उनकी मौत के बाद भी उन्हें सम्मान देना चाहते हैं. लेकिन इस इमोशनल जरूरत को कारोबार का हिस्सा बनाने के साथ यह भी जरूरी है कि कंपनियों के लिए साफ नियम हों. अंतिम संस्कार की प्रक्रिया, पर्यावरण सुरक्षा, कीमत, राख सौंपने और ग्राहकों के अधिकारों को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए. क्योंकि किसी के लिए यह सिर्फ एक बिजनेस हो सकता है, लेकिन जिस परिवार ने अपना पालतू जानवर खोया है, उसके लिए यह बेहद भावुक और निजी पल होता है. ऐसे में इस बिजनेस में व्यवस्था, भरोसा और पारदर्शिता सबसे ज्यादा जरूरी है.
 

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