अगर आपने कभी गुरुग्राम, नोएडा या किसी बड़े शहर में फ्लैट खरीदने की कोशिश की है, तो बिल्डर का एक वादा जरूर सुना होगा- क्लब हाउस, पार्क, बच्चों का प्ले एरिया, जॉगिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक और हरियाली. इन्हीं सुविधाओं के नाम पर फ्लैट की कीमत लाखों नहीं, कई बार 1 करोड़ से 5 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है.लेकिन क्या हो अगर यही सुविधाएं बिना किसी महंगी सोसायटी में घर खरीदे, हर आम आदमी को मिल जाएं?
यही सवाल कनाडा पहुंचे दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट एक्सपर्ट अरुण प्रकाश ने अपने वायरल वीडियो में उठाया है. 20 साल से प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े अरुण का कहना है कि सिर्फ एक हफ्ते की कनाडा यात्रा ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया.
उन्होंने इंस्टाग्राम पर शेयर किए वीडियो में कहा कि मैं पिछले एक हफ्ते से कनाडा में हूं. यहां चौड़ी फुटपाथ, बच्चों के खेलने के पार्क, साइकिल ट्रैक, स्पोर्ट्स एरिया और कम्युनिटी स्पेस जैसी सुविधाएं हर मोहल्ले में हैं. भारत में यही चीजें गुरुग्राम और दूसरे शहरों की प्रीमियम गेटेड सोसायटी का सबसे बड़ा सेलिंग पॉइंट बन जाती हैं.
वीडियो में साफ दिखता है कि बच्चे खुले पार्क में खेल रहे हैं, लोग आराम से पैदल घूम रहे हैं. बुजुर्ग बिना किसी डर के वॉक कर रहे हैं. अरुण कहते हैं कि यहां पूरा मोहल्ला ही घर का हिस्सा लगता है.
भारत के लोग इस बात से क्यों जुड़ रहे हैं?
वीडियो पर कई लोगों ने गुरुग्राम का भी जिक्र किया. उनका कहना था कि वहां अच्छी सड़क, हरियाली, साफ फुटपाथ और बच्चों के खेलने की सुरक्षित जगह जैसी सुविधाएं हर किसी को नहीं मिलतीं. इसके लिए अक्सर महंगी गेटेड सोसायटी में फ्लैट खरीदना पड़ता है. कई लोग करोड़ों रुपये का होम लोन लेते हैं, ताकि उन्हें बेहतर माहौल और सुविधाएं मिल सकें.अरुण का कहना है कि विकसित देशों में ऐसी सुविधाएं किसी एक सोसायटी की नहीं, बल्कि पूरे शहर की होती हैं. यानी चाहे कोई अमीर हो या मध्यम वर्ग का हो. हर किसी के हिस्से में साफ पार्क है. फुटपाथ और सार्वजनिक जगहों का बराबर इस्तेमाल करने का मौका है.
देखें वायरल वीडियो
क्या भारत भी बदल रहा है?
अरुण मानते हैं कि भारत में भी बदलाव शुरू हुआ है. नए रिहायशी प्रोजेक्ट पहले के मुकाबले वॉकिंग ट्रैक, हरियाली और कम्युनिटी स्पेस पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. लेकिन उनका मानना है कि असली बदलाव तब होगा, जब ये सुविधाएं सिर्फ सोसायटी की चारदीवारी तक सीमित न रहें, बल्कि पूरे शहर की पहचान बनें.
भारत में पहले साफ हवा तो मिले
वीडियो पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई. एक यूजर ने लिखा कि भारत में पहले साफ हवा चाहिए. अगर हवा ही खराब होगी तो पार्क और वॉकिंग ट्रैक का क्या फायदा? दूसरे ने लिखा कि कनाडा में पार्क और हरियाली कोई लग्जरी नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है.वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि भारत में ऐसी लाइफस्टाइल खरीदने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि वहां यह सामान्य बात है.
हालांकि कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सिर्फ सरकार को दोष देना सही नहीं है. अगर अच्छी सुविधाएं बनेंगी, तो उनकी देखभाल करना भी लोगों की जिम्मेदारी होगी.
कनाडा और भारत में क्या है फर्क
कई यूजर्स ने लिखा कि भारत और कनाडा की तुलना पूरी तरह आसान नहीं है. कनाडा की आबादी करीब 4 करोड़ है और उसका क्षेत्रफल लगभग 99.8 लाख वर्ग किलोमीटर है. वहीं भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है, जबकि क्षेत्रफल करीब 32.9 लाख वर्ग किलोमीटर है. यानी भारत में कम जमीन पर कहीं ज्यादा लोग रहते हैं.
वहीं कनाडा और अमेरिका जैसे देशों के पास प्रति व्यक्ति अधिक जमीन, अपेक्षाकृत ज्यादा प्राकृतिक संसाधन और लंबे समय से विकसित शहरी ढांचा है. इसलिए वहां पार्क, फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और खुले सार्वजनिक स्थान विकसित करना अपेक्षाकृत आसान रहा है. हालांकि यूजर्स का कहना था कि भारत के शहरों में भी सार्वजनिक सुविधाओं और हरियाली पर पहले से ज्यादा निवेश और बेहतर योजना की जरूरत है.
यही वजह है कि यह वीडियो सिर्फ कनाडा की तारीफ नहीं कर रहा, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में रहने वाले उन लाखों लोगों का सवाल भी उठा रहा है, जो महंगा घर खरीदने के बाद भी बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं.