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बुर्ज खलीफा की 80वीं मंजिल पर रहने वालों की कैसी होती है जिंदगी?

बुर्ज खलीफा की 80वीं मंजिल पर घर होना सिर्फ लग्जरी लाइफस्टाइल नहीं, बल्कि जमीन से सैकड़ों मीटर ऊपर रोजमर्रा की जिंदगी जीने का अलग अनुभव है. यहां से दुबई का नजारा, हवा, पॉल्यूशन और शहर की रफ्तार- सब कुछ जमीन से बिल्कुल अलग महसूस हो सकता है.

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जमीन से सैकड़ों मीटर ऊपर हवा का अनुभव भी अलग होता है (Photo: Pexel)
जमीन से सैकड़ों मीटर ऊपर हवा का अनुभव भी अलग होता है (Photo: Pexel)

रात का वक्त हो और आप अपने घर की खिड़की से बाहर देखें तो सड़क पर दौड़ती गाड़ियां और चमकती इमारतें दिखाई देती हैं. लेकिन जरा सोचिए, अगर आपका घर दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की 80वीं मंजिल पर हो तो नीचे का दुबई कैसा दिखाई देगा? आइये इस सवाल का जवाब जानते हैं.

भारत की शु्भ्रा भारद्वाज बुर्ज खलीफा की 80वीं मंजिल पर रहती हैं. अप्रैल 2025 में उनके घर का होम टूर फाइनेंस विद शरण के यूट्यूब चैनल पर सामने आया था. इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ने भी उनके घर और जिंदगी पर रिपोर्ट की.

खिड़की से नीचे पूरा शहर!

बुर्ज खलीफा की ऊंचाई से दुबई का नजारा जमीन से बिल्कुल अलग हो जाता है. दिन में इमारतों और सड़कों का विशाल नेटवर्क दिखाई देता है, जबकि रात में पूरा शहर रोशनी से जगमगाता नजर आता है. यानी यहां रहने वाले व्यक्ति के लिए दुबई का स्काईलाइन कोई टूरिस्ट स्पॉट नहीं, बल्कि रोज की जिंदगी का हिस्सा है.इतनी ऊंचाई पर खड़े होकर नीचे का शहर देखने पर एक अजीब फर्क महसूस होता है. जमीन पर जहां ट्रैफिक और लोगों की आवाजाही लगातार दिखाई देती है, वहीं ऊपर से वही शहर काफी शांत और दूर नजर आता है. 

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लिफ्ट की स्पीड सुनकर चौंक जाएंगे

बुर्ज खलीफा में ऊपर-नीचे जाना भी अपने आप में अनुभव है. गूगल के बुर्ज खलीफा स्ट्रीट व्यू के मुताबिक, यहां की लिफ्ट करीब 35 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है. सोचिए, जिस इमारत में आपका घर जमीन से सैकड़ों मीटर ऊपर हो, वहां रोज घर से बाहर निकलना भी सामान्य अपार्टमेंट की तुलना में बिल्कुल अलग रूटीन होगा.

घर से दुबई मॉल तक कनेक्शन

बुर्ज खलीफा में रहने वालों के लिए एक और खास सुविधा है. ईमार की जानकारी के मुताबिक, इमारत से दुबई मॉल तक सीधे पहुंच उपलब्ध है.यानी दुनिया के सबसे बड़े शॉपिंग और एंटरटेनमेंट डेस्टिनेशन में से एक तक पहुंचने के लिए आपको सामान्य तरीके से सड़क पर निकलने की जरूरत नहीं पड़ती.

80वीं मंजिल पर हवा कैसी होती है?

जमीन से सैकड़ों मीटर ऊपर हवा का अनुभव भी अलग होता है. बुर्ज खलीफा को तेज हवाओं के दबाव को झेलने के लिए खास तरीके से डिजाइन किया गया है. इसकी वाई-आकार की संरचना हवा को सीधे पूरी इमारत पर दबाव डालने से रोकने में मदद करती है. यानी बाहर हवा काफी तेज हो सकती है, लेकिन घर के अंदर बैठा व्यक्ति किसी खुले पहाड़ या छत की तरह हवा के थपेड़े महसूस नहीं करता. इतना ही नहीं, इतनी ऊंचाई पर इमारत का बहुत हल्का हिलना भी डिजाइन का हिस्सा हो सकता है.

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80वीं मंजिल पर पॉल्यूशन कितना होता है?

इतनी ऊंचाई पर रहने का एक दिलचस्प पहलू हवा की क्वालिटी भी है. जमीन के पास गाड़ियों, सड़क की धूल और दूसरी स्थानीय गतिविधियों से निकलने वाले प्रदूषक ज्यादा सीधे असर डाल सकते हैं. ऊंचाई बढ़ने पर हवा का मिश्रण और प्रदूषकों का फैलाव बदल जाता है, इसलिए किसी ऊंची मंजिल पर हवा की क्वालिटी जमीन से अलग हो सकती है.

आखिर ऐसी जिंदगी कैसी लगती है?

सुबह खिड़की से नीचे फैला दुबई, शाम को बदलता आसमान और रात में हजारों रोशनियों से जगमगाता शहर- यह सब किसी होटल में एक रात रुकने का अनुभव नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है.

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