अरहर दाल (Arhar Dal), जिसे कई जगहों पर तूर दाल या तुअर दाल के नाम से भी जाना जाता है, भारत में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली दालों में से एक है. यह Cajanus cajan नामक पौधे से प्राप्त होती है और देश के कई राज्यों में इसकी खेती की जाती है. अरहर दाल भारतीय खानपान और कृषि व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है.
भारत में अरहर की खेती मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और तेलंगाना जैसे राज्यों में होती है. यह फसल आमतौर पर खरीफ मौसम में बोई जाती है और इसकी कटाई सर्दियों के दौरान की जाती है. किसानों के लिए यह एक प्रमुख नकदी फसल भी मानी जाती है.
अरहर दाल का रंग हल्का पीला होता है और इसे पकाने के बाद इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में किया जाता है. भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है. उत्तर भारत में अरहर की दाल साधारण तड़के के साथ बनाई जाती है, जबकि दक्षिण भारत में इसका उपयोग सांभर जैसे पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है.
भारतीय बाजारों में अरहर दाल कई रूपों में उपलब्ध होती है, जैसे साबुत अरहर, छिलके वाली अरहर और धुली हुई अरहर दाल. घरेलू उपयोग के साथ-साथ होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य उद्योगों में भी इसका व्यापक इस्तेमाल होता है.
अरहर दाल का व्यापार देश के विभिन्न कृषि मंडियों के माध्यम से होता है. इसकी कीमत उत्पादन, मौसम, मांग और आपूर्ति जैसे कारकों के आधार पर बदलती रहती है. सरकार भी समय-समय पर इसके उत्पादन और उपलब्धता को लेकर विभिन्न नीतियां बनाती है.
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