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15 किलो वजन उठाते ही लड़खड़ाया, रोबोट की मौत का वीडियो के पीछे का सच क्या है?

चीन रोबोट्स का चैंपियनशिप आयोजित कर रहा है. वर्ल्ड ह्यूमनॉयड रोबोट्स का ये दूसरा सीजन है. इस दौरान रोबोट्स ने कई रिकॉर्ड तोड़े हैं. एक ऐसा भी मामला आया जिसमें देखा जा सकता है कि कैसे रोबोट वजन उठाते ही लड़खड़ा कर जजेज की टेबल तक पहुंच गया.

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वेटलिफ्टिंग में लड़खड़ाया रोबोट
वेटलिफ्टिंग में लड़खड़ाया रोबोट

क्या कोई रोबोट इंसानों से तेज दौड़ सकता है? चीन में चल रहे World Humanoid Robot Games ने इसका जवाब हां में दिया है. यहां ह्यूमनॉइड रोबोट 100 मीटर दौड़ में इंसानों के रिकॉर्ड को चुनौती दे रहे हैं. उसैन बोल्ट को पीछे छोड़ चुके हैं रोबोट्स. लेकिन इसी आयोजन से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने लोगों को यह भी याद दिला दिया कि रोबोटिक्स की दुनिया अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं हुई है. सोशल मीडिया पर रोबोट की मौत बता कर वीडियोज काफी वायरल हो रहे हैं. 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक इंसान जैसा दिखने वाला ह्यूमनॉइड रोबोट वेटलिफ्टिंग करता नजर आता है. उसके सामने बारबेल रखा है और रोबोट उसे उठाने की कोशिश करता है. शुरुआत में ऐसा लगता है कि सब कुछ ठीक चल रहा है, लेकिन कुछ ही सेकंड में उसका बैलेंस बिगड़ जाता है. वजन संभालना मुश्किल हो जाता है और रोबोट अनियंत्रित होकर आगे की तरफ बढ़ने लगता है.

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चीन में चल रहा है रोबोट चैंपियनशिप

मामला यहीं खत्म नहीं होता. वीडियो में रोबोट लड़खड़ाते हुए जजों की टेबल की तरफ पहुंच जाता है और टकरा जाता है. इसके बाद अधिकारियों को बीच में आना पड़ता है. सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को काफी शेयर कर रहे हैं और मजाकिया कमेंट्स की भी बाढ़ आ गई है. कुछ यूजर्स ने लिखा कि रोबोट ने वजन उठाने के बाद 'एरर पर एरर' दिखाना शुरू कर दिया.

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हालांकि इस वायरल वीडियो को सिर्फ मजेदार फेलियर के तौर पर देखना पूरी कहानी नहीं है. यही वजह है कि World Humanoid Robot Games जैसे मुकाबले आयोजित किए जा रहे हैं. यहां रोबोट्स को सिर्फ दौड़ने या डांस करने के लिए नहीं, बल्कि मुश्किल हालात में अपना बैलेंस बनाए रखने और असली दुनिया जैसे काम करने के लिए भी टेस्ट किया जा रहा है.

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वेटलिफ्टिंग में रोबोट के लिए चुनौती सिर्फ वजन उठाने की नहीं होती. उसे अपने शरीर का बैलेंस बनाए रखना होता है. जैसे ही हाथों में वजन आता है, रोबोट का सेंटर ऑफ बैलेंस बदल जाता है.

ये चैंपियनशिप रोबोट्स का टेस्टिंग ग्राउंड

उसके पैरों, कमर, मोटर और कंट्रोल सिस्टम को एक साथ काम करना पड़ता है. इंसान के लिए 15 किलो वजन शायद बहुत ज्यादा न लगे, लेकिन दो पैरों पर खड़े एक ह्यूमनॉइड रोबोट के लिए उसे उठाकर स्टेबल रहना काफी मुश्किल काम हो सकता है.

दिलचस्प बात यह है कि इसी कंपटीशन में एक रोबोट ने 16 किलो वजन उठाकर ह्यूमनॉइड वेटलिफ्टिंग का पहला खिताब भी जीता है. यानी एक तरफ रोबोट्स रिकॉर्ड बना रहे हैं और दूसरी तरफ कुछ मशीनें बैलेंस खोकर गिर रही हैं. यही अंतर फिलहाल ह्यूमनॉइड रोबोट टेक्नोलॉजी की असली तस्वीर दिखाता है. 

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यह दूसरा वर्ल्ड ह्यूमनॉयड रोबोट गेम्स है, जो बीजिंग में 22 अगस्त से 26 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है. इसमें 16 देशों और क्षेत्रों की 666 टीमें हिस्सा ले रही हैं और कुल 2,056 रोबोट अलग-अलग मुकाबलों में उतरे हैं. यहां 51 तरह के इवेंट रखे गए हैं. इनमें दौड़, फुटबॉल और टेबल टेनिस जैसे खेलों के साथ-साथ फैक्ट्री, होटल, घर और दूसरी जगहों पर होने वाले कामों से जुड़े टेस्ट भी शामिल हैं. 

इसी प्रतियोगिता में रोबोट्स ने स्पीड के मामले में भी बड़ी उपलब्धि हासिल की है. चीन के Tiangong Ultra ने 100 मीटर की दौड़ 9.39 सेकंड में पूरी की, जो उसैन बोल्ट के 9.58 सेकंड के विश्व रिकॉर्ड से तेज है. लेकिन तेज दौड़ने के बाद रोबोट्स का रुकना और मुश्किल सिचुएशन में कंट्रोल बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. 

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