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जर्मनी रोया... पराग्वे मुस्कुराया, विश्व कप में लिखी गई सबसे बड़ी कहानी

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में पराग्वे ने सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए चार बार के चैम्पियन जर्मनी को नॉकआउट मुकाबले में हराकर बाहर कर दिया. 2010 में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना अब तक पराग्वे के फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता था, लेकिन जर्मनी जैसी महाशक्ति को विश्व कप से बाहर कर उसने उससे भी बड़ा इतिहास रच दिया.

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ऑरलैंडो गिल की कप्तानी में पराग्वे ने रचा इतिहास. (Photo, Getty)
ऑरलैंडो गिल की कप्तानी में पराग्वे ने रचा इतिहास. (Photo, Getty)

विश्व फुटबॉल में कुछ रातें ऐसी होती हैं, जो सिर्फ एक मैच का नतीजा नहीं बदलतीं, बल्कि किसी देश की पहचान हमेशा के लिए बदल देती हैं. फीफा विश्व कप 2026 में पराग्वे ने जर्मनी को हराकर ऐसी ही एक ऐतिहासिक रात अपने नाम कर ली.

चार बार का विश्व चैम्पियन जर्मनी इस विश्व कप में अपनी खोई हुई साख वापस पाने उतरा था. 2018 और 2022 में लगातार ग्रुप स्टेज से बाहर होने के बाद टीम से वापसी की उम्मीद थी. लेकिन 2026 में भी तस्वीर नहीं बदली. नॉकआउट राउंड की पहली चुनौती ही जर्मनी के लिए आखिरी साबित हुई. लगातार तीसरे विश्व कप में वह ऐसा असर छोड़ने में नाकाम रहा, जिसकी उससे उम्मीद की जाती है.

वहीं, पराग्वे के लिए यह जीत सिर्फ अगले दौर में पहुंचने भर की नहीं थी. 2010 विश्व कप में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना अब तक उसके फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता था, लेकिन 16 साल बाद इस टीम ने उस सुनहरी याद को भी पीछे छोड़ दिया. विश्व फुटबॉल की सबसे सफल और प्रतिष्ठित टीमों में शामिल जर्मनी को सबसे बड़े मंच पर हराकर पराग्वे ने अपने फुटबॉल इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय लिख दिया.

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120 मिनट तक जर्मनी की हर चुनौती का डटकर सामना

कप्तान ऑरलैंडो गिल की शानदार अगुआई में पराग्वे ने चार बार के विश्व चैम्पियन जर्मनी को पूरे 120 मिनट तक बांधे रखा. निर्धारित 90 मिनट और अतिरिक्त समय के बाद भी दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर रहीं. इसके बाद मुकाबले का फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ, जहां पराग्वे ने जबरदस्त संयम दिखाते हुए जर्मनी को 4-3 से हरा दिया.

आखिरी पेनल्टी गोल होते ही पराग्वे ने सिर्फ अगले दौर में जगह नहीं बनाई, बल्कि अपने फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी और सबसे गौरवशाली रात भी लिख दी. विश्व फुटबॉल की महाशक्ति माने जाने वाले जर्मनी को विश्व कप से बाहर करना पराग्वे की अब तक की सबसे महान उपलब्धि बन गया.

मैच के निर्णायक क्षण में कैनाले ने जब विजयी पेनल्टी गोल में बदली, तो एक ओर जर्मन खिलाड़ी स्तब्ध होकर मैदान पर बैठ गए, जबकि दूसरी ओर पराग्वे के खिलाड़ियों और समर्थकों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. उन्हें एहसास था कि वे सिर्फ एक बड़ी जीत का जश्न नहीं मना रहे, बल्कि अपने देश के फुटबॉल इतिहास का सबसे गौरवशाली पल जी रहे हैं.

जर्मनी के लिए यह हार आत्ममंथन का विषय होगी. लेकिन पराग्वे के लिए यह जीत हमेशा उस रात के रूप में याद की जाएगी, जब उसने विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर एक महाशक्ति को झुकाकर अपनी सबसे महान कहानी लिख दी.
 

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