2022 में लियोनेल मेसी के सिर पर विश्व चैम्पियन का ताज था. कतर के लुसैल स्टेडियम में उन्होंने सिर्फ विश्व कप ट्रॉफी नहीं उठाई थी, बल्कि बरसों की आलोचनाओं, अधूरेपन और हार के हर ताने को हमेशा के लिए खामोश कर दिया था. वह रात मेसी के करियर की नहीं, उनकी मुक्ति की रात थी.
चार साल बाद, 2026 में वही विश्व कप ट्रॉफी फिर उनके सामने थी. फर्क सिर्फ इतना था कि इस बार वह उनके हाथों तक नहीं पहुंच सकी. चेहरे की मुस्कान की जगह मायूसी थी, आंखों में जीत की चमक नहीं, हार की नमी थी.
जिस खिलाड़ी ने 2022 में पूरी दुनिया को खुशी के आंसू दिए थे, 2026 में वही हार के आंसुओं के साथ मैदान से लौट रहा था. शायद फुटबॉल इसी का नाम है...यह अपने सबसे बड़े नायकों की कहानी भी हमेशा उनकी इच्छा के मुताबिक खत्म नहीं होने देता. लेकिन क्या इस हार से मेसी की महानता पर कोई फर्क पड़ता है? जवाब है- बिल्कुल नहीं.
Gracias por todo.
El legado será eterno, ídolo. Te amamos. pic.twitter.com/VSRPXr7Xm8— Team Leo Messi (@TeamLeoM) July 19, 2026
मेसी की कहानी ट्रॉफियों से कहीं बड़ी है
विश्व कप जीतने वाले कई खिलाड़ी आए और चले गए, लेकिन करीब दो दशक तक अर्जेंटीना की सबसे बड़ी उम्मीद बने रहना... सिर्फ लियोनेल मेसी जैसे खिलाड़ियों के हिस्से आता है.
39 साल के मेसी ने अपने करियर में 9 बड़े अंतरराष्ट्रीय फाइनल खेले. इनमें तीन विश्व कप, पांच कोपा अमेरिका और एक फाइनलिसिमा फाइनल शामिल हैं. इतने लंबे समय तक किसी खिलाड़ी का अपनी टीम को बार-बार खिताबी मुकाबले तक पहुंचाना ही उसकी महानता का सबसे बड़ा प्रमाण है.
हां, इनमें से पांच फाइनल वह हार गए. लेकिन सवाल यह भी है कि आखिर कितने खिलाड़ी बार-बार अपनी टीम को फाइनल तक पहुंचा पाते हैं?
जब मेसी हारते थे, पूरा अर्जेंटीना टूट जाता था
2014 विश्व कप फाइनल, फिर 2015 और 2016 के लगातार दो कोपा अमेरिका फाइनल. हर हार के बाद आलोचना बढ़ती गई. अर्जेंटीना में सवाल उठने लगे कि क्या मेसी कभी डिएगो माराडोना की बराबरी कर पाएंगे?
2016 की हार के बाद मेसी इतने टूट गए कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की घोषणा कर दी. उस समय लगा कि शायद उनकी कहानी कभी पूरी नहीं हो पाएगी. लेकिन महान खिलाड़ी वहीं अलग साबित होते हैं, जहां बाकी लोग हार मान लेते हैं.
आखिरकार मेसी लौटे और लौटकर सिर्फ खेले नहीं, इतिहास बदल दिया. 2021 में अर्जेंटीना को 28 साल बाद कोपा अमेरिका जिताया. 2022 में 36 साल का विश्व कप इंतजार खत्म कराया. इसके बाद फाइनलिसिमा और एक और कोपा अमेरिका जीतकर उन्होंने उस टीम को विजेता बना दिया, जिसे कभी 'फाइनल में हारने वाली टीम' कहा जाता था.
यही वह दौर था जिसने मेसी को सिर्फ महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि अर्जेंटीना के इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल कर दिया.
2026 की हार विरासत तय नहीं करती
हर महान खिलाड़ी के करियर में एक आखिरी मैच आता है. कुछ के हिस्से ट्रॉफी आती है, कुछ के हिस्से आंसू.
मेसी की विदाई शायद उनकी इच्छा के मुताबिक नहीं हुई. लेकिन खेल का इतिहास आखिरी मैच से नहीं लिखा जाता.
अगर ऐसा होता, तो डिएगो माराडोना को दुनिया 1990 के फाइनल की हार से याद करती, 1986 की जीत से नहीं.
मेसी के साथ भी शायद यही होगा. आने वाली पीढ़ियां 2026 की हार से ज्यादा 2022 की वह सुनहरी रात याद रखेंगी, जब उन्होंने अर्जेंटीना को 36 साल बाद विश्व चैम्पियन बनाया था.
हारकर भी क्यों जीत गए मेसी?
क्योंकि उन्होंने अर्जेंटीना को वर्षों से चला आ रहा हार का डर भुलाने में बड़ी भूमिका निभाई. मेसी ने उस पीढ़ी को ट्रॉफी जिताई, जिसने वर्षों तक बड़े टूर्नामेंटों में हार का दर्द झेला था. उन्होंने आलोचनाओं का जवाब मैदान पर दिया. उन्होंने साबित किया कि महानता सिर्फ रिकॉर्ड बनाने में नहीं, बल्कि बार-बार गिरकर फिर खड़े होने में होती है.
इसीलिए 2026 की हार उनकी विरासत को छोटा नहीं करती. बल्कि यह याद दिलाती है कि महान खिलाड़ी भी इंसान होते हैं. वे भी रोते हैं, टूटते हैं, हारते हैं. लेकिन इतिहास उन्हें उनकी आखिरी हार से नहीं, सबसे बड़ी जीत से याद रखता है.
और मेसी की सबसे बड़ी जीत सिर्फ 2022 का विश्व कप नहीं है. उनकी सबसे बड़ी जीत यह है कि उन्होंने अर्जेंटीना को फिर से यकीन दिलाया कि वह विश्व विजेता बन सकता है. शायद इसलिए 2026 में उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन फुटबॉल की दुनिया की नजरों में वह पहले से कहीं ज्यादा महान हो चुके थे.