आईपीएल में तूफान मचाने से लेकर कुछ ही महीनों में देश का सबसे चर्चित युवा क्रिकेटर बनने तक वैभव सूर्यवंशी का सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा रहा है. लेकिन अब कहानी का सबसे कठिन अध्याय शुरू हो चुका है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट किसी की उम्र नहीं, सिर्फ उसकी तैयारी को परखता है.
यही वजह है कि अगर कोई यह मान रहा है कि जिम्बाब्वे पहुंचते ही वैभव सूर्यवंशी फिर से चौके-छक्कों की बारिश कर देंगे, तो वह शायद इस चुनौती को हल्के में ले रहा है. हरारे में होने वाले तीन टी20 मुकाबले इंग्लैंड जितने तेज और उछाल भरे भले न हों, लेकिन यहां भी उनकी परीक्षा उतनी ही कठिन होने वाली है.
IPL का तूफान, इंटरनेशनल क्रिकेट की हकीकत
आईपीएल में वैभव की सबसे बड़ी ताकत थी निडर बल्लेबाजी. पहली गेंद से हमला, गेंदबाजों पर दबाव और छक्कों की बरसात. लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में विरोधी टीमों के पास वीडियो एनालिस्ट, डेटा और स्पष्ट रणनीति होती है. एक बार आपकी कमजोरी पकड़ में आ गई, तो फिर वही गेंदबाजी बार-बार देखने को मिलती है. इंग्लैंड दौरे ने यही दिखाया.
इंग्लैंड दौरे पर वैभव ने 14, 13 और 15 रन की पारियां खेलीं. इन छोटी पारियों के बावजूद उन्होंने जोफ्रा आर्चर और जोश टंग जैसे तेज गेंदबाजों के खिलाफ अपनी ताकत का एहसास भी कराया. लेकिन इसी दौरे ने यह भी दिखा दिया कि केवल आक्रामकता के दम पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार सफलता हासिल नहीं की जा सकती.
... सबसे बड़ी चुनौती- धैर्य और शॉर्ट बॉल
वैभव की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ रन बनाना नहीं, बल्कि बड़ी पारी खेलने का धैर्य विकसित करना है. उपमहाद्वीप की सपाट पिचों और छोटी बाउंड्री पर जिस अंदाज से बल्लेबाजी सफल होती है, वही तरीका हर विदेशी परिस्थिति में काम नहीं करता. वहां पहले हालात को समझना पड़ता है, फिर अपने शॉट्स खेलने होते हैं.
दूसरी चुनौती शॉर्ट पिच गेंदें हैं. इंग्लैंड में दो बार उछाल लेती गेंदों ने उन्हें परेशान किया. आईपीएल और श्रीलंका की त्रिकोणीय सीरीज में भी कई मौकों पर यही कमजोरी सामने आई थी. अब विरोधी टीमों के पास वैभव के खिलाफ एक साफ रणनीति है- शरीर पर तेज गेंदें और लगातार बाउंसर.
अब असली सवाल यह नहीं है कि उनकी कमजोरी क्या है. सवाल यह है कि क्या उन्होंने उससे कुछ सीखा है?
जिम्बाब्वे को हल्के में लेना भूल होगी
भारतीय क्रिकेट में अक्सर जिम्बाब्वे को आसान प्रतिद्वंद्वी मान लिया जाता है. लेकिन मौजूदा जिम्बाब्वे पहले जैसी टीम नहीं है. उसने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी टीमों को कड़ी टक्कर दी है और मौके मिलने पर उलटफेर भी किए हैं.
ब्लेसिंग मुजरबानी की अतिरिक्त उछाल, रिचर्ड नगरावा की रफ्तार, ब्रैड इवांस की विविधता और कप्तान सिकंदर रजा का अनुभव किसी भी युवा बल्लेबाज की परीक्षा लेने के लिए काफी है. ऐसे गेंदबाजी आक्रमण के सामने वैभव के लिए रन बनाना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा.
हरारे में चाहिए समझदारी, सिर्फ ताकत नहीं
हरारे की परिस्थितियां इंग्लैंड जैसी नहीं हैं, लेकिन भारत जैसी भी नहीं. इसलिए यहां वैभव को सिर्फ अपनी ताकत पर नहीं, अपनी समझ पर भी भरोसा करना होगा.
अगर वह शुरुआती कुछ ओवर विकेट पर बिताते हैं, गेंद की गति और उछाल को समझते हैं और उसके बाद अपने स्वाभाविक आक्रामक खेल की ओर बढ़ते हैं, तो सफलता की संभावना कहीं ज्यादा होगी. लेकिन अगर शुरुआत से ही हर गेंद को स्टैंड में भेजने की कोशिश करेंगे, तो विरोधी गेंदबाज उनकी जल्दबाजी का फायदा उठा सकते हैं.
जिम्बाब्वे दौरा सिर्फ एक और टी20 सीरीज नहीं है. यह वैभव के क्रिकेटिंग विकास का अगला पड़ाव है.
तीन टी20 मैच वैभव का करियर तय नहीं करेंगे. लेकिन ये मुकाबले कई सवालों के जवाब जरूर देंगे.
- क्या उन्होंने शॉर्ट बॉल के खिलाफ तैयारी की है?
- क्या अब वह परिस्थिति के हिसाब से बल्लेबाजी कर सकते हैं?
- क्या वह सिर्फ छक्के लगाने वाले बल्लेबाज हैं या मैच बनाकर खत्म करने वाले खिलाड़ी भी?
यह सीरीज टीम इंडिया की भी परीक्षा है
यह दौरा सिर्फ वैभव सूर्यवंशी के लिए अहम नहीं है. यह भारतीय टीम प्रबंधन के लिए भी एक परीक्षा है कि वह युवा खिलाड़ियों को किस तरह तैयार करना चाहता है.
15 साल के खिलाड़ी से हर मैच में बड़ी पारी की उम्मीद करना उचित नहीं होगा. उससे ज्यादा जरूरी यह देखना है कि वह अपनी गलतियों से कितनी तेजी से सीखता है और टीम प्रबंधन उसे कितना भरोसा देता है. कप्तान श्रेयस अय्यर और अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण की भूमिका भी यहां बेहद अहम रहने वाली है.