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'वैभव सूर्यवंशी को सफलता नहीं, नाकामी के लिए करो तैयार', पैडी अप्टन ने बेबी बॉस को दी कड़ी चेतावनी

भारत के पूर्व मेंटल कंडीशनिंग कोच पैडी अप्टन का मानना है कि वैभव सूर्यवंशी की सबसे बड़ी चुनौती बल्लेबाजी नहीं बल्कि शोहरत, दबाव और बाहरी शोर से निपटना होगी. अप्टन ने कहा कि युवा बल्लेबाज को सफलता नहीं, बल्कि असफलता के लिए तैयार करना जरूरी है. उन्होंने परिवार, सोशल सर्कल और बढ़ती अपेक्षाओं को भी बड़ा जोखिम बताया.

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'अगला सचिन' कहकर मत दबाओ बोझ, वैभव को लेकर पैडी अप्टन की दो टूक (Photo: ITG)
'अगला सचिन' कहकर मत दबाओ बोझ, वैभव को लेकर पैडी अप्टन की दो टूक (Photo: ITG)

आईपीएल 2026 में धमाकेदार प्रदर्शन कर ऑरेंज कैप जीतने से लेकर भारतीय सीनियर टीम में पहली बार जगह बनाने तक, 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का सफर पिछले कुछ हफ्तों में बेहद तेजी से आगे बढ़ा है. जहां वैभव हाल में ट्राई नेशन सीरीज में वैसा जलवा नहीं द‍िखा पाएं ज‍िसके लिए वो जाने जाते हैं. लेकिन भारत के पूर्व मेंटल कंडीशनिंग कोच पैडी अप्टन का मानना है कि वैभव की असली परीक्षा मैदान पर नहीं, बल्कि मैदान के बाहर शुरू होने वाली है.

भारत की 2011 वर्ल्ड कप विजेता टीम और ओलंपिक पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के साथ काम कर चुके अप्टन ने कहा कि वैभव में बड़े मौकों पर प्रदर्शन करने की मानसिकता पहले से मौजूद है. आईपीएल में उनके प्रदर्शन ने यह साबित भी किया है. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि कोई भी खिलाड़ी हमेशा शानदार फॉर्म में नहीं रह सकता और वैभव को भी जल्द या देर से खराब दौर का सामना करना पड़ेगा.

अप्टन के मुताबिक अगर वह वैभव के साथ काम कर रहे होते तो सबसे पहले उन्हें असफलता के लिए तैयार करते. उनका कहना है कि आईपीएल में वैभव का फॉर्म बेहद शानदार रहा, लेकिन यह उम्मीद करना अवास्तविक होगा कि वह सिलसिला लगातार जारी रहेगा. ऐसे में कुछ कम स्कोर, खराब पारियां और उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिलने की संभावना को सामान्य मानकर स्वीकार करना जरूरी है.

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उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि खराब दौर आएगा या नहीं, बल्कि यह है कि वह दौर कितने समय तक चलेगा और वैभव उससे कितनी जल्दी बाहर निकल पाएंगे. अप्टन के अनुसार किसी खिलाड़ी के करियर में असफलता समस्या नहीं होती, बल्कि उस असफलता पर उसकी प्रतिक्रिया करियर की दिशा तय करती है.

इस समय श्रीलंका के दांबुला में चल रही ट्राई-नेशन सीरीज में वैभव सूर्यवंशी भारत-ए के लिए खेल रहे हैं. उन्होंने कुछ अच्छी शुरुआत जरूर की हैं, लेकिन अब तक उन्हें बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पाए हैं. इसी टूर्नामेंट में श्रीलंका-ए के खिलाफ मुकाबले के दौरान मैदान पर हुई तीखी बहस और विवाद के कारण भी वह चर्चा में रहे थे.

अप्टन ने Sports star से बात करते हुए कहा कि वैभव की सबसे बड़ी चुनौती विरोधी गेंदबाज नहीं, बल्कि उनके आसपास पैदा होने वाला शोर होगा. उन्होंने कहा कि दुनिया के कई बड़े और मानसिक रूप से मजबूत खिलाड़ी भी फैन्स, मीडिया, स्पॉन्सर्स, टीम मालिकों, कोच, परिवार और साथियों की अपेक्षाओं के दबाव में रास्ता भटक जाते हैं.

'ज‍िन्हें अगला सच‍िन, धोनी, कोहली कहा गया, वो खो गए' 
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई युवा खिलाड़ियों को एक शानदार आईपीएल सीजन के बाद अगला सचिन तेंदुलकर, अगला विराट कोहली या अगला एमएस धोनी कहा गया, लेकिन उनमें से अधिकांश खिलाड़ी बाद में सामान्य क्रिकेटरों की भीड़ में खो गए. अप्टन के मुताबिक इसकी बड़ी वजह बाहरी अपेक्षाओं और बढ़ती चर्चा में उलझ जाना है.

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उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वैभव को इस दौर से निकालने और सही दिशा देने का काम कौन कर रहा है. अप्टन का मानना है कि अचानक मिली प्रसिद्धि को संभालने के लिए अनुभवी मार्गदर्शन बेहद जरूरी होता है.

कुछ लोग फायदे के लिए करीब रहना चाहते हैं
अप्टन ने चेतावनी दी कि युवा सुपरस्टार बनने के बाद खिलाड़ी के आसपास ऐसे लोगों की भीड़ लग जाती है जो उसके हित से ज्यादा अपनी पहचान और फायदे के लिए उसके करीब रहना चाहते हैं. उनके मुताबिक 15 साल की उम्र में किसी भी खिलाड़ी के लिए यह समझना आसान नहीं होता कि कौन वास्तव में उसकी मदद करना चाहता है और कौन सिर्फ उसकी लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहता है.

वैभव के व‍िवाद पर अप्टन ने क्या कहा 
श्रीलंका में हाल ही में हुए विवाद पर बात करते हुए अप्टन ने कहा कि हर खिलाड़ी से गलती हो सकती है. महत्वपूर्ण यह है कि वह उससे क्या सीखता है. उन्होंने कहा कि अब विरोधी टीमें वैभव को उकसाने की कोशिश करेंगी क्योंकि उन्होंने देख लिया है कि वह भावनात्मक प्रतिक्रिया दे सकते हैं. ऐसे में उन्हें अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने की कला सीखनी होगी.

अप्टन के अनुसार खेल जगत में अक्सर युवा खिलाड़ियों को अचानक मिली लोकप्रियता से निपटने के लिए पर्याप्त मदद नहीं मिलती और कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी इसी वजह से रास्ते से भटक जाते हैं.

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वैभव से एक बात करनी हो तो क्या करेंगे अप्टन? 
उन्होंने कहा कि अगर उन्हें वैभव से सिर्फ एक बातचीत करनी हो तो वह उन्हें आने वाली असफलताओं के लिए मानसिक रूप से तैयार करेंगे. वह उनसे पूछेंगे कि अगर शुरुआती दो या तीन पारियों में रन नहीं बने तो कैसा महसूस होगा, आलोचना का सामना कैसे करेंगे और खुद को कैसे संभालेंगे. अप्टन का मानना है कि सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहना ही आगे बढ़ने की सबसे अच्छी शुरुआत होती है.

वैभव अब आयरलैंड और इंग्लैंड में खेलते दिखेंगे 
वैभव सूर्यवंशी जल्द ही आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर भारतीय सीनियर टीम के साथ अपनी पहली इंटरनेशनल असाइनमेंट के लिए रवाना होंगे. उनकी उम्र को देखते हुए बीसीसीआई ने उनके माता-पिता को भी दौरे पर साथ रहने की अनुमति दी है ताकि वह नए माहौल में सहज महसूस कर सकें.

वैभव के मां-बाप के साथ जाने पर अप्टन ने क्या कहा
हालांकि अप्टन ने इस मुद्दे पर भी संतुलित राय रखी. उन्होंने कहा कि कई बार माता-पिता का सपोर्ट जरूरी होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा दखल नुकसानदायक भी साबित हो सकता है. उनके एक्सपीर‍ियंस में भारतीय माता-पिता, खासकर पिता, कई बार जरूरत से ज्यादा कंट्रोल रखने की कोशिश करते हैं. इससे खिलाड़ी पर अतिरिक्त मानसिक दबाव बढ़ सकता है.

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अप्टन का मानना है कि माता-पिता को यह समझना चाहिए कि कब बच्चे का हाथ पकड़कर चलाना है और कब उसे अपने फैसले लेने की आजादी देनी है. उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ी के पास पहले से ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव होता है, ऐसे में उसे परिवार की अतिरिक्त अपेक्षाओं का बोझ नहीं उठाना चाहिए.

उनके मुताबिक वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा पर कोई सवाल नहीं है. लेकिन आने वाले वर्षों में उनका करियर इस बात से तय होगा कि वह असफलता, आलोचना, शोहरत और उम्मीदों के दबाव को कितनी समझदारी से संभाल पाते हैं.

 

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