टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने रणजी ट्रॉफी के मौजूदा प्रारूप और घरेलू क्रिकेट के शेड्यूल पर सवाल उठाए हैं. उनका मानना है कि इंडिया-ए के मुकाबले रणजी ट्रॉफी के दौरान नहीं होने चाहिए क्योंकि इससे राज्य की टीमों को अपने प्रमुख खिलाड़ियों के बिना खेलना पड़ता है. इसके साथ ही उन्होंने प्लेट ग्रुप में बनने वाले रिकॉर्ड की अहमियत पर भी सवाल खड़े किए हैं.
रणजी ट्रॉफी का नया सीजन रविवार (11 अक्टूबर) से शुरू हुआ, लेकिन उसी दिन इंडिया-ए और ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच तीन मैचों की अनऑफिशियल वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला भी खेला गया. इसके कारण रजत पाटीदार, देवदत्त पडिक्कल और ऋतुराज गायकवाड़ अपनी राज्य टीमों के लिए उपलब्ध नहीं थे. पाटीदार मध्य प्रदेश, पडिक्कल कर्नाटक और गायकवाड़ महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.
इस महीने के आखिर में इंडिया-ए की टीम न्यूजीलैंड दौरे पर तीन अनौपचारिक टेस्ट मैच भी खेलेगी. इससे रणजी ट्रॉफी में कुछ खिलाड़ियों की उपलब्धता पर फिर असर पड़ सकता है. सुनील गावस्कर ने आयोजकों से घरेलू क्रिकेट का कैलेंडर तैयार करते समय इस टकराव से बचने की अपील की है.
न्यूजीलैंड का भी दौरा करेगी इंडिया-ए टीम
सुनील गावस्कर ने मिड-डे में अपने कॉलम में लिखा कि इंडिया-ए के मैच इंटरनेशनल स्तर के लिए खिलाड़ियों को परखने का अच्छा माध्यम हैं. हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि इन मुकाबलों के लिए रणजी ट्रॉफी की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. गावस्कर के मुताबिक, रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा रन बनाने या विकेट लेने वाले कुछ खिलाड़ी भारतीय टीम में जगह मिलने के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ने के लिए संघर्ष करते हैं. कुछ खिलाड़ी जल्द ही टीम से बाहर हो जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक मौके का इंतजार करते रहते हैं.
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उन्होंने इसकी एक वजह घरेलू क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की सीमित भागीदारी को बताया. जब मजबूत खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी में नहीं उतरते, तो कुछ मुकाबलों में प्रतिस्पर्धा का स्तर प्रभावित हो सकता है. ऐसे में व्यक्तिगत आंकड़ों से किसी खिलाड़ी की वास्तविक क्षमता का पूरा अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है.
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सुनील गावस्कर ने इसी संदर्भ में कहा कि कमजोर प्रतिस्पर्धा के बीच किसी बल्लेबाज का एक सीजन में 2000 रन बनाना या गेंदबाज का 100 विकेट हासिल करना भी संभव हो सकता है. उनका तर्क है कि रिकॉर्ड के साथ यह देखना भी जरूरी है कि खिलाड़ी ने किस स्तर की टीमों के खिलाफ प्रदर्शन किया.
प्लेट ग्रुप को लेकर जताई नाराजगी
सुनील गावस्कर ने रणजी ट्रॉफी के प्लेट ग्रुप में टूटते-बनते रिकॉर्ड पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टूर्नामेंट में शामिल करने के फैसले से प्रतियोगिता का स्तर प्रभावित हुआ है. उनके अनुसार, कई नई राज्य टीमों के पास पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं. इन टीमों ने दूसरे राज्यों के उन खिलाड़ियों को मौका दिया, जिन्हें अपनी घरेलू टीम में जगह नहीं मिल पाई थी. ये खिलाड़ी प्रतिभाशाली थे, लेकिन जब प्लेट ग्रुप की टीमों का सामना एलीट डिवीजन की मजबूत टीमों से हुआ, तो दोनों स्तरों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया.
सुनील गावस्कर के मुताबिक जब दोनों डिवीजनों के बीच प्रतिस्पर्धा का स्तर अलग है, तो वहां बने रिकॉर्ड को समान पैमाने पर कैसे देखा जा सकता है. उनके मुताबिक, प्लेट ग्रुप के आंकड़ों को भी रणजी ट्रॉफी के रिकॉर्ड के रूप में दर्ज किया जाता है, जबकि उनके पीछे की प्रतिस्पर्धा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
मौजूदा सीजन में रणजी ट्रॉफी को पांच ग्रुप्स- ए, बी, सी, डी और प्लेट में बांटा गया है. चार एलीट ग्रुप में आठ-आठ टीमें हैं, जबकि प्लेट ग्रुप में छह टीमें शामिल हैं. प्लेट ग्रुप की शीर्ष दो टीमें फाइनल खेलती हैं और विजेता को अगले सीजन में एलीट ग्रुप में जगह मिलती है.