क्रिकेट इतिहास में कुछ प्रदर्शन ऐसे होते हैं, जिन्हें समय भी धुंधला नहीं कर पाता. नरेंद्र हिरवानी का टेस्ट डेब्यू ऐसा ही एक कारनामा है. 18 अक्टूबर 1968 को जन्मे इस पूर्व भारतीय लेग स्पिनर ने महज 19 साल की उम्र में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पहले टेस्ट मैच में 16 विकेट लेकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था. हालांकि, ऐतिहासिक शुरुआत के बावजूद हिरवानी का इंटरनेशनल करियर उम्मीदों के मुताबिक लंबा और उतना सफल नहीं रहा.
नरेंद्र हिरवानी ने जनवरी 1988 में मद्रास (अब चेन्नई) में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया था. चश्मा पहनने वाले इस लेग स्पिनर ने पहली पारी में 61 रन देकर 8 विकेट हासिल किए. दूसरी पारी में भी उनकी फिरकी का जादू जारी रहा और उन्होंने 75 रन देकर 8 बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया. इस तरह हिरवानी ने पूरे मैच में 136 रन देकर 16 विकेट चटकाए और भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई. दूसरी पारी में विकेटकीपर किरण मोरे ने उनकी गेंदों पर पांच बल्लेबाजों को स्टम्प आउट किया था. किसी टेस्ट पारी में एक गेंदबाज की गेंदों पर पांच बल्लेबाजों का स्टम्प आउट होना भी एक असाधारण उपलब्धि है. हिरवानी के इस प्रदर्शन ने उन्हें रातोंरात सुर्खियों में ला दिया.
हिरवानी का रिकॉर्ड टूटना मुश्किल
टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करते हुए सबसे ज्यादा विकेट लेने के मामले में नरेंद्र हिरवानी आज भी पहले स्थान पर हैं. ऑस्ट्रेलिया के बॉब मैसी इस सूची में दूसरे नंबर पर हैं. उन्होंने 1972 में लॉर्ड्स टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ 137 रन देकर 16 विकेट हासिल किए थे. वहीं, इंग्लैंड के फ्रेडरिक मार्टिन तीसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने 1890 में ओवल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 102 रन देकर 12 विकेट चटकाए थे.
नरेंद्र हिरवानी की उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने अपने पहले ही टेस्ट में उस दौर की मजबूत टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ यह कारनामा किया था. उनके प्रदर्शन ने भारतीय क्रिकेट में एक नई उम्मीद जगाई, लेकिन आगे चलकर वह अपनी शुरुआती सफलता को लगातार दोहरा नहीं सके.
बिना ब्रेक लिए फेंके 59 ओवर
नरेंद्र हिरवानी के नाम टेस्ट क्रिकेट में एक और अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है. 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ ओवल टेस्ट में उन्होंने बिना किसी ब्रेक के लगातार 59 ओवर गेंदबाजी की थी. इस दौरान उन्होंने 18 मेडन ओवर फेंके और 137 रन देकर एक विकेट हासिल किया. लगातार 59 ओवर गेंदबाजी करने का यह रिकॉर्ड अब तक अटूट है. यह उपलब्धि हिरवानी की सहनशक्ति और लंबे समय तक गेंदबाजी करने की क्षमता को दर्शाती है. उनके करियर की सबसे चर्चित उपलब्धियों में इस रिकॉर्ड का भी खास स्थान है.
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नरेंद्र हिरवानी ने अपने शुरुआती चार टेस्ट मैचों में 36 विकेट हासिल किए थे. इतनी शानदार शुरुआत के बाद उनसे भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक अहम भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही थी. लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर की परिस्थितियों में उन्हें संघर्ष करना पड़ा. अगले नौ टेस्ट मैच विदेशी धरती पर खेले गए, जहां वह केवल 21 विकेट ले सके और उनका गेंदबाजी औसत 59 रहा.
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भारत की स्पिन के अनुकूल पिचों पर नरेंद्र हिरवानी की गेंदें बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती थीं, लेकिन विदेशी परिस्थितियों में वैसा प्रभाव कायम रखना मुश्किल साबित हुआ. इसी दौरान अनिल कुंबले के उभार के साथ हिरवानी को भारतीय टीम में नियमित अवसर मिलने भी कम हो गए.
हिरवानी का ऐसा रहा करियर
नरेंद्र हिरवानी का अंतरराष्ट्रीय करियर 1988 से 1996 तक चला. इस दौरान उन्होंने भारत के लिए 17 टेस्ट और 18 वनडे इंटरनेशनल मुकाबले खेले. टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम पर 30.10 की औसत से 66 विकेट दर्ज हैं, जबकि वनडे में उन्होंने 31.26 के एवरेज से 23 विकेट हासिल किए.
इंटरनेशनल क्रिकेट में सीमित अवसरों के बावजूद घरेलू स्तर पर नरेंद्र हिरवानी का प्रदर्शन शानदार रहा. उन्होंने 167 फर्स्ट क्लास मैचों में 723 विकेट लिए, जिनमें 400 से अधिक विकेट मध्य प्रदेश की ओर से आए. 1996-97 के सीजन में बंगाल के लिए खेलते हुए उन्होंने 29 विकेट भी हासिल किए. हिरवानी ने 2006 में अपने 23 साल लंबे फर्स्ट क्लास करियर को अलविदा कहा. इसके बाद 2008 में उन्हें राष्ट्रीय चयन समिति में शामिल किया गया और उन्होंने क्रिकेट प्रशासन में नई भूमिका निभाई.